Friday, July 13, 2007

फ़ुरसत से बात कीजिये, फ़ुरसत से बांचिये

http://web.archive.org/web/20140419220238/http://hindini.com/fursatiya/archives/300

फ़ुरसत से बात कीजिये, फ़ुरसत से बांचिये


16 responses to “फ़ुरसत से बात कीजिये, फ़ुरसत से बांचिये”

  1. तरूण
    थोड़ा कुछ अलग सा दिखने और पढ़ने को मिला, अनुपजी शेर अच्छे बन पढ़े हैं शायर से ;)
  2. abhay tiwari
    हम ने फ़ुरसत से बाँचा तो समझ में आया कि आप ने फ़ुरसत से नहीं लिखा..फ़ुरसतिया टाइम्स पहले के मुकाबले बहुत छोटा निकला.. फिर भी तेवर वही है.. और आलोक पुराणिक की बात सही है.. इसे जारी रखिये..
  3. alok puranik
    भई वाह वाह वाह वाह,
    इसे साप्ताहिक तो बना ही दीजिये जी
    हफ्ते भर की घटनाओं पर वन वन लाइनर हो, तो क्या बात है।
    सादर
    आलोक पुराणिक
  4. kakesh
    ये हुई ना सही की इंक ब्लॉगिंग.अच्छी रही पर इस बार कवरेज थोड़ा कम रही..थोड़ा फुरसत से सबकी लेते ..खबर ..तो मजा आता.
  5. arun  arora
    मजा नही आया,आप के नाम के अनुरूप नही है.
    कृपया अपना लेखन खुद करे,ठेके(या प्रोक्सी) पर करवाये काम की गुण वेत्ता घटिया होती है.
    चाहे तो ज्ञान जी से भी राय लेकर देखले .
  6. समीर लाल
    जल्दबाजी मे निकला फुरसत का फुरसतिया टाईम्स…जरा विस्तार दो भाई. एक पन्ना का अखबार…फुरसतिया जी को बदनाम करोगे क्या? जता बढ़ाओ विस्तार…वैसे जितना परोसा वो तो पसंद आया. बधाई.
  7. pramod singh
    ये तो अख़बार के नाम पर हाथ में पंप्‍लेट रखाना हुआ.. और ऊपर से कह रहे हैं फ़ुरसत से बांचो? फ़ुरसत से बांचते हुए भी तीन मिनट में बंचा जाता है! फिर अलग से तकनीक बताना चाहिए था न कि सपरियाये हुए फ़ुरसत में बांचने का उचित तरीका क्‍या है? फिर इतने समय से आपको राह दिखा रहे हैं मगर देख रहे हैं कि अभी तक पतनशीलता का आपपर वाज़ि‍ब प्रभाव नहीं पड़ा है.. हमेशा से ऐसे ही कमज़ोर स्‍टूडेंट रहे हैं आप?.. हद है.. पतनशीलता में भी आप सफ़ेद कुर्ता-पैजामा पहनकर उतरना चाहते हैं?
  8. सृजन शिल्पी
    आपकी बात मान कर मन की मुस्कान चेहरे पर ले आया। देखिए :)
  9. pramod singh
    आपकी हैंडराइटिंग सचमुच इतनी ही खराब है? फिर भी आपको नौकरी मिल गई? ताजुब्‍ब है! फिर लगता है कलम के नाम पर भी आप पैसा बचा रहे हैं.. अच्‍छी रंगदार कलम नहीं मिली आपको? और अगली मर्तबा अच्‍छा पोस्‍टर पेपर लेकर लिखने बैठिएगा. अख़बार निकाल रहे हैं और कागज़ तक का पैसा बचा रहे हैं! कोई तरीका है?
  10. Isht Deo Sankrityaayan
    शेरो-शायरी तो बढिया है ही, उससे भी ज्यादा दिलचस्प बाएँ तरफ वाली टिप्पणिया हैं. बधाई.
  11. श्रीश शर्मा
    मजेदार, जारी रखें। फुरसतिया टाइम्स जिंदाबाद! :)
  12. pratyaksha
    अरे ! बाकी पन्ना किधर गया ?
  13. masijeevi
    जीतू कानपुर में हैं- जरा तफसील से बताएं फिर हम जमकर खबर लेते हैं-
    हल्‍ला बोल करते हैं
  14. SR Shankhala
    आपकी बात मान कर मन की मुस्कान चेहरे पर ले आया।
  15. प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर
    इंक ब्लॉगिंग!!!!!!!!!!
    वाह वाह वाह वाह!!!
  16. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] फ़ुरसत से बात कीजिये, फ़ुरसत से बांचिये [...]

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