Friday, May 01, 2009

भैया मत न भये दस-बीस

http://web.archive.org/web/20140419212644/http://hindini.com/fursatiya/archives/607

25 responses to “भैया मत न भये दस-बीस”

  1. अभय तिवारी
    आप धन्य हैं प्रभु!
  2. Kajal Kumar
    नेता लोग, पहले एफ़िडेविट में संपत्ति घटा कर दिखाते थे, आजकल बढा कर दिखा रहे हैं…इस उम्मीद में कि कल आने वाली काली कमाई का हिसाब देने से पीछा छूटा …
  3. dhiru singh
    वोट तो आपने डाल ही दिया होगा अब हमारी बारी है . क्या करे गलत मे से कम गलत को चुनना मजबूरी बन गयी है हमारी . ख़ैर आपकी पसंद हमेशा की तरह लाजबाब है . सच मे निराशा बेलगाम घोडी ही है .
  4. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    चुनावी चकल्लस बहुत रोचक बन पड़ी है। आनन्द आ गया पढ़कर। धन्यवाद।
    जनप्रतिनिधियोचित आचार-व्यवहार के क्या कहने…!
  5. ajit ji wadnerkar saheb
    क्या ग़ज़ब…सूरदास जी असीसते होंगे आपको।
    नेताजी खींसे निपोरते होंगे।
  6. संजय बेंगाणी
    यहाँ मतदान 50 प्रतिशत के आसपास रहा. भाषण एक कला है और हर नेता को यह कला आनी ही चाहिए. ऐसा न हो कि वो क्या बोल रहें है यही समझ ना आये. हँसी मजाक में लालू आगे थे, अब वे भी बिदक गए है. बाकि रह गया है “पप्पी-झप्पी”.
  7. Shiv Kumar Mishra
    “भाषणों में लोगों ने अभद्रता के नये आयाम छुये। सबसे कम अभद्र भाषण उन लोगों ने दिये जिनकी हिन्दी कमजोर थी।”
    इतने साल हो गए जनार्दन द्विवेदी जी को, हिंदी पढाते, अभी भी हिंदी कमजोरे है?
  8. ताऊ रामपुरिया
    इमरजेंसी के बाद हुई एक सभा में अटलजी ने अपने भाषण में कहा- इमरजेन्सी के बाद अगर हमारी सरकार बनी तो हम वायदा करते हैं जिनकी नौकरियां चली गयीं हैं उनको नौकरियां वापस मिल जायेंगी , जिन पर झूठे मुकदमें लगे वे मुकदमें वापस हो जायेंगे लेकिन जिनकी नसबंदी हो गयी है उनकी नस जुड़वाने की हम कोई गारंटी नहीं दे सकते।
    बहुत सामयिक पोस्ट लिखी आपने. अब ये हास्यबोध राजनिति मे किस्से कहानियों तक ही सीमित रह गया है.
    रामराम
  9. Anonymous
    aap ki pasand fir lajawaab..!
  10. anil kant
    वाह मजा आ गया …झकास
  11. तस्लीम
    वैसे मतों में भी अगर एमएलसी की तरह ही प्रथम और द्वितीय वरीयता का आप्शन दिया जाए, तो अच्छा हो।
    ———-
    सावधान हो जाइये
    कार्ल फ्रेडरिक गॉस
  12. Abhishek Ojha
    तो क्या यह माना जा सकता है कि इस बार के चुनाव निर्गुण विधारधारा से सगुणविचारधारा की तरफ़ उन्मुख हुये. जय हो बाबा फुरसतिया !
  13. mumbai tiger
    बहुत ही बढिया जी । आभार
    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभु तेरापथ
  14. दिनेशराय द्विवेदी
    हम जानते हैं
    इस चुनाव से कुछ नहीं बदलना
    बदलेंगे कुछ चेहरे, बस!
    फिर वही सब कुछ होगा
    जो होता आया है
    अभी खेंचते हैं सब
    एक दूसरे की चड्डियाँ
    अच्छा है हो जाएं सब
    पूरे के पूरे नंगे
    कौन है सब से कम नंगा
    प्रतियोगिता का अंत हो
    हो जाने दो चुनाव
    शोले बरसाते मौसम में
    सोचो, बचने का उपाय
    मत दो आमंत्रण लू को लगने का
    चुनाव बाद आएंगे
    सब के सब नंगे
    सोचो! कैसे बचानी है
    अपनी अपनी चड्डियाँ?
  15. Arvind Mishra
    अच्छी फुरसतिया !
  16. Isht Deo Sankrityaayan
    भैया मत न भये दस-बीस,
    एक हुतौ सो डारि आये हैं, अब मती निपोरो खींस,
    भाई वाह! पूरा पद ही बड़ा ज़ोरदार है.
  17. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    सबसे कम अभद्र भाषण उन लोगों ने दिये जिनकी हिन्दी कमजोर थी।
    तबइ हम कहते हैं कि जूतमपैजारीयता धाकड़ हिन्दी वाले ही करते हैं। सारे गली मुहल्लों में उनका ही डंका है!
  18. amit
    39 प्रतिशत मतदान? बस? लक्ख दी लानत!!
    सरकार और नेताओं को सबसे अधिक रोने वाले लोग वही होते हैं जो वोट नहीं डालने जाते, जैसे वोट न डाल कुछ उखाड़ लेंगे या कोई किला फतह कर लेंगे! इनमें अधिकतर पढ़े लिखे गंवार (गंवार इसलिए कि ये सोचते हैं कि वोट न डाल फन्ने खां हो लेंगे जबकि भुगतना बाद में इनको भी पड़ता है) होते हैं जिनसे अपेक्षा की जाती है कि ये कुछ समझ रखते होंगे। अब जिनसे समझ की अपेक्षा की जाती है वे ही वोट नहीं डालेंगे तो सरकार ना समझ लोगों के वोट से बन जाएगी न, तो थकी हुई सरकार के लिए अंत पंत दोषी कौन?!
    इस देश का वाकई कुछ नहीं हो सकता, सब राम भरोसे चल रहा है!!
  19. - लावण्या
    आभार आपका सुकुल जी ..पूरा चित्र खीँच दिया गर्मी से भरे दिनोँ मेँ चुनाव का हाल बखूबी लिख दिया है -
    देखेँ क्या होता है अब आगे ..
  20. नितिन
    लेख अच्छा लगा लेकिन ३९% में IPL का कितना हाथ है इसकी जाँच होनी चाहिये :)
    पढे लिखों को यही कहा जा सकता है कि If you don’t vote, don’t whine!! शायद अंग्रेजी में कहने पर जल्दी समझ आ जाये।
  21. किसी बहुत ऊंची पहाड़ी से कोई सोता फ़ूटे
    [...] के लेख में हमने लिखा था-भाषणों में लोगों ने [...]
  22. cmpershad
    इस चुनावी दौर की गर्मी में नेताओं को तो दौरे पडते रहेंगे १६ मई तक। लेते हैं एक छोटा सा अंतराल…..तब तक लिए आज्ञा :)
  23. गौतम राजरिशी
    देव, इस सूरदासी रूप “मत न भये दस-बीस” पर दंडवत हूँ…..
  24. anitakumar
    निराशा एक बेलगाम घोड़ी है
    न हाथ में लगाम होगी न रकाब में पांव
    खेल नहीं है उस पर गद्दी गांठना
    दुलत्ती झाड़ेगी और जमीन पर पटक देगी
    बिगाड़ कर रख देगी सारा चेहरा मोहरा
    बहुत खूब
  25. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] भैया मत न भये दस-बीस [...]

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