Tuesday, March 12, 2013

दफ़्तर प्रयाण गीत

http://web.archive.org/web/20140419155656/http://hindini.com/fursatiya/archives/4106

दफ़्तर प्रयाण गीत


चल बबुबा अब उठ बिस्तर से,
हो तैयार औ चल दफ़्तर को। 
 
काम-धाम कर खुब अच्छे से,
हंसी-खुशी जी ले हर पल को!

मस्त मिलो, हंसकर के सबसे,
चिंता को रख तू निज ठेंगे पे।

काम करो,सब धांस के बच्चा,
रहो सजग कोई दे न गच्चा।

शाम मिलेंगे तो फ़िर देखेंगे,
अभी निकल ले तू दफ़्तर को।

-कट्टा कानपुरी

14 responses to “दफ़्तर प्रयाण गीत”

  1. Padm Singh पद्म सिंह
    जय हो कट्टा कानपुरी की
    Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..मगर यूं नहीं
  2. देवेन्द्र पाण्डेय
    कानपुरी की नाक ऊँची हो गई! कट्टा का यह कारतूस पसंद आया।
  3. ajit gupta
    आप तो दफ्‍तर ऐसे जा रहे हैं जैसे युद्ध में सैनिक जाता है। चढ़ जा बेटा सूली पर, भली करेंगे राम।
    ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..डॉक्‍टर ने कहा – आप चुप रहिए, बस मुझे सुनिए
  4. सतीश सक्सेना
    कट्टे की सर्विसिंग काहे नहीं कराते किसी उस्ताद से ..??
    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..एक चिड़िया ही तो थी,घायल हुई -सतीश सक्सेना
  5. Kajal Kumar
    ३-३ कम्‍पूटर !!!
    सरकार भौत काम लेती है …
    Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- हर मर्ज़ की एक दवा है हकीम लुकमान
  6. दीपक बाबा
    ३ ३ कम्पुटर …
    तभी कहें फुर्सत में भी ब्लॉग्गिंग काफी तेज रहती है.
    दीपक बाबा की हालिया प्रविष्टी..प्रणाम
  7. प्रवीण पाण्डेय
    चल दफ्तर को, काम बहुत है,
    लाने को सामान बहुत है।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..हम जिये है पूर्ण, छवि व्यापी रहे
  8. shikha varshney
    :):)जय हो.
  9. amit kumar srivastava
    प्रार्थना सभा में गाया जाना चाहिए ,प्रतिदिन ,आपकी निर्माणी में |
  10. जितेन्द्र भगत
    बढ़िया!
    जितेन्द्र भगत की हालिया प्रविष्टी..गुलमर्ग: सपरिवार
  11. Yashwant Mathur

    दिनांक 14/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!
  12. Kailash sharma
    वाह! बहुत बढ़िया….
    Kailash sharma की हालिया प्रविष्टी..हाइकु (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर)
  13. Digamber Naswa
    मस्त मिलो, हंसकर के सबसे,
    चिंता को रख तू निज ठेंगे पे …
    वाह … मज़ा आ गया इनको पढ़ के …
  14. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख

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