Thursday, July 19, 2007

दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे

http://web.archive.org/web/20140419214116/http://hindini.com/fursatiya/archives/303

दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे

ज्ञानदत्तजी ने हमारी पिछली पोस्ट में टिपियाया -मैं सबेरे-सबेरे “दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे” पर पोस्ट लिखता और 5 सूत्र लिख देता तो धन्य मानता अपने को.इतना थ्रू-एण्ड-थ्रू सोच लेने का जबरदस्त मानसिक कीड़ा आपके पास है कि एक भी सूत्र जोड़ने में पसीना छूट जाये.
अब ज्ञानदत्तजी तो गुणी-ज्ञानी, अनुभव-विज्ञानी व्यक्ति हैं। वो टिपिया के चले गये। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि उनकी टीप को तारीफ़ के रूप में लें या यह समझें कि वे हमको टिपिया के चले गये कि ये क्या अगड़म-बगड़म लिख मारा। बहरहाल हम संशय में रहे दिन भर। लेकिन यह तय नहीं कर पाये कि ज्ञानजी का मतलब क्या हैं। वे हमें बक अप कर रहे हैं या धत-धत। लेकिन इसका मुझे कोई अफसोस भी नहीं। अदालतें नेताओं पर खुल्लम-खुल्ला किये गये अपराधों के आरोप तय नहीं कर पातीं , नेता चल देता है इस असार-संसार को त्यागकर ,अपनी पुण्यपोटली समेट कर और अपनी पाप-गठरिया किसी नाले में सरकाकर। ऐसे में अगर हम सबेरे कही गयी बात का शाम तक मतलब नहीं तय कर पाये तो कौन आफ़त है। :)
बहरहाल हमने बाद में यही तय किया कि पांडेयजी जानना चाहते हैं कि दातुन करने के बाद ब्लागिंग् करने के क्या फ़ायदे हैं। इसलिये हम और किसी पचड़े में न उलझते हुये अपनी तयसुदा बात पर कुछ सूत्र बता देते हैं। हमारा क्या जाता है। तो लीजिये नोट कीजिये दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे:-
1. सबसे पहला फ़ायदा तो वही वाला मिलेगा जो सबसे पहले होने पर मिलता है। अभी तक किसी ने दावा नहीं ठोंका लिहाजा आप दुनिया के पहले और अभी तक के एकमात्र ब्लागर माने जायेंगे जो दातुन करने के बाद ब्लागिंग करता है।
2. आप लोगों से ऐंठ कर कह सकते हैं आप स्वदेशी की भावना से लथपथ हैं। विदेशी कम्पनियों का बनाया और प्रचारित किया मंजन इस्तेमाल नहीं करते।
3. दातुन करने के बाद ब्लाग लिखने की आदत डालते ही आप ब्लागिंग नियमित करने लगेंगे। यह इस धारणा पर आधारित है कि आप रोज दातुन करते हैं।
4. ब्लाग् जगत् में आप् अनायास् नई शब्दावली ठेलने में सहायक् होंगे। आप् जिस् दिन् ब्लाग् नहीं लिखेंगे लोग् कहेंगे क्या बात् है आज् पांडेयजी दातुन् नहीं किहिन् का? ज्यादा लिखने वाले के लिये लोग् कहेंगे- यार् आज् प्रमोद् सिंह्अजदकी छ्ह् बार् दतुनियाये। लंबी पोस्ट् वाले के लिये कहा जायेगा- ये फ़ुरसतिया बहुत देर् तक् दतुन् घिसता है। अपने मन् से आप और् भी जोड़् सकते हैं- मोहल्ले वाले बड़ी कड़ुवी दतून इस्तेमाल् करते हैं। आलोक् पुराणिक न जाने कहां से नयी-नयी दतून ले आते हैं, समीरलाल् की पिछली दतून जरा गीली थी, मसिजीवी न जाने काहे गीक दतून के पीछे बौराये घूमते हैं,अभय तिवारी के यहां की दतून करते ही मन निर्मल हो जाता है।:)
