Friday, August 23, 2013

खेलों में फ़िक्सिंग रोकने के सुगम उपाय

http://web.archive.org/web/20140401072829/http://hindini.com/fursatiya/archives/4344

खेलों में फ़िक्सिंग रोकने के सुगम उपाय

पिछले हफ़्ते मीडिया पर आई.पी.एल. के फ़िक्सिंग की किरपा हुयी। घोटाले ने दर्शन दिये। अफ़रा-तफ़री मच गयी। फ़िक्सिंग पर अंकुश लगाने के उपाय सोचे जाने लगे। गोया फ़िक्सिंग कोई हाथी हो और अपन कोई महावत।
महावत भी अंकुश का इस्तेमाल कौन हमेशा करता है? महावत के लिये तो हाथी और अंकुश दोनों जरूरी हैं। जब हाथी पकड़ से बाहर जाता दिखता है तब धीरे से अंकुश छुआ देता है। हाथी जरा सा ठहरता है। महावत अंकुश हटा लेता है। हाथी फ़िर अपनी चल देता है। मदमस्त। यही हाल फ़िक्सिंग का होगा।
खेलों में फ़िक्सिंग पर रोक का कानून तो बन ही रहा है। वह भी पड़ा रहेगा एक कोने में। कानून वाले भी शामिल हो जायेंगे फ़िक्सिंग में। फ़िक्सिंग और धड़ल्ले से होगी जैसे शराब बंदी वाले इलाकों में दारू ज्यादा खपती है।
फ़िक्सिग रोकने के लिये केन्द्रीय सतर्कता आयोग की रोटेशन वाली इस्कीम सबसे मुफ़ीद रहेगी। केंद्रीय सतर्कता आयोग का मानना है कि संवेदनशील पदों पर तीन साल में बदली कर देने से भ्रष्टाचार कम होने की गुंजाइश होती है। तीन साल हुये कि आदमी बदल दिया। आयोग मानता है कि भ्रष्टाचार करने के लिये संपर्क बनाने में समय लगता है। तीन साल में संपर्क बन जाते हैं। तीन साल बाद बदल देने से गुंजाइश कम होती है करप्शन की।
लेकिन होता यह है कि आदमी को तीन साल लगते हैं काम सीखने में। सही गलत समझने में। समझ में आने तक अगला न जाने कित्ती गड़बड़ियां अनजाने में कर चुका है। जबकि करप्शन करने वाला आते ही शुरु हो जाता है। बहरहाल। आइये देखते हैं कि इस रोटेशन नियम का खेल की फ़िक्सिंग रोकने में कैसे उपयोग किया जा सकता है।
सुझाव यह है कि हर मैच के पहले खिलाड़ी बदल दिये जायें। क्रिकेट के खिलाड़ी कबड्डी में, कबड्डी के हाकी में, हाकी के फ़ुटबाल में, फ़ुटबाल के खो-खो में खिलाये जायें। किसी को टास के पहले तक न पता हो मैच में खेलेगा कौन? दिल्ली में क्रिकेट मैच होना है तो बंगाल की हाकी टीम, केरल की नौकायन टीम, पंजाब की कबड्डी टीम के खिलाड़ी रवाना किये जायें। उड़ीसा, म.प्र. और राजस्थान के खिलाड़ी वहां पहले से ही मौजूद रहें। ऐन खेल के पहले कोई भी ग्यारह खिलाड़ी उतार दिये जायें मैदान में। इससे खेल में अखिल भारतीयता भी बनी रहेगी, अनेकता में एकता भी रहेगी।
कमेंट्रर कमेट्री करते हुये कहेगा इस समय पिच पर मौजूद हैं पश्चिम बंगाल के मशहूर मिडफ़िल्डर फ़लाना प्रसाद। मोहन बागान तरफ़ से खेलते हैं। इस गेंद पर उन्होंने बल्ला चलाने की कोशिश की लेकिन पैर ज्यादा तेजी से चला। शायद वे गेंद को आदतन पैर से हिट करना चाहते थे। वो तो गनीमत कि गेंद फ़ेंकने वाले खिलाड़ी लखनऊ के मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी थी और उन्होंने विकेट को नेट समझकर गेंद ऐसे उछाली जैसे वे सर्विस कर रहे हों। गेंद विकेट के पीछे पहुंच गयी लेकिन किसी ने कोई रन लेने की कोशिश नहीं की।
