Sunday, July 19, 2026

इतवार की तैराकी

 


भीगा-भीगा है शमा, ऐसे में है तू कहाँ 

मेरा दिल ये पुकारे आ जा।

पूल से निकलकर शॉवर लेने के बाद तौलिए से बदन पोछते हुए बालक गाना गा रहा था। दोस्तों से बात करते हुए बता रहा था -' पंद्रह दिन हो गए। अभी स्वीमिंग आई नहीं। हमने कहा -' आ जायेगी। स्वीमिंग भी आयेगी। जिसको पुकार रहे हो वह भी आयेगी।' 

बालक हँसने लगा। हमने उसको यह नहीं बताया कि हमको डेढ़ महीना हो गए यहाँ सीखते। अभी तक  तैरना नहीं आया। उसका तो कहीं सवाल ही नहीं।

स्वीमिंग पूल में आजकल समय शुरू होते ही खतम हो गया लगता है। घंटा कब पूरा हो गया पता ही नहीं चलता। कल थोड़ा जल्दी गए। जल्दी मतलब पाँच मिनट पहले। पूल में उतरने लगे तो पानी में मौजूद कोच ने रोक दिया। कहा -' पहले वालों को निकल जाने दीजिये।' 

समय पर उतरे तो पता चला कि स्वीमिंग कैप और चश्मा बाहर बैग में ही भूल गए। वापस लेने गए। पाँच मिनट लेट हो गए।

बाद में  स्वीमिंग पूल से समय  पूरा होने पर बाहर निकले। एक दूसरे कोच ने कहा -'अंकल आज आप जल्दी बाहर निकल आए।' हमने कहा -' एक कोच ने समय से पहले घुसने नहीं दिया। दूसरा देर तक पूल में रहने के लिए टोके इससे पहले निकलना ही बेहतर।' उसने कहा -'अंकल, आपको एक दिन देर तक स्वीमिंग करायेंगे।' 

हमने कहा -' हम अपने समय में ही करते रहें यही बहुत है।' 

स्कूल खुल जाने के चलते बच्चे कम आने लगे हैं।स्वीमिंग पूल में लोगों की संख्या कम हो गई है। कुछ कोच भी कम कर दिए गए हैं। एक कोच ने दुखी मन से, पूल प्रबंधकों से थोड़ा नाराजगी व्यक्त करते हुए यह जानकारी दी। हमें लगा कि अपने कर्मचारियों को 'फ़ायर' करने के मामले में हम लोग अमेरिका की बड़ी कंपनियों से कम नहीं हैं। अगले महीने की शुरुआत से रात 9 से 10 का बैच खत्म कर दिया गया।

'फ़ायर' और स्वीमिंग कूल कोच से दो दिन पहले नेटफ्लिक्स पर देखी मूवी 'डिजायर' याद आ गई। इसमें उम्रदराज महिला के एक युवा स्वीमिंग कोच से संबंध हो जाते हैं। यौन संबंध बनते हैं। बाद में महिला इस संबंध को ग़लत मानते हुए इसको खतम करना चाहती है। लेकिन युवा कोच ऐसा नहीं चाहता। फिर कोच उस महिला की बच्ची को , जो कोच से आकृष्ट रहती है, डेटिंग पर ले जाता है। इसके बाद परिवार के सब लोग मिलकर कोच को निपटा देते हैं। फ़िल्म देखने के बाद लगा कि इस मामले में पहले महिला ने की थी। लेकिन निपटाया गया कोच। फ़िल्म  वाले उसको मारे बिना भी अलग कर सकते थे। लेकिन उनकी समझ। उनके हिसाब से इसी तरह ठीक था।

कल और आज भी अपन ब्रेस्टस्ट्रोक को मास्टर करने में जुटे हैं। हाथ और पांव चलाना जानते हैं। लेकिन हर बार चल नहीं पाते। यह समझ में आया कि हम सर ग़लत समय पर उठाते हैं। जब हाथ से पानी पीछे खींचते हैं तब सर उठाना चाहिए। लेकिन हम सर तब उठाते रहे जब हाथ आगे जा रहे होते हैं। पाँव भी सही समय पर चलने से  भटक। नतीजा यह होता है अक्सर सर ऊपर नहीं उठता। कभी-कभी उठ भी जाता है। जब उठता है तब लगता है ,हाँ यही है असल तरीका। लेकिन अगली बार फिर कुछ गड़बड़ हो जाती है। लेकिन यह पक्का लगता है  एकाध दिन बाद सारे एक्शन में तालमेल बैठ जाएगा। 

आज लौटते समय पानी बरस रहा था। पूल से निकलकर शॉवर लिया। गीले कपड़ों में ही भीगते हुए साइकिल चलाते हुए वापस आ गए। 



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