Tuesday, May 13, 2014

लड़कियां अपने आप में मुकम्मल जहाँ होती हैं




रोज की तरह कैमरा लिए खड़े थे अपन कल दोपहर को चौराहे में कि ये बच्ची दिखी।शायद धूप के कहर से बचने के लिए पूरा चेहरा ढंके । एक हाथ में साईकिल का हैंडल थामे और दूसरे में कान से मोबाईल सटाए बतियाती जा रही बच्ची को देखकर हमको फिर Mukesh Tiwari कविता की आखिरी पंक्तियाँ याद आ गयीं:

"लड़कियां अपने आप में मुकम्मल जहाँ होती हैं"।
 
 
 

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