Sunday, October 19, 2014

अथ प्लास्टर कथा

पैर लचकने के बाद हम प्लास्टर शुदा हो गये।

लोगों ने बल भर मौज ली। हमें परसाईजी से जोड़ दिया। बोले उनकी टांग टूटी थी तुम्हारी भी टूट गयी। एक ने तो यह भी कहा -’वे पिटे थे। तुम भी पिटो और उनके और बराबर आ जाओ।’

टांग टूटने से परसाई बनते तो हर हड्डी का डाक्टर साल में सैकड़ो परसाई पैदा करता।पिटने से बराबरी होती परसाई जी की तो रोज सैकड़ों परसाईजी बनते। अखबार खबर बनाते- ’ दो अज्ञात लोगों ने अचानक हमला करके एक बुजुर्ग को परसाई बनाया।’

परसाई जी की टांग का किस्सा फ़िर कभी विस्तार से। पैर में प्लास्टर चढ़ने के बाद हमें एक बार फ़िर अम्मा याद आईं। हमने एक दिन उनको मजाक में धकिया दिया था। पैर उनका लचक गया था। उस दिन हमें पहली बार एहसास हुआ कि अम्मा अब कमजोर और बूढी हो गयी हैं। 75 पार थीं उस समय अम्मा। उनको लेकर अस्पताल ले गये थे। प्लास्टर चढ़वाया था।

हमारा प्लास्टर डम्प्लाट वाला था। कुछ दोस्तों ने कहा -’हल्का वाला चढ़वाते। काहे को ये बड़ा वाला चढ़वाया? ’ 
हमारा कहना था कि ऐसा भी क्या प्लास्टर चढ़ना जो मील भर दूर से न दिखे। हल्के वाले में पता ही न चलता कि मोजा पहने है कि प्लास्टर है। इसमें फ़ुल सहानुभूति की गारन्टी तो है। रही वजन की क्या बात तो भैया नब्बे किलो लादे हैं तो एकाध किलो और सही।

प्लास्टर की गरिमा के लिहाज से तो हमें तीन हफ़्ते बिस्तर की शोभा बढ़ानी चाहिये थी लेकिन देश सेवा के जज्बे ने हमें ऐसा करने से मना कर दिया। हम नियमित दफ़्तर जाते रहे। इस चक्कर में प्लास्टर मुलायम होता गया।

लोगों ने सलाह दी कि छड़ी का सहारा लेकर चलो। वजन कम पड़ेगा पैर पर। जल्दी ठीक होगा। हमने कानपुर से अम्मा की छड़ी मंगवायी। चले दो-चार बार लेकिन लगा कि इसका सहारा लेंगे तो फ़िर कहीं लुढ़क जायेंगे। छड़ी किनारे रख दी।

प्लास्टर में दफ़्तर जाने से काफ़ी सहूलियत हुई। जो भी मिलने वाला आता हमारे पांव के हालचाल लेता। बात करने का बहाना बन गया प्लास्टर। कैसे हुआ? कब हुआ? कब कटेगा ? घर चले जाते? कौन देखभाल करता है? बड़े बहादुर हैं!

गम बूट की तरह चढ़ा सफ़ेद प्लास्टर बहादुरी की मिशाल बन गया।

दफ़्तर में प्लास्टर चढी टांग के साथ जाने का फ़ायदा भी हुआ। जहां काम रुकता वहां पहुंच जाते। कार से सबसे प्लास्टरशुदा टांग बाहर निकालते हुये उतरते। लोग भागे हुये आते। काम बताते और लग जाते।कमजोरी हथियार बन गयी। एक दिन रात को एक फ़र्म पहुंच गये , टांग समेत। जो बहुत जरूरी सामान अगले दिन शाम को आ पाता फ़ैक्ट्री वो सुबह आ गया। आठ घंटे सिकोड़ दिये प्लास्टर ने।

मिलते ही शरीफ़ लोग तारीफ़ करने लगते- " ये होता है कमिटमेंट । काम के प्रति समर्पण। पैर में प्लास्टर है फ़िर भी छुट्टी नहीं ली।काम पर आ रहे हैं। "

हमने उनको टोंका नहीं। कोई तारीफ़ करे तो टोंकना ठीक भी नहीं लगता न।पाप पड़ता है। लेकिन सच्चाई यही थी कि  बिस्तर पर इसलिये नहीं रहे कि पीठ दर्द से अकड़ जाती। यहां निठल्ले बैठे श्रेय मिल रहा है तो काये को बिस्तर तोड़ना। ’बेड सोर’ हो जाता है बिस्तर पर लेटे-लेटे।

कुछ लोग समझते कि काम पर आ रहे हैं तो चोट मामूली है। तारीफ़ नहीं कर पाते ठीक से। उनको समझाना पड़ता कि चोट तो खैर मामूली नहीं है लेकिन काम के प्रति समर्पण के चलते  काम पर आ रहे हैं। उसके बाद वे तारीफ़ करना शुरु करते। भले ही बुझी-बुझी करते लेकिन करते। लेकिन स्वत: स्फ़ूर्त तारीफ़ और जबरियन तारीफ़ का फ़र्क तो पता चल ही जाता।


प्लास्टर के चलते नहाने की समस्या आई। भीगने से बचाने के लिये पैर को एक प्लास्टिक की बोरी में पैक करके बांध देते । प्रदूषण के लिये गरियायी जाने वाली प्लास्टिक नहाने के लिये सहारा बनी। कुछ ऐसे ही जैसे सालों तक गरियाया जाने वाला काला धन चुनाव के समय तारण हार लगता है सब राजनीतिक पार्टियों को।

जैसे किसी पार्टी विरोधी हरकत के लिये अपने प्रवक्ताओं को हटा देती हैं राजनीतिक पार्टियां उसी तरह और फ़िर दायें पैर को शरीर से दूर कर देते। फ़िर आहिस्ते से नहाते। पहले कंकड़-स्नान में अपराध बोध होता कि ठीक से नहाये नहीं। अब उतने ही पानी में नहाने को पराक्रम के खाते में डाल देते। जाड़े में तो यह पराक्रम और बीहड़ लगता।

पिछ्ले दो हफ़्तों में जितने लोगों को पता चला, दिखा प्लास्टर वे सब  सहानुभूति जता चुके हैं। कुछ लोग दुबारा-तिबारा जता चुके हैं। तारीफ़ करनी भी बन्द कर दी है लोगों ने। ले-देकर बस एक ही सवाल बचा है लोगों के पास- ’कब कटेगा?’

 अब लग रहा है कि  इस प्लास्टर से और कोई सहानुभूति नहीं मिलनी, कोई और शाबासी नहीं मिलनी। जो एक किलो का प्लास्टर बहादुरी की मिशाल लगता था अब वह भारी लगने लगा है। कोई झस नहीं रही अब इस चोट में। लगता है इसके दिन पूरे हो गये। इसके कटवाने का समय आ गया है।

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4 comments:

  1. शुक्ला जी क्यों पैर फर अत्याचार कर रहे हैं ? चाहे आप छड़ी से चले या सीधे पैर के साथ ठीक नहीं कर रहें हैं।

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  2. आपको दीपावली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ !

    कल 23/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. आपको और समस्त ब्लॉगर मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं

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