Friday, July 24, 2009

बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार

http://web.archive.org/web/20140419221546/http://hindini.com/fursatiya/archives/661

38 responses to “बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार”

  1. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    मुंबई डूबी रो रही, है कम्पू गर्मी से हलकान,
    टब सा उसको उलट दो, आये जान में जान!
    -आप तो बारिश में कवि हो लिए जी!! कुछ लेते क्यूँ नहीं?
  2. Dr.Arvind Mishra
    शानदार जानदार धारदार
    मुला अपुन का तो अभी यही हाल है -
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
  3. seema gupta
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
    विदा हुये जब बरसकर हो गया उनमें प्यार।
    खुबसूरत पंक्तियाँ भई, उ का है न बादल बदली का प्यार वाह ”
    regards
  4. mahendra mishra
    जब बादल से बदरी भिडी
    अब पैदा हो गई है.. बूंदे
    खूब बरस रही है….. बूंदे
    जोरो से होने लगी बरसात
    पंडित जी आपकी रचना बहुत ही बढ़िया है . खूब लिखी है आपने .आभार
  5. mehek
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
    विदा हुये जब बरसकर हो गया उनमें प्यार।
    waah bahut khub
  6. दिनेशराय द्विवेदी
    जनजीवन को आप बहुत सुंदर तरीके से अभिव्यक्त कर लेते हैं।
  7. शिव कुमार मिश्र
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
    विदा हुये जब बरसकर हो गया उनमें प्यार।
    बादल ने ही कुछ कहा होगा पहिले….लेकिन अंत भला त सब भला.
  8. विवेक सिंह
    बारिश आवत देख के, अम्मा करिन पुकार
    कपड़ा अरगनी से उतार के, कमरा में दो डार।

    उपरोक्त पंक्तियों से सिद्ध होता है कि बिना अम्मा के कहे कवि अपनी समझ से बाहर से कपड़ों को अन्दर नहीं लाता, और लाकर भी व्यवस्थित करके रखने की बजाय उससे यही उम्मीद की जाती है कि वह डाल ही दे तो काफ़ी है, अम्मा की नजरों में कवि कितने काम की चीज है इससे साफ़ पता चलता है .
    बादल फ़टा पहाड़ पर मर गये दो सौ लोग,
    जांच हुई पता चला उसको गुस्से का था रोग।

    यहाँ बादल की गलती को रोग बताकर उसकी सजा कम करवाने की साजिश रचने से कवि के वकील होने का आभास होता है .
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
    विदा हुये जब बरसकर हो गया उनमें प्यार।

    बादल से बदली भिड़ी को यह क्यों नहीं कहा कि बदली से बादल भिड़ा ? इससे कवि के पुरुषवादी , और महिला विरोधी विचारों का खुलासा हो रहा है.
    बदरी-बदरे की प्रीत से सुलगे पंचायत के लोग,
    फ़ांसी, आगी , चिता का अब प्रेमकुंडली में योग।

    पंचायत के लोगों को सुलगा हुआ बताने में अतिशयोक्ति अलंकार है .
    मुंबई डूबी रो रही, है कम्पू गर्मी से हलकान,
    टब सा उसको उलट दो, आये जान में जान!

