Sunday, February 19, 2017

'व्यंग्य श्री सम्मान-2017' रपट-8


पिछली पोस्ट बांचने के लिये इधर आयें https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10210608763948762
आलोक पुराणिक के बाद समारोह के मुख्य अतिथि , शीर्ष व्यंग्यकार Gyan Chaturvediजी ने आलोक पुराणिक के सम्मान समारोह के मौके पर अपनी बात कही। उनकी पूरी वार्ता आप इस लिंक पर पहुंचकर बांच सकते हैं।
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10210583105987329
ज्ञानजी की कुछ बातों पर अपनी राय मैं अलग से रखूंगा। फ़िलहाल ज्ञानजी के अलगे वक्ता अशोक चक्रधर जी की बातें।
अशोक जी ने अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुये आलोक पुराणिक के बारे में स्नेहिल बुजुर्ग की तरह जमकर स्नेह , आशीष और मंगलकामनाओं की बौछार सी कर दी। आलोक पुराणिक की अनगिनत खूबियां गिनवा डालीं। चक्रधर जी अद्भुत वक्ता हैं। गद्य, पद्य, आशु कविता, व्यंग्य, वक्रोक्ति, तुकबंदी मतलब भाषण के हर फ़न में माहिर। उनको सुनते हुये समय भी अपनी घड़ी बन्द करके कहीं बैठ जाता होगा कि इनके बोलने में खलल न डालो।
आलोक पुराणिक के बारे में बताया कि ये मेहनती बहुत हैं। जैसे ही कोई विचार आता है नोट कर लेते हैं। एक बार बताया आलोक ने कि अशोक जी जो नये-नये शबद प्रयोग करते रहते हैं वो उन्होंने नोट किये है रजिस्टर में। कुछ दिन में 150 नये शब्द जो अशोक चक्रधर ने इजाद किये थे उनको लिखकर दे दिय। ऐसी मेहनत और लगनशील युक्त प्रतिभा हैं आलोक पुराणिक।
आलोक पुराणिक के आर्थिक विषयों पर व्यंग्य लेख लिखने की चर्चा करते हुये अशोक चक्रधर जी ने कहा-’ राजनीति में मंडलीकरण की आंधी चली, फ़िर 1990 में कमंडलीकरण हुआ। इसके बाद जो हुआ आलोक उसको भूमंडलीकरण कर रहे हैं।’
और भी अनेक किस्से अशोक जी ने आलोक पुराणिक के बारे में सुनाये। पूरे पचास मिनट बोले। जरा सा भी बोझिलता नहीं हुई लेकिन बार-बार घड़ी की तरफ़ देखते रहे कि ट्रेन का समय हुआ जा रहा था।
अशोक चक्रधर जी का भाषण समाप्त होते ही सभा बर्खास्त हो गयी।

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