कल शाम को मोबाइल में खबर दिखी -राहुल गांधी, प्रियंका गिरफ्तार। खबर को फ़ॉलो किया तो पता चला कि विपक्षी दल के लगभग 300 सांसदों ने चुनाव आयोग के दफ़्तर की तरफ़ मार्च किया। रास्ते में उन्हें रोका गया। गिरफ्तारी हुई। रिहा हुए। बैरिकेंटिंग फाँदते हुए अखिलेश यादव की फ़ोटो आउट महुआ मोइत्रा की बैरीकेटिंग फांदने की ख़बर आई। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और मिताली बाग के बेहोश होने की खबर भी पता चली।
शाम को फेसबुक पर विपक्षी एकता, कांग्रेस, राहुल गांधी , मोदी, भाजपा, आर.एस.एस. के पक्ष/विपक्ष में पोस्ट्स आईं। जो जिसका समर्थक है उसने उसी हिसाब से तर्क इकट्ठा करके लिखाई की।
आज सुबह मैंने यूट्यूब पर 'न्यूज' वाले हिस्से को क्लिक किया तो देखा तो निम्न प्रकार की हेडिंग दिखीं:
"-300 सांसदों ने पलटा बीजेपी का बहुमत। भाग खड़ा हुआ चुनाव आयोग। अब तो सुप्रीम कोर्ट कैसे बचा पायेगा? -4 PM
-मोदी ने बहुत बड़ी गलती कर दी? राहुल के मार्च से दहशत में सरकार? - सत्य हिंदी
-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने हाथ खड़े कर दिए।- आपका अखबार
-वोट चोरी पर शानदार विरोध प्रदर्शन के बाद INDIA दल का डिनर। राहुल करेंगे मोदी को देश छोड़ने पर मजबूर। -पब्लिक इंडिया
-जब INDIA के सांसद थाने में थे संसद में क्या खेल हो गया ?- Public Meter
-हारी बीजेपी का ख़तरनाक खेल! अखिलेश को रोकने की गुप्त साजिश - 4 PM
-वो हाउस नंबर 35 जिसका जिक्र किया राहुल गांधी ने -BBC न्यूज़ हिंदी
-राहुल गांधी के आरोपों पर क्या बोले शशि थरूर-जनसत्ता
-सुप्रीम कोर्ट में फंस गया है चुनाव आयोग। राहुल ने कर दिया खेल ख़राब - DB Live
-राहुल सच्चे देशभक्त हैं या नहीं ये कौन तय करेगा? -अजीत अंजुम
-How Rahul gandhi helped this harrased TMC MP -Indian Express
-अभी और फटेगा डेटा बम। राहुल गांधी की चुनाव आयोग को एक और चेतावनी।-News 24 Live "
अधिकतर न्यूज़ चैनलों ने विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन पर चर्चा की थी। उनमें भी ज्यादातर का रूख विपक्ष/राहुल के समर्थन में और बीजेपी के विरोध में दिखा। इसके बरक्स आज के कुछ हिंदी अखबारों के पहले पेज की प्रमुख खबरें निम्नप्रकार से थीं :
दैनिक जागरण -नई दिल्ली
----------------------
आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में डालें।
मुनीर की गीदड़ भभकी पर भारत ने कहा-नहीं चलेगा परमाणु ब्लैक मेल ।
हिंदुस्तान -नई दिल्ली
-----------------
-संसद से सड़क तक विरोध मार्च।
आक्रोश- एस.आई.आर. और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया
-दिल्ली-एनसीआर से सभी लावारिश कुत्ते हटायें -अदालत
अमर उजाला -नई दिल्ली
---------------------
-पाकिस्तान ग़ैर ज़िम्मेदार देश...परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेंगे-भारत
-जेलेंस्की को PM मोदी ने दिया भरोसा, संघर्ष विराम में देंगे हर संभव मदद
दैनिक भाष्कर -जबलपुर
--------------------
-5 डकैतों ने 27 मिनट में लूटा 15 करोड़ का सोना
-'वोट चोरी' के ख़िलाफ़ सड़क पर विपक्ष... 300 सांसदों का मार्च
कांग्रेस और विपक्ष देश में अराजकता,अस्थिरता फैलाना चाहते हैं -भाजपा
कर्नाटक :अपनी सरकार पर सवाल उठाया,मंत्री बर्खास्त
-जबलपुर में BSNL शुरू करेगा 5 जी और ए आई स्किल कोर्स
नवभारत -मुंबई
------------
-वोट चोरी के ख़िलाफ सांसदों की गिरफ्तारी ।
चुनाव आयोग और विपक्षी नेताओं की बैठक नहीं हुई।
300 से अधिक सांसद गिरफ्तार ।
तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और मिताली बाग की हालत बिगड़ी
-कर्नाटक मंत्रिमंडल से राजन्ना बर्खास्त
