2022 में नेपाल यात्रा के दौरान जिस होटल में हम ठहरे थे वहाँ जुआघर भी था। जुआघर मतलब कैसीनो। कैसीनो का नाम तो बहुत सुना था लेकिन वहाँ जुआ कैसे होता है यह कभी देखा नहीं था। हमने अंदर जाने के बारे में पूछा तो सुरक्षा गार्ड ने कहा -"अपना पासपोर्ट नंबर लिखकर चले जाइए।"
मुझे लगा कहीं बाद में कोई सरकारी दौरे के दौरान जुआघर में दौरे की शिकायत न हो जाये। इसी डर के कारण हम कैसीनो दर्शन की तमन्ना मन में लिए वापस अपने कमरे में चले गए।
कैसीनो देखने की इच्छा तीन साल बाद पूरी हुई श्रीलंका यात्रा के दौरान। सरकारी सेवा से साल भर पहले रिटायर हो चुके थे। रास्ते में एक जगह कैसीनो दिखा तो अनन्य ने कहा -"मैं थोड़ी देर कैसीनो होकर आता हूँ।" हमने कहा हम भी चलेंगे। अनन्य ने कहा -"चलिए।"
पिछली यात्रा के दौरान भी अनन्य कैसीनो आ चुके थे। उसका विवरण वहाँ दर्ज था। नंबर बताने पर वेरिफाई करके हम लोगों को अंदर आने दिया गया।
कैसीनो में तमाम लोग अलग-अलग टेबल में बैठे लोग दाँव लगा रहे थे। खेलने का तरीका यह कि पैसों से टोकन ख़रीदे जाते। अलग-अलग नम्बर पर लोग दांव लगाते। सब लोगों के दाँव लगाने के बाद एक काँच की गोली एक नंबर प्लेट पर घुमाई जाती। गोली जिस नंबर पर रुक जाती उस नम्बर जिन लोगों ने दांव लगाए होते वो लोग जीत जाते। बाकी लोग अपना दाँव हार जाते। मेज पर जितने लोग जीतते वो ख़ुश हो जाते। जीते-हारे दोनों ही लोग नए सिरे से दाँव लगाते।
हम जिस हिस्से में थे उस हिस्से से अलग भी लोग जुआँ खेल रहे थे। पता चला वहाँ और बड़े दांव लगाए जा रहे थे।
कैसीनो में खाने-पीने की मुफ्त व्यवस्था थी। जो मन आए, जितना मन आए खाते जाओ। दाँव लगाते जाओ। तरह-तरह के व्यंजन और पेय। लोग अपनी टेबल पर बैठे, खेलते हुए खाने का आर्डर करते। वेटर सर्व करते जाते। लोग खाते-पीते जाते। खेलते जाते। हारते-जीतते जाते।
हर टेबल पर कुल कितने का खेल हुआ इसका विवरण भी चलता जाता।
जिस टेबल पर हम थे उसी टेबल पर एक और लड़का खेल रहा था। बातचीत के दौरान उसने बताया कि वह भोपाल से आया है।
भोपाल से आना तो कोई बात नहीं। लेकिन उसने आने के बारे में जो क़िस्सा बताया उससे कैसीनो के जुआ खिलाने के एक और तरीक़े के बारे में पता चला।
बालक ने बताया कि वह भोपल से पाँच लाख का जुआँ खेलने आया है। तीन-चार दिन रहना है उसे। उसने पाँच लाख रुपए जुएँ के लिए जमा किए थे भोपाल में। भोपाल से कोलंबो तक का आने-जाने का टिकट, कोलंबो में फाइव स्टार होटल में रहने और गाड़ी का इंतज़ाम कैसीनो वालों ने किया है। उसको सिर्फ़ यहाँ तीन-चार दिन रहने के दौरान पाँच लाख का जुआ खेलना है। हारे या जीते इससे कैसीनो वालों को मतलब नहीं।
बालक ने बताया कि पिछले दो दिनों में वह पाँच लाख से अधिक जीत चुका है। एक दिन और रहकर वह वापस भोपाल चला जाएगा। जितना पैसा खर्च किया उसने उससे अधिक जीतकर और कोलंबो में मुफ्त आने-जाने-रहने-घूमने का आनंद उठाकर वह भोपाल वापस लौट जाएगा।
मेरे लिए यह आश्चर्य की बात थी की जुआघर वाले दूसरे देश से लोगों को जुआ खेलने के लिए बुलायें। रहने-घूमने का बंदोबस्त करें। जीतो या हारो बस उतने पैसे का जुआ खेल लो जितने कैसीनो को दिए हैं। बाकी सारा इंतजाम कैसीनो का।
बालक ने बताया कि वह अक्सर इसी तरह के 'कैसीनो पर्यटन ' के लिए कोलंबो आता है। खेलता है, रहता,घूमता है वापस चला जाता है। कुल मिलाकर कभी घाटे में नहीं रहता।
पैसे का लेनदेन कैसे होता है इसके बारे में जो बताया बालक ने उससे लगा की शायद कुछ हवाला टाइप का हिसाब होगा। पैसे कैसे आए, कहाँ से आए, कहाँ चले गए यह बाद शायद किसी को नहीं पता होगी। पैसा किन-किन गलियों में टहलता रहता है यह पैसे को भी नहीं पता होगा।
करीब दो-तीन घंटे कैसीनो में दांव लगाने के बाद हम लोग वापस लौटे। बेटे ने बताया कि इस बार थोड़ा नुकसान हुआ है। पिछली बार फ़ायदे में रहे थे। इस बात तसल्ली से दाँव नहीं लगाए। अप्रत्यक्ष रूप से शायद वह हमें दोषी ठहरा रहा था कि हमारे कारण उसका ध्यान भंग हुआ।
कैसीनो से होटल जाने के लिए गाड़ी कैसीनो वालों ने उपलब्ध करायी। होटल वापस आकर हम देर तक जुआघरों की व्यवस्था के बारे में सोचते रहे। लेकिन जितना सोचते जाते उतना उलझते जाते।
जिस कैसीनो में हम लोग गए थे (bellagio) उसके दुनिया भर में कई जगह जुआघर हैं। कोलंबो, लास बेगास आदि। इटली में भी bellagio नाम का शहर है। नेट पर bellagio खोजकर इस कैसीनो के बारे में जान सकते हैं। भारत में तो आनलाइन गेमिंग बंद हो गई लेकिन इंटरनेट के ज़रिए इन कैसीनो में आनलाइन दाँव लगाने की भी सुविधा है। दुनिया में न जाने कितने लोग रोज़ दांव लगाते होते होंगे। आबाद -बर्बाद होते होंगे।
अपन के लिए तो एक बार का अनुभव बहुत है।
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