5. आज जिसे देखो वही हमारे देश को पिछलग्गू साबित कर देता है। दतून ब्लागिंग करते हुये हम शान से कह् देते हैं -यूज एन्ड थ्रो का दर्शन पश्चिम ने हमसे लिया। इस मामले में विकसित देश हमारे पिछलग्गू हैं।
6. अगर आप जरा सा भी आर्थिक समझ और रुझान रखते हैं तो निश्चित तौर पर एक दिन आप दतून करने और ब्रश करने के बीच खर्चे का तुलनात्मक अध्ययन करते हुये एक पोस्ट जरूर लिखेंगे। आप बतायेंगे दतून एक रुपये की आती है तीस दिन का खर्चा तीस रुपये जबकि ब्रश करने का खर्चा मंजन सहित बतीस रुपये पैंसठ पैसे आता है। इस तरह आप अगर दतून करते रहें और शतायु हों तो पूरी जिंदगी में पच्चीस सौ रुपये बचत कर सकते हैं। (इस उदाहरण में बश की औसत आयु छह माह और दांतो की औसत आयु अस्सी साल मानी गयी है)
7. बचत की संभवनायें तलाशते हुये आप एक दिन दातुन के किफ़ायती इस्तेमाल के अपने तमाम आइडिये पेटेंट कराने पर् विचार कर सकते हैं। जैसे आप एक आइडिया बतायेंगे कि दातुन दोनों तरफ़ से करके अपनी जिंदगी में पांच हजार की बचत कर सकते हैं। बीच से काटकर एक दातुन की दो बनाकर बचत का आंकड़ा दस हजार तक घसीट सकते हैं।
8. आइडिया पेंटेट कराने के झमेले से गुजरते हुये आप पेटेंट ब्लागर उन्मुक्तजी के अच्छे दोस्त बन जायेंगे। पेटेंट कार्यालय की अच्छी समझ हो जायेगी। वहां के लोगों को आप ब्लागिंग के बारे में बता सकते हैं। इस तरह दातुन करते-करते आप हिन्दी प्रसार में रचनात्मक सहयोग कर सकते हैं।संभव आप पेटेंट आफिस में किसी को इतना भावविभोर ब्लागर-पाठक बना दें कि वह कहने लगे सभी पेटेंट कराने वालों से अनुरोध है कि वे पेटेंट अर्जी के साथ अपने हिंदी ब्लाग का पता भी बतायें। इससे हिंदी ब्लागों की संख्या सुबह दूनी शाम चौगुनी बढ़ सकती है। दोपहर में कोई प्रगति नहीं हो पाये शायद क्योंकि वह् समय हर आफिस में आराम का होता है।
9. दातुन ब्लागिंग करते हुये आपको और किसी चीज की कमी हो सकती है लेकिन ब्लाग-पोस्ट लिखने के लिये आइडिया जैसी तुच्छ चीज की कमी नहीं होगी। आप दातुन निश्चित् तौर पर शाम को खरीदेंगे या एक दिन पहले। दातुन खरीदने से लेकर उसके इस्तेमाल तक आपका दिमाग आइडिया से उसी तरह पट जायेगा जिस तरह भारतीय बाजार चीनी माल से पटे हुये हैं।
10.दातुन करते हुये आप निश्चित तौर पर्यावरण से जुड़े रहेंगे। क्योंकि कभी न कभी आप नीम के पेड़ के बारे में सोचेंगे, निबौरी के बारे में सोचेंगे, नीम के पेड़ की छांह के बारे में विचारे-इनायत करेंगे। आपका ज्यादा दिमाग जवान हुआ तो नीम के पेड़ पड़े झूले और उस पर सरल आवर्त गति में झूलती नायिका के इर्द्-गिर्द दोलन कर सकता है। आप एक रुपये मात्र की दातुन करते हुये इत्ते ढेर सारे पर्यावरण और तदन्तर इतने मनमोहक कल्पना-सौंदर्य से सट सकते हैं। ब्रश-मंजन में ऐसा जमीनी जुड़ाव कहां!