किसी सीन में ऐसा होगा कि गेंद हवा में उछलेगी तो खिलाड़ी उसको कैच लेने की बजाय तेजी से पीछे जाकर उसको अपने पैर पर रोकेगा। क्योंकि खिलाड़ी मूलत: फ़ुटबालर है। कैच लेने में उसको डर है कि ’हैंडलिंग द बॉल’ हो जायेगा। पैर से ड्र्बिलिंग करते हुये विकेट की तरफ़ भागेगा -गोल जैसा कुछ करने के लिये।
पता चला फ़ील्डिंग के लिये क्रिकेट की गेंद के पीछे भागते किसी खिलाड़ी उसई की टीम का खिलाड़ी लपक के दबोच लेगा और फ़ील्ड पर पटक के उसके सीने में चढ बैठेगा क्योंकि वो मूलत: पहलवान है। फ़ील्डिंग भी कश्ती वाले अंदाज में ही करेगा।
हमें पता है कि आप कहेंगे कि इस तरह से तो टीम हमेशा हारती रहेगी।
लेकिन जहां आप यह कहेंगे कि हम फ़ौरन पलट के पूछ लेंगे – आपको खेल से मतलब है कि हार-जीत से? फ़िक्सिंग रोकना है कि जीतना है? फ़िक्सिग रोकने के लिये जीत के लालच पर विजय पानी होगी। और सच पूछा जाये तो बिना फ़िक्सिंग के ही कौन जीतते रहते थे। कित्ते मेडल पाये ओलम्पिक में आज तक? तो हमको कहानी न सुनाओ। खेलों की मिली जुली टीम बनाओ, खेलों को फ़िक्सिंग से बचाओ।
फ़िक्सिंग में आजकल मोबाइल का बहुत प्रयोग होता है। उसका भी उपाय है। एक उपाय तो ये है कि जहां खिलाड़ी रहें वहां मोबाइल जैमर लगा दिये जायें। खिलाड़ियों को अपने साथ जैमर लेकर चलना अनिवार्य कर दिया जाये।
दूसरा उपाय यह है कि खिलाड़ियों को होटल में घुसते ही मोबाइल बांट दिये जायें जैसे पुराने जमाने में हवाई जहाज में बैठते ही उड़नबालायें टाफ़ियां बांटती थीं। उनको ऐसे मोबाइल दिये जायें जिनके नंबर उनको भी पता न हों। एक मोबाइल से एक बार ही बात हो सके। इसके बाद मोबाइल चुनाव जीते हुये जनप्रतिनिधि की तरह नाकारा हो जायें।
मोबाइल के नंबर जब किसी को पता नहीं होंगे तो फ़िक्सिंग मुश्किल भी काम हो जायेगा। पता चला कि फ़िक्सिंग कराने वाला किसी बॉलर को वाइड बॉल करने के लिये फ़िक्स करने के लिये फ़ोन करे तो वो किसी पहलवान के पास पहुंचे। फ़िक्सर कहे कि उन्नीसवें ओवर में वाइड बॉल करना है। खिलाड़ी बताये कि भाई अपन का फ़ेवरिट तो धोबी पाट है। कोई फ़िक्सर कहे कि गेंद को चार रन के लिये हिट करना है तो कोई शतरंज का खिलाड़ी बताये कि भाई चार मोहरे बचे हैं दोनों तरफ़ तो मैं तो बाजी ड्रा ही कराना पसंद करूंगा।
फ़िलहाल तो इन उपायों पर अमल किया जाये। फ़िक्सिंग का बुखार कुछ न कुछ कम जरूर होगा।
अगर आपको इन उपायों की सफ़लता में कोई शंका है तो कोई अनहोनी बात नहीं है। शंका तो अपन को भी है। लेकिन आपको अपना समझ के सलाह दे रहे हैं कि आप ये बयान न जारी करने लगियेगा कि इस उपाय में ये कमी है उस उपाय में वो कमी है। जहां आपने ये सयानापन दिखाया पुलिस आपको पकड़कर ले जायेगी आपके मुंह में तैलिया पलेट के। आप दो मिनट में प्राइम टाइम के आइटम बन जायेंगे-अभी-अभी आ रही ताजा खबर बनकर।
फ़िर न कहियेगा पहले बताया नहीं। :)

2 responses to “खेलों में फ़िक्सिंग रोकने के सुगम उपाय”

  1. ajit gupta
    इतनी मशक्‍कत करने से बेहतर है कि सट्टेबाजी को ही ओपन कर देना चाहिए। जिसे देखना हो वे देखें नहीं तो अपने काम धंधे पर लगे।
  2. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] खेलों में फ़िक्सिंग रोकने के सुगम उपाय [...]

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