वोटर लिस्ट के आंदोलन पर उठाए थे सवाल
क्यों लिया इस्तीफा -BJP
-आवार कुत्तों को शेल्टर होम में डालें
सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी
जनसत्ता -नई दिल्ली
-----------------
-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए भारत प्रतिबद्ध
प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की से बात की, कहा
-'वोट चोरी' विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन;राहुल समेत कई नेता गिरफ्तार,रिहा
निर्वाचन आयोग ने कहा, कांग्रेस का दावा तथ्यात्मक रूप से ग़लत
-कर्नाटक में मंत्री राजन्ना को सिद्धारमैया की सिफारिश पर बर्खास्त किया गया
-अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा विपक्ष -धर्मेंद्र प्रधान
दैनिक जागरण और अमर उजाला में दिल्ली में हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन, गिरफ्तारी से संबंधित कोई चर्चा नहीं थी। दोनों अख़बारों के करीब आधे/तीन चौथाई हिस्से में विज्ञापन थे। उनमें से शारदा यूनिवर्सिटी का विज्ञापन दोनों में अखबारों में था। दिल्ली में हुये विपक्षी दलों के प्रदर्शन की ख़बर इन अखबारों में शायद अंदर के पन्नों में हो। लेकिन देश की लगभग आधी आबादी के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले
जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन और गिरफ्तारी की खबर इन अखबारों के लिए खबर नहीं है। यह रोचक बात है।
विपक्षी दलों के सांसदों के प्रदर्शन और गिरफ्तारी की खबर की जगह दैनिक जागरण अख़बार की बड़े अक्षरों में खबर की हेडिंग पर गौर करें :
"आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में डालें।
मुनीर की गीदड़ भभकी पर भारत ने कहा-नहीं चलेगा परमाणु ब्लैक मेल ।"
क्या पता ख़बर का शीर्षक तय करने वालों को शाबाशी मिली हो - क्या सटीक हेडिंग लगाई है। यह भी हो सकता है किसी ने आगे बढ़कर आवारा, कुत्तों, गीदड़ भभकी को इंगित करके कहा हो -" दिए तो हैं कवरेज विपक्षी नेताओं को।"
बाकी आसपास बातचीत में कहीं कोई राजनीति की चर्चा करते नहीं दिखता। शायद जिन लोगों के संपर्क में अपन आते हैं उनको इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि देश में राजनीतिक सरगर्मियां क्या हैं, क्यों हैं?
कभी इस तरह के मुद्दों पर बवाल मच जाते थे। अब के हाल देखकर शेर याद आता है :
वही पेड़, साख,पत्ते,वही गुल वही परिंदे
एक हवा सी चल गई है, कोई बोलता नहीं है।
बोल तो हम भी नहीं रहे हैं। खाली आज जो ख़बरें पढ़ीं उनके बारे में बता रहे हैं। बताने के लिए यह भी एक खबर है कि कालोनी के बाहर सड़क पर आम 250 रुपए किलो मिल रहे थे जबकि एक किलोमीटर दूर सड़क पर उसी घराने का आम 120 रुपए किलो मिले। यह किसी अख़बार की ख़बर नहीं है, हमारा अनुभव जन्य सच है।
अख़बार में ख़बर तो उत्तराखंड में हुई हालिया जलप्रलय की भी नहीं छप रही कहीं अखबारों में। Ashok Pande की पोस्ट से पत्रकार राहुल के हवाले से पता चला कि धराली में पत्रकारों को जाने नहीं दिया जा रहा। Rahul Kotiyal राहुल ने सोशल मीडिया पर बताया कि गंगनानी पुल से आगे पत्रकारों को पैदल तक नहीं जाने दिया जा रहा था. पुलिस ने ऑफ़ द रेकॉर्ड बताया कि पत्रकारों को घटनास्थल तक न पहुँचने देने के ऊपर से आदेश थे।
ये ऊपर से आदेश देने वाला कौन है पता नहीं चला। क्या पता बादल जो फटा है उसने आदेश दिया हो -'खबरदार, हमारे बारे में कोई ख़बर छपनी नहीं चाहिए।"
खबरें अब हम तक नहीं पहुँचती। हमको खबरों तक पहुंचाना पड़ता है। ये तो हमारी आज की खबर है। आपके तरफ़ की ख़बर क्या है?
https://www.facebook.com/share/p/18NgaAQhH8/

No comments:
Post a Comment