12.अगर आप साहित्यिक रुचि रखते हैं तमाम सारी नायिका, नायक ,नीम के पेड़ से जुड़ी कवितायें दातून करते हुये दोहरा सकते हैं। अगर आप कीकर/करील की दातुन करते हैं तो सीधे रसखान से जुड़ाव महसूस करते हुये मानुष हौं तो वही रसखान से शुरू करके करील की कुंजन ऊपर बारौं तक का साहितय-वाक रोज कर सकते हैं।
13.दातुन-ब्लागिंग का उपयोग आप अपनी भड़ास निकालने में भी कर सकते हैं। आप अपने ब्लाग मोहल्ले में अगर किसी से खफ़ा हैं लेकिन सज्जनता की गुलामी के चलते गाली-गलौज करने से परहेज करते हैं तो आप जिस ब्लागर से नाराज हैं उसकी कल्पना करते हुये दातुन चबाइये और सोचिये कि आपके मुंह् में दातुन की जगह् उस ब्लागर का सर है।
14.अगर आप इसे (सूत्र 13) अतिशयोक्ति मानते हैं कि एक व्यक्ति के मुंह् में किसी का सर कैसे जायेगा और शाकाहारी तथा अहिंसावादी होने की नैसर्गिक प्रकृति के चलते इस तरह की कल्पना को वीभत्स मानतें हैं तो आपके लिये दूसरा उपाय है। आप जिस ब्लागर से खफ़ा हैं उसकी तस्वीर अपने सामने शीशे के ऊपर लगाकर उसको दांत दिखाते हुये दातुन करते रहिये। आप जितना ज्यादा गुस्सा हों उतनी देर तक उसको दांत दिखाते हुये, मुंह बनाते हुये,बिराते हुये दातुन करते रहें। मेरा दावा है कि आपको आराम मिलेगा और वह बेचारा आपका कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा चाहे जितना ताकतवर क्यों न हो बशर्ते आप अपने इस वीरता का बखान करते हुये कोई पोस्ट न ठेल दें।
15. अगर आप प्रयोगधर्मी हैं तो निश्चित जानिये कि आप एक दिन दातुन से पेंट करते हुये कोई चित्र बनाकर अपने ब्लाग पर सटायेंगे। इस तरह् आप दुनिया के पहले दातुन चित्रकार बन जायेंगे।
16. आजकल दुनिया भर में इस बात पर बहस चल रही है कि ऐसी चिप बनेगी जो दिमाग में फ़िट कर दी जायेगी जिसमें दिमाग का सारा कच्चा चिट्ठा आ जायेगा। कल्पना करिये कल को यह शुरू हुआ और चिप घुसाने और निकालने में कुछ सर्जिकल समस्यायें आयीं तो लोग वैकल्पिक उपाय सोचेंगे। आप सुझा सकते हैं कि वह चिप दातुन में सटा दी जाये। जैसे कार्डलेस माउस होता है, रिमोट माडम होता है ऐसे ही दातुन पर रिमोट चिप लगाकर दातुन करते हुये सारा
डाटा निकालकर् कम्प्यूटर में डाउनलोड करके उसे सिरिंज की तरह फ़ेंक दिया। आपको यह आइडिया अहमकिया लग सकता है लेकिन इससे क्या! आइडिया तो आइडिया -अहमकिया हो अजदकिया।
17. आप अगर सरकारी विभाग में काम करते हैं शान से कह सकते हैं हम एक साथ दो काम करते हैं दातुन करना और ब्लाग लिखना। इससे बचे हुये घंटे को आप बरबाद करने के उपाय अलग से बता सकते हैं।
18. अगर आपके घर में बाथटब है तो आप बाथटब में लेटे-लेटे दातुन कर् सकते हैं। इसका फ़ायदा यह होगा कि आप कोई आइडिया आने पर बड़ी जोर से युरेका-यूरेका चिल्लाते हुये उस आइडिया को ब्लाग पोस्ट पर डालने के भाग सकते हैं। इससे फ़ायदा यह होगा कि आप सीधे-सीधे आर्किमीडीज की परम्परा से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।
19.आपको शायद यह् खराब लगे कि मैं आर्किमीडीज से जुड़ाव महसूस करने के लिये इतने झाम करने का सुझाव दे रहा हूं क्या यह् नैतिक दृष्टि से उचित है!
