Wednesday, June 29, 2016

कोठा गोई

कल और आज मिलकर एक कम दो सौ पेज की किताब पढ़ 'कोठागोई' । बहुत हल्ला सुना था प्रभात रंजन की इस किताब का बजरिये फेसबुक। प्रभात रंजन हमारे पसंदीदा लेखक मनोहरश्याम जोशी के शिष्य रहे हैं। गुरुजी के कई संस्मरण साझा किये हैं प्रभातरंजन ने।
तो ऐसे ही एक दिन 'करेंट बुक डिपो' गए तो 'कोठागोई' दिख गयी तो खरीद लिए। साथ में इनके गुरुजी जोशी जी की किताब 'उत्तराधिकारिणी' भी। लग तो यही रहा था कि पन्नेे पलटकर बाद में पढ़ने के लिए रख देने वाली किताबों की संगत में शामिल हो जायेगी 'कोठागोई' भी। लेकिन ऐसा हुआ नहीँ। गजब की किस्सागोई है कोठागोई में।
मुजफ्फरपुर, बिहार के चतुर्भुज स्थल की गुमनाम गायिकाओं के किस्से ऐसे बयान किये हैं कि एक के बाद अगला किस्सा पढ़े बिना मन नहीँ मानता।
वाणी प्रकाशन से प्रकाशित किताब 225 रूपये की है। ऑनलाइन भी उपलब्ध है राजकमल की साइट पर।
इतनी बढ़िया किताब लिखने के लिए प्रभातरंजन को बधाई। जबरदस्त किस्सैत हैं प्रभात। मनोहरश्यामजोशी जी के संस्मरण बताते हुए प्रभात कहते हैं कि छापेगा कौन? हमारा कहना है कि किताब पूरी करें छापने वाले मिलेंगे। न कोई मिले तो ई बुक बनाई जाए। मुफ़्त में छपेगी। खूब बिकेगी।
बहुत दिन बाद फिर से किताबें पढ़ने का आनन्द का एहसास दिलाने के लिए प्रभातरंजन का शुक्रिया। अगली किताब की अग्रिम बधाई।

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