Saturday, May 02, 2009

किसी बहुत ऊंची पहाड़ी से कोई सोता फ़ूटे

http://web.archive.org/web/20140419220052/http://hindini.com/fursatiya/archives/609

25 responses to “किसी बहुत ऊंची पहाड़ी से कोई सोता फ़ूटे”

  1. Dr.Arvind Mishra
    यह भी रही बढियां फुरसतिया ! खुशवंत की कोई सानी नहीं !
  2. विवेक सिंह
    माना आपकी लेखनी में जादू है . पर आज हमने अंटी चढ़ाई हुई है :)
  3. पा.ना. सुब्रमणियन
    सुबह सुबह तबीयत मस्त कर दी आपने.
  4. Shiv Kumar Mishra
    अरे ये तो गड़बड़ हो गया. आपकी पोस्ट पर जो कमेन्ट मेरी तरफ से गया, वह शायद किसी और ब्लॉग के किसी और पोस्ट के लिए था. एक साथ दो पोस्ट खुले रहने से कमेन्ट आपके ब्लॉग पर चला गया…..:-)
    लेकिन ये ठीक हुआ. कमेन्ट के आधार पर आपने एक और धाकड़ पोस्ट लिखी.
  5. नितिन
    गजब लेखनी! सच कहा है मनुष्य बड़ी खोजी प्रवृत्ति का होता है- दुखी रहने का बहाना तलाश ही लेता है।
  6. dr anurag
    लोजी कल लो बात
    आक खुशवंत सिंह की इच्छा हुई की काश उन पे भी कोई जूता फेंके ….जिस दिन कोई सच मच मार देगा उस दिन कोई पुराना पुरुस्कार सरकार को घोषणा करके लौट देंगे ….हम सोच रहे थे की आज लाईट हमारे यहाँ आएगी ….मैदाम जो आ रही है भासन देने….पर कल लो बात .अभी अभी लाईट गयी है ..
    इन दिनों हर चीज का हल्ला मच रहा है…खाली पानी से प्यास नहीं बुझती ….तो ?ग्लूकोन डी पियो .कोम्प्लेन पीने वाले बच्चे ज्यादा तेजी से बढ़ते है……कल सुना की मल्लिका ने भी अपना मिल्क शेक लांच कर दिया है .लो जी हम भी भटक गए विषय से……विषय की छोडिये…
    सारा कसूर इस वी एस एन एल का है …….एस. एम् .एस का बोझ ढो नहीं पाता .बैलगाडी की माफिक चलता है …सुबह धलेकेला था जी हमने तो…दोपहर बाद आप पे पहुंचा …..
    इसलिए हम बी एस एन एल वालो को एक दिन पहले ही जन्मदिन की बधाई दे देते है जी…..
  7. जि‍तेन्‍द्र भगत
    अभद्रता पर भद्र लेख :)
  8. anil pusadkar
    ये बात सही है जो जैसा होता है,वैसा ही दूसरो के बारे मे सोचता है। हमारी मंडली भी दिन भर के तनाव को शाम होते ही कोने मे फ़ेंक देती है और मस्त होकर सारी दुनिया के मस्त होने के बारे मे सोचती है।मंडली मे शामिल होने का एकमात्र रूल है सिर्फ़ खुश रहो और अगर ना हो तो कम से कम खुश दिखो।
  9. Abhishek Ojha
    खुल के और खिल के हँसना-हँसाना दोनों चाहिए. पाठक जी सही है !
  10. समीर लाल
    वामन हुये विराट चलो वंदना करें,
    जर्रे हैं शैलराट चलो वंदना करें।
    –बेहतरीन आलेख…खुशवंत सिंग का तो क्या कहा जाये.
  11. ताऊ रामपुरिया
    बहुत धांसू लिखा जी आपने. पर थोडा साईज ज्यादा ही कम हो गया?
    रामराम.
  12. दिनेशराय द्विवेदी
    बहुत सही है। क्रोध है, लेकिन उस के बरसने का स्थान गलत है। खुशवंत बहुत खूब लिखते हैं। खास तौर पर जिस तरह वे महिलाओं पर फिदा होते हैं, अच्छा लगता है। बिलकुल दागिस्तानी कवि रसूल गम्जातोव की तरह।
  13. Isht Deo Sankrityaayan
    अजी देखिए, अपन तमाम परेशानियों के बावजूद मस्त टाइप हैं. जब चाहिए दिल्ली आइए और बैठ लिया जाए, बोल बतिया लिया जाए.
  14. Dr.Manoj Mishra
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने ,आनंद आ गया और हाँ आपकी पसंद तो उत्क्रिस्ट है .
  15. मीनाक्षी
    सच कहा कि इंसान दुखी रहने के कारण खोज ही लेता है लेकिन चाहे तो खोजी इंसान खुशी भी ढूँढ लेगा.
  16. kanishka
    बहुत अच्छे ! गर फुरसत में इतना लिख गए तो …………. भगवन करें की आप हमेशा फुरसत में रहे …
    ताकि आपकी लेखनी पढने से हमें न फुरसत मिले
  17. गौतम राजरिशी
    सच कहते हो देव कि “मनुष्य बड़ी खोजी प्रवृत्ति का होता है- दुखी रहने का बहाना तलाश ही लेता है”
    और हर बार की तरह ’मेरी पसंद’ लाजवाब
  18. himanshu
    पसन्द की पंक्तियों में यह पंक्ति खूब रही -
    आंधी मलयसमीर का ओढ़े हुये खिताब,
    निर्द्वन्द व्यवस्था ने अपहृत किये गुलाब,”
  19. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    क्या बतायें – गर्मी भी बहुत है हिन्दी भी है बहुत खराब। तब भी ठेले जा रहे हैं पोस्टें और टिप्पणियां – बिना अपशब्द के प्रयोग के।
    शायद छोटे मोटे संत टाइप हैं क्या हम!
  20. LOVELY
    वाह !!..बहुत सार्थक लेख और सामयिक भी.
  21. अशोक पाण्‍डेय
    किसी लैपटाप के कुंजीपटल से कोई सोता फूटे
    पसर जाए ब्‍लॉगजगत के सीने पर
    झरना सा बनकर :)
  22. Ashish Khandelwal
    शानदार आलेख.. आभार
  23. anitakumar
    बहुत ही बड़िया पोस्ट
  24. एक एक्कनम एक, दो दूनी चार, तीन तियाँ नौ.. .. » कुछ तो है... जो कि,
    [...] गुरु, जरा  टैम तो मिले ? ब्लागजगत का फ़ुरसत तो आप हथियाये बैठे हो । ’ अथ तीन बजे [...]
  25. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] किसी बहुत ऊंची पहाड़ी से कोई सोता फ़ूटे [...]

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