आप इस अपराध बोध को मसिजीवी की पोस्ट पढ़कर झटक सकते हैं जिसमें उन्होंने कुछ गीक महानुभावों के किस्से बतायें हैं कि कैसे वे बिना स्लीपर पहन कर लैब चले गये, कैसे हास्टल में रहे। इन चप्पलिया, हास्टलिया तरीकों को अपनाकर आप अपने को भी गीकनुमा साबित कर सकते हैं। उनके जैसा काम करने के लिये मत हुड़कें। उसके लिये खाली गीकपने से काम नहीं चलेगा। :)
20. दातुन ब्लागिंग करते हुये आप अपने समानधर्मा दातुनियों का दल बना सकते हैं। आर्कुट पर् दातुन- ब्लागर कम्युनिटी बना सकते हैं। दातुनियां-ब्लागरों के लिये अलग संकलक बना सकते हैं। दातुनिया ब्लागर मीट कर सकते हैं। इंडीब्लागीस इनाम के लिये आयोजकों से दातुन-ब्लागरों के लिये अलग से इनाम देने के लिये पेशकश कर सकते हैं। गर्ज यह कि आप बहुत कुछ कर सकते हैं।
21.दातुन ब्लाग करते हुये आप अपने आपमें एक अद्भुत आत्मविश्वास पायेंगे। आप कह सकते हैं कि जो लोग दातुन करते हुये ब्लाग लिख सकते हैं वो दुनिया का कोई भी काम कर सकते हैं। आप नारा लगा सकते हैं दुनिया के सारे दातुन -ब्लागर एक हों।
पांडेयजी फिर बुरा मानेंगे कि उन्होंने पांच कहे थे हमने इक्कीस सूत्र बता दिये। लेकिन आप सच मानें पांडेयजी मैंने इस लिस्ट में वे पांच सूत्र नहीं शामिल किये जो आप सोच रहे हैं। आप अपनी सुविधानुसार उनको स्वयं बतायें तो अच्छा होगा।
दूसरे साथी भी दातुन-ब्लागिंग में योगदान दें। शरमायें नहीं। :)

19 responses to “दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे”

  1. डा. प्रभात टन्डन
    आर्कुट् पर् दातुन्-ब्लागर् कम्युनिटी बना सकते हैं।
    सबसे धाँसू आइडिया ले कर आयें है , बस जल्द ही अमल मे लायें । संयोजक आप बन जायें , और moderator तो बहुत से हैं . :)
  2. kakesh
    ये दातून क्या होता.दरअसल हम नयी पीढ़ी के हैं बकौल ज्ञान जी. :-)
  3. भुवनेश
    लग रहा है अब इंक ब्लागिंग के बाद दातुनिया ब्लागिंग का भी दौर आने ही वाला है.. :)
    वैसे ब्लागिंग दातुन करते हुए की जाये तो समय की भी बचत और साथ में आनलाइन दातुन करने का भी खिताब
  4. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    बप्पारे! आपकी पोस्ट पर टिप्पणी करना भी बवाल है! :)
    ये नम्बर 4 वाली बात तो बम्पर है. अज़दक का तो आधा बज़ट दातुन खरीदने में चला जाये. बम्बई में कौन सा नीम का पेंड़ होगा उनके आंगन में – दातुन तो खरीदनी होगी उन्हे! और फुरसतिया के तो दांत ही घिस जायें! उड़न तश्तरी की दातुन तो फॉरेन की होगी – सेंटेड. मसिजीवी की गीक तो नये ब्राण्ड की होगी. अभय के ब्लॉग का नाम ही निर्मल-दातुन रखना होगा.
