Friday, October 14, 2011

नेता के सबसे मुंहलगे गुंडे ने इतरा के ये पूछा,
साब जी हमको चुनाव का टिकट कब मिलेगा।

उन्होंने इनाम कमेटी को बहुत कड़ा खत लिखा,
खबरदार जो मेरे अनछपे कलाम पे इनाम दिया!

कई लोगों ने देश की भलाई के लिये कमर कस ली,
सब लोग आपस में बोले -पहले आप, पहले आप!

मन तो करता है सारा देश सुधार के धर दूं,
पर फ़ेमिली पचड़े में पड़ने से रोक देती है!

उसने तो मुझे कुल एक बार पीटा वो भी अकेले में,
खबरनवीस तो खुले आम पीट रहे हैं कई दिन से।

बहुत देर साथ बैठे कुछ बोले न फ़ूटा,
विदा हुये- फ़िर मिलेंगे के वादे के साथ!

वो तो अपनी रोज की रोटी के लिये हलकान है,
उससे भी सियासत के सवाल पूछोगे क्या?

जिसका जिक्र किया वो ऐब आ गया मुझमें,
अब तू जब मन करे तब खफ़ा हो सकती है ।

-कट्टा कानपुरी

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