Sunday, August 02, 2009

बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी

http://web.archive.org/web/20140419213427/http://hindini.com/fursatiya/archives/677

37 responses to “बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी”

  1. आशीष
    हे राम ! और क्या कहे !
  2. ताऊ रामपुरिया
    राम कहिन सुन लछिमन भ्राता। हमको ब्लाग बहुत है भाता।
    भांति-भांति के लोग लुगाई । ब्लाग बना करते ठेलुहाई।
    जय हो प्रभु..जय हो..जय हो!
    रामराम.
  3. seema gupta
    विभीषण होगा माडरेटर मेरा । हनुमत करेगा टिप्पणी वगैरा।
    सीता की जब यादैं अईहैं । झट से हम एक पोस्ट चढैंहैं।
    कविता लिखिबे धांसू वाली । वार वियोग न जैहे खाली।
    रावण से कहो नेट लगवाओ । वाटिका अशोक मार्डन करवाओ।
    हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा जवाब नहीं आपका भी हा हा हा
    regards
  4. मीनाक्षी
    अनूपजी…यह भी ‘परेशानी’ है कि तू-तू मैं मैं …नोंक झोंक नहीं होती…
    अवस्थीजी की कविता असरदार लगी… ईस्वामी के परिवार में आए नन्हे मुन्ने नए सदस्य को खूब प्यार और आशीर्वाद…
  5. विवेक सिंह
    बड़े-बड़े महापुरुषों की जिन्दगी का तो नहीं पता पर छोटे महापुरुषों की जिन्दगी अवश्य ही झंझट प्रधान होती है,
    हम को ही देख लीजिए, नित्य कोई न कोई झंझट हो ही जाता है,
    हमने आपका आधा प्रश्न तो हल कर दिया, बाकी आप करें :)
  6. Shiv Kumar Mishra
    जय हो!
    रामचंद्र जी के ब्लॉग के बारे में खबर देने के लिए साधुवाद!
    ब्लॉग पोस्ट को ठेलकर राम हुए हलकान
    देख बेनामी टिप्पणी टैंक चढ़े भगवान्
  7. अर्कजेश
    बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी………….ख्याल अच्छा है !
  8. वन्दना अवस्थी दुबे
    आज तो आपने हंसा-हंसा के मार ही डाला.अकेली बैठी पढ रही हूं, और लोट-पोट हो रही हूं. क्या कल्पना है! और चौपाइयां? हे राम!!!!
  9. चंद्र मौलेश्वर
    “लेकिन अब देखिये मर्यादा पुरुषोत्तम कैसी बेचारी जिन्दगी जिये। न बेटे का कहीं एडमिशन कराया, न कभी किसी का जन्मदिन सेलिब्रेट किया, न कभी पिकनिक गये, न कभी ब्लाग लिखा न कहीं कमेंट किया।”
    ये बडे़ लोगों की भी क्या नीरस ज़िन्दगी होती है:)
  10. dr anurag
    कभी कभी आपकी निरंतरता से रश्क होता है….खुदा आपके मूड को बनाये रखे ….
  11. कुश
    अगर हनुमान जी भी राम जी के साथ मिलकर ब्लॉग बनाते तो उनके ब्लॉग का नाम क्या होता.. ?
    “सियावर रामचंद्र और हनुमान का साझा ब्लॉग”
  12. shefali pande
    बहुत बढ़िया ..हँसी नहीं रुक रही है …..अवस्थी जी की कविता लगाने के लिए आभार
  13. दरभंगिया
    वही हम कहें कि सुबह आपको ऑनलाईन देखा पर चर्चा अबहु तलक नही दिखी, जरूर कुछ लिख रहे होंगे. लो आ ही गई. महापुरुष के झगड़े भी तो महान गोपनीय होते होंगे.
    अगर रामचन्द्र जी ब्लॉग लिखते तो खामखा तुलसीदास जी के धंधे बन्द हो जाते. वैसे भी बेचारे बिना एडसेन्स की पतली कमाई और रॉयल्टी लिये ही गुजर गये.
    और वो प्लग-इन वाली बात पर कोई जवाब नहीं आया तो उसका कारण अब समझ में आया. हम जात हैं उनको भी टिपिया के ई-बधाई दे आते हैं.
  14. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    हमें भी महापुरुषों की तरह लग रहा है कि बहुत से जरूरी काम नहीं किये। आज मन हो रहा है रसमलाई खा ही ली जाये; देखी जायेगी! :-)
    ई-स्वामी को बधाई। छोरे की फोटो प्रस्तुत करें!
  15. abha
    सच तो यही है कि बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी बेकार होती है, पर सुमन भाभी के साथ तू और मै होने पर गरम समोसा नहीं आइसक्रीम खिलाइए…..
  16. समीर लाल
    हा हा हा हा!! ये रामचन्द्र जी के साथ भी हम आ गये..खुशी ये भई कि अमिताभ को कहीं तो पछाड़ा… :)
    बहुते गजब लिख मारे हो भाई;
    सीता की जब यादैं अईहैं । झट से हम एक पोस्ट चढैंहैं।
    कविता लिखिबे धांसू वाली । वार वियोग न जैहे खाली।
    :)
    ई-स्वामी और मीनाक्षीजी को बधाई!
    स्व.रमानाथ अवस्थी जी की रचना बहुत पसंद आई. आभार.
    साधुवाद! :)
  17. हिमांशु
    दम साध कर बैठना पढ़ता है आपको पढ़ने के निमित्त । कारगुजारियाँ अनगिन हैं आपकी ।
    मैं तो आपकी पसंद पर बलिहारी – रमानाथ अवस्थी जी की कविता पढ़ने का अवसर दिया आपने । वैसे फोटो भी तलाश रहा था उनकी । कुछ गीत मौका मिले तो ठेलूँगा रमानाथ जी के ।
  18. nirmla.kapila
    तो आज फिर तू तू मैं मै हो ही जाये बडिया पोस्ट आभार्
  19. रंजना
    ओह, क्या कहूँ…. हंसकर दुहरे हुए जा रहे हैं .. अभी तो शब्द ही नहीं मिल रहा कुछ कहने को……
    लाजवाब ! वाह ! वाह ! वाह !!!
    आपकी कल्पनाशक्ति अभिव्यक्ति और सियावर रामचन्द्र की जय.
  20. झालकवि 'वियोगी'
    कारन कवन नाथ नहि आये, देरि होइ गई ना टिपियाये
    मन महँ लिखा ब्लॉग-सुख नाही, एक टिप्पणी जो मिलि जाही
    हनुमत चितवत राम की ओरा, किया मुनादी पीटि ढिंढोरा
    सब बानर मिलि ब्लॉग बनावा, लिखि टिप्पणी प्रसाद चढ़ावा
    जामवंत नल-नील बुलावा, अंगद संग मिलि ब्लॉग बनावा
    हरिष हुए तब लछमन भ्राता, हरषे संग सुमित्रा माता
    आये भरत संग सब लोगा, ख़तम हुआ रघुबीर वियोगा
    भरत भये टंकड़ अधिकारी, कोप भवन पहुँची महतारी
    अवधपुरी भई ब्लॉगर देशा, प्रजा बीच पहुंचा संदेशा
    प्रति जन एक टिप्पणी आवे, देखि प्रभु का मन हरषावे
    पुरुषोत्तम का ब्लॉग फिरि होइ गया नंबर एक
    रावण बैठा क्रोध में, टाइप करता लेख
  21. Anonymous
    बोलो राजा रामचन्द्र की जै…
    भई वाह. आखिरी लाइन तक रौ निभा ले गए, वरना मज़ा की जगह सज़ा हो जाती.
  22. abha
    बिना नमक की दाल कह रहे है राम सीता सतयुग में मदीरापान कर अलमस्त रहते थे ,ई स्वामी को बेटे की बधाई कहे …बाकी थोडी उजबुक हूँ कुछ बात देर से समझ आती है उसके लिए माफी ।
  23. बी एस पाबला
    ये ब्लॉग रामायन भी खूबै रही
  24. venus kesari
    बोलो सियावर रामचन्द्र की जै
    नोक झोक दायरे में रहे तो ठीक नहीं तो………ले थाली,…… ले लोटा…..
    (और बेलना भी)
    है की नहीं :)
    venus kesari
  25. Lovely
    हम का कहें? ..हमारी खटर-पटर जरा कम होती है :-)
  26. anita kumar
    लगता है सुमन जी से लंबी नौक झौंक हुई है, राम चौपाइयां तो गजब की हैं
  27. लँठ कवि  सुलती दास