    मुंबई को उलटने की बात कहकर कवि ने मराठी मानुष को ठेस पहुँचाई है .
  9. पी सी गोदियाल
    बादल फ़टा पहाड़ पर मर गये दो सौ लोग,
    जांच हुई पता चला उसको गुस्से का था रोग।
    ये पहाडियों पर ही क्यों गुस्सा उतारा बादल जी ने ?
  10. PN Subramanian
    बहुत ही सुन्दर. आभार
  11. Anonymous
    दोहे मन को सोह रहे भैया शुक्ल अनूप.
    बारिश कब तक होएगी रुला रही है धूप.
  12. Lovely
    बदली के (बहाने) खूब मौज लिए जा रहे हैं :-)
  13. ताऊ रामपुरिया
    बादल पहाड पर क्युं फ़टा? इस साजिश मे कौन कौन शामिल था? तुरंत एक जांच आयोग बैठाया जाये. और इस बात की तसल्ली की जाये कि इस घटना मे कहीं आतंक वादियों का हाथ तो नही है. और हो सकता है लादेन साहब के शहजादे भी उपर पहुंच कर बादलों को बरगला कर यह आतंक वादी कारवाई करवा रहे हों.
    रामराम.
  14. रचना.
    बरस बरस जब थक गयी, कमर गयी है टूट!
    “प्यार हुआ क्यूं देरी से?” बदली गयी है रूठ!!
    मुम्बई मे साहस भरा, बादल से वो डरती नही!!
    डर कर या फ़िर घबरा कर, ऐसे कभी वो रुकती नही!!
    :)
  15. वन्दना अवस्थी दुबे
    सचमुच इधर कवितायें ज़्यादा लिख रहे हैं आप…सूखे की स्थिति ने कवि बना दिया? है बहुत अच्छी कविता. बधाई.
  16. anita kumar
    :) बहुत खूब , वाकई बहुत ज्यादती है जी, कानपुर कब से नंबर लगाये खड़ा है। यूं तो समीर जी की टिप्पणी से विक्स वालों को कानपुर में एक नयी मार्केट का पता चल गया होगा लेकिन विवेक की टिप्पणी से हम पूर्णत्या सहमत हैं।
  17. हर्षवर्धन
    बढिया बरसाती लाइन है
  18. काजल कुमार
    बहुत अच्छे :)
  19. अशोक पाण्‍डेय
    अब पता चला हमारे यहां बारिश क्‍यों नहीं हो रही… बादल बदली प्‍यार कर फरार जो हो जा रहे हैं :(
  20. कुश
    आखिर भिड़ा ही दिया.. मुझे तो पहले ही पता था..
  21. अजय कुमार झा
    बादल से बदली लड़ गयी,
    बढ़ गयी फिर तकरार ,
    इहाँ इत्ती गर्मी बड़ी,
    हमने कपडे लिए सब फाड़.
    कोई डूबत है..कोई सूखत है,
    अजब लीला है सरकार ,
    ना जान इहाँ बचे , न जान उहाँ ,
    कैसे होइंहें बेडा पार
  22. Dr.Manoj Mishra
    बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार,
    विदा हुये जब बरसकर हो गया उनमें प्यार।……..
    क्या खूब वर्णन है.
  23. रौशन
    गजब का विश्लेषण किया विवेक जी ने
    मजे की बात यह है की हम अनूप जी के ब्लॉग पर आ कर उनकी पोस्ट की धुलाई की तारीफ़ कर रहे हैं
  24. गौतम राजरिशी
    अहा!
  25. बवाल
    वाह वाह फ़ुर्सतिया जी क्या बेहतरीन कविता लिख डाली साहब! बहुत ही लाजवाब! और उतना ही बढ़िया विश्लेषण हमारे भाई विवेक जी का, इस पोस्ट पर टिप्पणी के माध्यम से।
  26. - लावण्या
    बरसात में बदली से मिले बादल राजा
    और बज गया कविता का बंद बाजा ;-)
    सस्नेह,
    - लावण्या
  27. चण्डीदत्त शुक्ल
    अच्छा लिखते हैं आप…ऐसे ही लिखते रहें…शुभकामनाएं. एक बात और–आप मेरे ब्लॉग http://www.chauraha1.blogspot.com पर आए. आपने एक पोस्ट पसंद की….अपनी टिप्पणी दी….अच्छा लगा. ऐसे ही चौराहे पर आते रहें और हौसला बढ़ाते रहें. बहुत-बहुत धन्यवाद.
    चण्डीदत्त शुक्ल, फोकस टेलिविजन, नोएडा
  28. Gyan Dutt Pandey
    अच्छा हुआ विवेक सिंह ने अर्थ समझा दिया। वर्ना इतनी कड़ी कविता पल्ले नहीं पड़ रही थी!
  29. विकास पाण्डेय
    पहली लाइन बडी ही भावपूर्ण लिखी।
    महोदय अम्मा कवि से कपड़े उतारने को नही कह रही है।
    कवि कोई हिरोइन थोड़े ही हैँ।
    परिहास भी स्तरीय होने चाहिऐँ।
  30. yuva
    बारिश पर ऊपर इतनी व्याख्या हो चुकी की अब नया कुछ करने की गुंजाइश कम ही है. पर हमारे ब्लॉग पर आने और टिप्पणी के लिए धन्यवाद
  31. Abhishek Ojha
    सुकवि फुरसतिया का बारिश सौन्दर्य !
  32. kanchan
    :) :)
  33. sushila puri
    aapka blog padha…achcha laga,ab krisan bihari ji ko thanx kahna padega aapse parichay ke liye…..
  34. Abhishek
    बदरी संग बादल गए इ कैसन बतिया
    बिन बरखा कवि बन गए भैया फुरसतिया!
  35. Darbhangiya
    बदरा बदरी की का कहें
    इहाँ (बंगलोर में) छुप के रहें
    मौज मनावत छुप छुप के
    उत्तर में लोगबाग झुलस रहे.
  36. रंजना
    वाह वाह वाह !!!!! क्या बात कही…….कमाल के दोहे हैं…
  37. Priyankar
    बादल से बदली को यूं ही भिड़ाते और प्रेम की वर्षा कराते रहिए . बल्कि एक-दो बादल-बदली को तो अर्मापुर में स्थाई रूप से बसा दीजिए . बार-बार बुलाने झंझट से मुक्ति और मर्जी से टैम-टैम पर बारिश की व्यवस्था . जमताऊ दोहे .
  38. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] बादल से बदली भिड़ी फ़िर होती गयी तकरार [...]

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