    बहरहाल मानना होगा कि फुरसतिया नाम यूं ही नहीं है. फुरसत से सोच कर रखा गया है और आजकल तो जरूर फुर्सत है – इतनी जल्दी हमारा आइडिया झटक 21 सूत्र ठेल दिये! :)
    हम तो 5 में ही अपने को धन्य पाते!
  5. sanjaytiwari
    दातुन ब्लागिंग के 101 फायदेवाली अगली पोस्टिंग का इंतजार है.
    दातुन तो हो गयी अब जरा नाश्ते के जुगाड़ में निकलते हैं. हौसलेवाला टानिक स्वीकार करें.
  6. ratna
    5. आज् जिसे देखो वही हमारे देश् को पिछलग्गू साबित् कर् देता है। दतून् ब्लागिंग् करते हुये हम् शान् से कह् देते हैं -यूज् एन्ड् थ्रो का दर्शन् पश्चिम् ने हमसे लिया। इस् मामले में विकसित् देश् हमारे पिछलग्गू हैं।
    सभी सूत्र झक्कास है पर उपरोक्त वाक्य ने तो जी प्रसन्न कर दिया।
  7. अनुराग श्रीवास्तव
    ये फ़ुरसतिया बहुत देर तक दतुन घिसता है।
  8. सागर चन्द नाहर
    कमाल का उर्वरक दिमाग पाया है आपने, :)
    आज् पांडेयजी दातुन् नहीं किहिन् का? ज्यादा लिखने वाले के लिये लोग् कहेंगे- यार् आज् प्रमोद् सिंह् अजदकी छ्ह् बार् दतुनियाये।
    मानिये कल को कोई ज्ञानी जी कहें कि खाना खा कर ब्लॉगिंग करने पर फायदे लिखें .. तो यूं भ लिखा जा सकता है कि आज फुरसतियाजी का उपवास है या आज कमल शर्माजी ने चार बार खाना खाया….
    इसका उल्टा भी लिखा जा सकता है… कयास लगाईये ;)
  9. विजय वडनेरे
    आदरणीय, आपसे एक विनम्र विनती है:
    आप इतने बड़े-बड़े लिख ना छापा कीजिये. वो क्या है ना कि, जो आपके मुरीद है (बाई डिफ़ाल्ट और बाई गौड -हम भी) उनको आपकी प्रशंसा करने के लिये इतना लम्बा पढने की कौनो जरुरत नहीं है. और जो (खुदा ना खास्ता) नहीं है, उनको इतनी लम्बी झिलायेगी नहीं. सारांश ये कि –
    रीडर मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?
    रीडर अन-मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?
    अब ऐसा (याने बड़ा) ना छापा जाये, ये तो आप समझ ही गये होंगे?
    अब आते हैं मेन बात पर – सिर्फ़ बड़ा ना छापने की विनती है, बड़ा लिखने पर बाखुदा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है. वैसे भी बड़ा होता है तो बेहतर तो ऑटोमेटिकली हो ही जाता है ना? अब करना ये है कि बाकि बचे हुये आधे पोस्ट को फ़ैकना (सिलेक्ट-डिलीट) नहीं करना है, उसको तो हम आपसी सहयोग से (अब सारा काम आपसे ही थोडे ना करवायेंगे) ’मेरे’ ब्लाग पर छाप देंगे . वो क्या है ना कि इससे आपका भी श्रम और समय (जो आप मेरे ब्लाग पर जा जा के खरचते हो ये देखने को कि मैने कुछ लिखा कि नहीं) भी बचेगा -जिसको आप और बड़ा (और बेहतर -अण्डरस्टुड) लिखने में यूटिलाईज़ कर पाओगे.
    वो क्या है ना कि आजकल ना मौका मिल नहा है ना दस्तुर, सो कुछ कुलबुलाहट नहीं निकल पा रही है. तो अब खुद को ब्लागिंग की रेस में अप-टू-डेट रखने के लिये हमने यह आयडिया सोचा है.