    तऽ हम आगे की कथा सुनाता हूँ..
    दायें कँधे पर लैपटाप और बायें कँधे पर दूनाली टाँग प्रभु वन को प्रस्थान करते भये ।
    हाँ तऽ प्रस्थान करते भये.. फेर्र आगे का हुआ ?
    तऽ किड़बिड़ किड़बिड़ झईनन्ना झईनन्ना हाँय !

    “आगे चलत राम-रघुराई,
    पाछे लछिमन बीड़ी सुलगाई
    राम सहरष फिरि मोहेऊ एक सुट्टा दीन्हों,
    लछिमन तड़कै काहे बँडल नाहीं लीन्हों
    राम निहोरत छवि सुधारि हेत पईसा नहीं लावा भ्राता
    लछिमन बिफ़रे केहि विधि वानर वोट पईहो तुम ताता..

  28. ल्यो, ई-छोरों का फ़ोटू लगैरिया हूं!
    [...] जिक्र गुरुदेव फ़ुरसतियाजी ने भी अपनी हाल-आफ़-फ़ेम क्लास लेटेस्ट पोस्ट में क…. वहां टिप्पणियों में पढा कि ज्ञानजी [...]
  29. नीलिमा
    आप तो छा गए अनूप जी ! दोहे चौपाइयां ऎसी बरसाएं हैं कि कई और लोग कवि फवि बन बैठे !
    पोस्ट सेर तो टिप्पनियां सवा सेर !
  30. घोस्ट बस्टर
    राम जी की पोस्ट पर एक टिप्पणी:
    अच्छी पोस्ट लिखी जी आपने.
    ताऊ ताऊ
    ——————————————-
    ई-स्वामी को हार्दिक बधाईयाँ.
  31. randhirsingh   suman
    रामचन्द्र की बात सुनि लछिमन गये हरसाय,
    बिनु पैसा कौड़ी बिना गये बाजार को धाय ॥nice
    कोई मौसम हो हम उदास न थे
    तंग रहते थे पर निराश न थे
    हमको अपना बना के छोड़े जो
    हम कभी ऐसे दिल के पास न थे!nice…………..nice………….nice…………
  32. अर्शिया
    बढिया फैंटेसी है।
    दुर्गा पूजा एवं दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    ( Treasurer-S. T. )
  33. SHUAIB
    :) :) :D
  34. girishbillore
    Adabhut Alekh
  35. enjoy the life
    Bhai Anupji,
    kya andaaz hai….mazaa aa gaya…:))
    par internet ke time mein Hanumanji ka role clear nahi hai:))
  36. Jolly Uncle
    बहुत ही बदिया तरीके से सच्ची बात कह डाली…………
    जोली अंकल
  37. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी [...]

Post Comment

Post Comment

No comments:

Post a Comment

Google Analytics Alternative