Sunday, October 23, 2011

तेरे बच्चे खुश रहें,कवि न बनें

कवि ने आशीष मांगा जनता का खुले मन से,
वे भी मन से बोले तेरे बच्चे खुश रहें,कवि न बनें ।

मसखरों ने मिलकर कवि के खिलाफ़ मुकदमा ठोंका है,
उनकी नकल करके वो उनका धंधा खराब करता है ।

-कट्टा कानपुरी

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