    डिस्क्लेमर: ये आयडिया हमारे सोलो दिमाग की उपज है, और हमने इसे पेटेन्ट/कापीराईट (और जो भी करवाते हैं) करवा रखा है. जिस किसी को भी इस आयडिये का पुरा या पार्शियल पर्सनल उपयोग करते पाया जायेगा तो उसे बतौर सज़ा हमारे ब्लाग पर मासिक ११ पोस्ट लिखने का आदेश दिया जाएगा पूरे एक साल तक.
    अगेन डिस्क्लेमर: ऑफ़र उन सभी ब्लागरों के लिये भी ओपन है जो ऐसा समझते/सोचते हैं कि वे भी ’बड़ा’ और ’अच्छा’ लिखते हैं.
    (वैसे ये (दातुन वाली) पोस्ट अच्छी थी-मज़ा आया पढ़ कर)
  10. आलोक पुराणिक
    भई वाह, बहूत खेंची दातून।
  11. paramjitbali
    आप का दातुन-पुराण बहुत अच्छा है।आप के सुझावों को अपनाने कि कोशिश करेगें।लेकिन उस से पहले मनन करना होगा।
  12. Amit
    हुम्म…..हम्म….. यानि कि अब फिर एक दूसरा प्रोडक्ट अपनाना पड़ेगा? अभी कुछ वर्ष पहले ही तो पेप्सोडेन्ट से कोलगेट पर आए थे, उससे पहले मिस्वाक से पेप्सोडेन्ट पर, उससे पहले फोरहैन्स से मिस्वाक पर, अब दातुन!! खैर, चलिए ई भी टिराई कर देखते हैं, मतलब टिराई तो किया है पहले, लेकिन उसके बाद बिलागिंग नहीं किए है, अब उ कर देखते हैं, मजा आया तो ठीक नहीं तो अपन कोलगेट से संतुष्ट हैं फिलहाल!! ;)
  13. श्रीश शर्मा
    वैसे हम दातुन ब्लॉगिंग तो नहीं लेकिन टूथब्रुश ब्लॉगिंग कर चुके हैं। क्या उस हिसाब से हम पहले टूथब्रुश ब्लॉगर हैं या कोई पहले ही यह कारनामा कर चुका है।
  14. Sanjeeva Tiwari
    मानुष हौं तो वही रसखान घसौं दातून फुरसतिया के दुवारे । बडे भाई अब हमहू दातून खरीद ही लेते है नहीं तो कौन जाने बजार से सबै दातून दूसरै ले लें और हम खाली की बोर्ड को खटर पटर करते रहें ।
  15. समीर लाल
    हा हा!! क्या दातून की है रगड़ रगड़ कर. जरा दाँत की फोटू भी लगा देते कि कैसे निखर आये हैं. :) बहुत खूब.
    अरे एक बात तो भूले ही जा रहे थे:
    अगर् आप् जरा सा भी आर्थिक् समझ् और् रुझान्
    -आज यह पूरी पोस्ट में आधी आधी दातून का क्या माजरा है: र् प् क् झ् -बारहा इस्तेमाल कर रहे हैं कि हिन्दी लिखने के लिये कोई नई दातून ले आये?
  16. Tarun
    बहुत मजेदार, लगे हाथ ये भी बता देते कि दातुन मे ब्लोग अगर लिखना है तो “सोने के बाद या उठने से पहले ही लिखें”, किसी और वक्त लिखने पर ऊपर बताय सारे फायदे नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  17. श्रीश शर्मा
    समीर जी वाला प्रश्न मेरा भी है आज पोस्ट किस दातुन से लिखी है कि हलन्त चिपक गया है सब शब्दों के पीछे?:)
  18. सिद्धार्थ जोशी
    मुझे पता है मैं बहुत लेट हूं लेकिन रवि रतलामी के एक पोस्‍ट में इस पोस्‍ट का लिंक मिल गया सो यहां आ गया और दांतुन करने के इन चमत्‍कारी सूत्रों को पूरा पढ़े बिना नहीं रहा गया।
  19. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे [...]

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