Sunday, May 07, 2017

बस मुस्कराते रहें


अक्सर इधर-उधर पढ़ने को मिल जाता है- मुस्कराते रहें।
मुस्कराते रहें मतलब कीप स्माइलिंग।
वैसे भी मुस्कराते हुये लोग कित्ते खूबसूरत लगते हैं। मिलकर मुस्कराते हुये तो और अच्छे। और खूबसूरत।
आपके हाथ में, हाथ में क्या चेहरे पर भी, बस यही बचा है जो आप धारण कर सकते हैं। मुस्कराते रहें। इसमें न कोई खर्चा है, न कोई टैक्स। बस चेहरे पर धारण करें और धरे रहें।
मुस्कराने से न जाने कित्ते काम अपने आप हो जाते हैं। चेहरा खिला रहता है। तनाव नहीं होता। तनाव नहीं होगा तो और बवाल भी नहीं होंगे। खूबसूरत दिखेंगे। देखा-देखी और लोग भी मुस्कराने लगेंगे। वे भी खूबसूरत दिखेंगे। बाजार में चीनी माल की तरह सब तरफ़ खूबसूरती ही खूबसूरती पसरी मिलेगी।
अब कोई मुस्कान विरोधी कह सकता है कि चीनी माल की तरह बिखरी मुस्कान तो घटिया क्वालिटी की होगी। जल्दी चटक जायेगी। न जाने कब अपना तम्बू उठाकर चल दे चेहरे से। क्या फ़ायदा ऐसी मुस्कान धारण करने से जो अस्थाई हो।
लेकिन कहने वाला ये थोड़ी कहिस है कि आप अच्छे से मुस्कराओ। वह तो सिर्फ़ यह कहता है मुस्कराते रहो। आपको ज्यादा कुछ सोचना ही नहीं है। बस बिना सोचे-विचारे मुस्कराते रहिये। जैसे उड़नबालायें मुस्कराती हैं। जैसे नायिकायें मुस्कराती हैं। जैसे परेशानियां मुस्कराती हैं। जैसे मंहगाई मुस्कराती है। जैसे नेता मुस्कराते हैं। जैसे ये मुस्कराते हैं। जैसे वो मुस्कराते हैं।
वैसे भी मुस्कराने में कोई खर्चा तो लगता नहीं। खर्चा नहीं लगता तो सरकार इसमें सब्सिडी भी नहीं दे सकती। सब कुछ आपको खुद ही करना होगा। जरा सा मेहनत करना होगा। चेहरे की कुछ मांसपेशियां हिलाना होगा। हल्का सा होंठ इधर-उधर करना होगा बस हो गया काम। एक मुस्कान, बनाये बिगड़े काम।
वैसे सरकारों की तरफ़ से मुस्कराने की व्यवस्थायें भी करने के प्रयास हो रहे हैं। जिन लोगों को न मुस्कराने की आदत है उनको बता-बताकर मुस्कराने के लिये टोका जाता है। जैसे क्लास/ मीटिंग में सोते हुये बगल वाला कोहनिया के जगाता -अबे जाग तुझसे सवाल पूछा जा रहा है वैसे ही आजकल हर शहर वाला आपको शहर में घुसते ही मुस्कराने के लिये मजबूर करेगा। बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगी हैं। घुसते ही आपको दिखेगा। मुस्कराइये कि आप लखनऊ में हैं, मुस्कराइये कि आप जयपुर में हैं, मुस्कराइये कि आप यहां हैं, मुस्कराइये कि आप वहां हैं।
अरे भाई कोई जबरदस्ती है। हम आपके कहने से मुस्करायेंगे? हम अपने आप मुस्करायेंगे- कीप स्माइलिंग का डोज लिये हैं।
वैसे सरकार चाहे तो सबके मुस्कराने का इंतजाम कर सकती है। एक ठो सर्कुलर कर दे कि सरकार से कोई भी सुविधा पाने के लिये मुस्कराना अनिवार्य होगा। जो भी मुस्कराये, सुविधा पायेगा। ये नहीं कि हल्ला मचा रहा है, चिल्ला रहा है और कह रहा है -हमारी मांगे पूरी करो। मांगे पूरी करने के लिये मांगकर्ता को मुस्कराना होगा। बात करते समये मुस्कराते रहना होगा। काम होते ही खिलखिलाना होगा।
सरकार के हर कदम का आपको मुस्कराकर स्वागत करना होगा। तेल के दाम बढ़ते हैं, मुस्कराना होगा। घटते हैं, डबल मुस्कराना होगा। चीन वालों ने तम्बू तान दिये मुस्कराये, चले गये डबल मुस्कराइये। कोई घपला सामने आ गया, मुस्कराइये। जांच बैठ गई डबल मुस्कराइये। जांच चलने के दौरान मुस्कराते रहिये। बीच-बीच में मन करे तो हंस-हंसा लीजिये।अपराध हुआ, मुस्कराइये। अपराधी पकड़ गये, और मुस्कराइये। उनको संदेह का लाभ मिला फ़िर से मुस्कराइये।
मतलब अब आप समझ रहे होंगे एक मुस्कराते रहने के सर्कुलर मात्र से देश के हाल एकदम प्रफ़ुल्लित टाइप हो सकते हैं। हैप्पीनेस इंडेक्स अंतरिक्ष तक पहुंच सकता है जिसका आप सर उठाकर दीदार करते रह सकते हैं ताजिंदगी।
अब आप मेरी बात से सहमत हो रहे होंगे कुछ-कुछ और मुस्करा रहे होंगे। हैं कि नहीं।
ठीक है- मुस्कराते रहिये, बोले तो कीप स्माइलिंग।

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