Wednesday, March 13, 2013

दफ़्तर पुराण

http://web.archive.org/web/20140419155301/http://hindini.com/fursatiya/archives/4111

दफ़्तर पुराण


निकल पड़े घर से मर्दाने
अब ये सब दफ़्तर जायेंगे। 
 
हंसी-ठहाका सब करेंगे मर्दे
काम इधर-उधर सरकायेंगे।

अपन का पूरा-पक्का है सब,
रामलाल का पिछड़ा है जी।

रामलाल का कहना है कि,
बाकी का कूड़ा-कचरा है।

रोयेंगे सब सुविधाओं को
अपने को बेचारा बतलायेंगे।

कोसेंगे से उस नौकरिया को,
जिसे वे कभी न छोड़ पायेंगे।

बास मिला है बौढ़म सनकी पूरा,
नीचे वालों की तो बस मत पूछो।

हमी लगे हैं तो ये हो पाया,
वर्ना तो सब कुल चौपट होता।

यही कहानी हर दफ़्तर की,
यही हाल दुनिया संसार का।

चलों चलें यार अब दफ़्तर को,
काम समेटे जो सब पसरा है।
-कट्टा कानपुरी

8 responses to “दफ़्तर पुराण”

  1. sanjay jha
    जय हो कट्टा कानपुरी की.
    प्रणाम.
  2. सतीश सक्सेना
    महाराज ,
    सर्विसिंग करा लो …??
    चला कही रहे हो, जा कहीं रही है !

    बैरल में जंग लगी
    हैमर कमज़ोर है !
    ट्रिगर गार्ड टूट गया
    कारतूस गीले हैं !
    पेटी में बंद रखो, बोर क्यों करते हो ?
    कानपुरी कट्टे में, ग्रीज़ की ज़रुरत है !


    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..एक चिड़िया ही तो थी,घायल हुई -सतीश सक्सेना
    1. sanjay jha
      ‘मूसल’ प्रहार नवी ओखला वालों के तरफ से…………….
      प्रणाम.
  3. प्रवीण पाण्डेय
    पहले काम की बातें, फिर होगा काम..
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..नेटवर्क टैक्स
  4. aradhana
    हे हे हे…! कट्टा कानपुरी :)
    aradhana की हालिया प्रविष्टी..Meet a Forum Volunteer: Tess Warn
  5. भारतीय नागरिक
    बस स्थानीय मान का अन्तर होता है.. :D
  6. rajesh kumar singh
    गज़ब,गज़ब,गज़ब, मर्दे और क्या कहूँ लिखते रहें ऐसी और रचनाओं का बेसब्री से इंतजार है
  7. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] दफ़्तर पुराण [...]

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