Sunday, October 05, 2014

स्वर्गलोक में स्वच्छता अभियान


भारत देश में 2 अक्टूबर को प्रारम्भ हुये स्वच्छता अभियान के दौरान उड़ी धूल की गर्द स्वर्गलोक तक पहुंची तो देवगणों को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी। उनको लगा कि कहीं यह कोई नये तरह की तपस्या तो नहीं जिसके द्वारा कोई स्वर्गलोक पर कब्जे की कोशिश कर रहा हो। 

फ़ौरन नारद जी को माजरा समझने के लिये भारत देश भेजा गया। नारद जी पलक झपकते ही नयी दिल्ली की वाल्मीकि कालोनी पहुंच गये। उसके अलावा और जगह घूम घूमकर उन्होंने स्वच्छता अभियान की वीडियो क्लिप बनाई और वापस देवलोक चल दिये।

नारद जी  जैसे ही वीणा टुनटुनाते हुये स्वर्गलोक  पहुंचे  उनको देवगणों ने मुख्य द्वार पर ही घेर लिया और पूछने लगे-"हे नारद, क्या खबर लाये हो? सुना है  कोई स्वच्छता अभियान प्रारम्भ किया गया है!  क्या यह कोई नया अनुष्ठान है? क्या यह देवाधिदेव की कोई नयी लीला है या फ़िर किसी राक्षस का उत्पात?  इसमें क्या हमें पुष्पवर्षा के लिये जाना होगा? कृपया शीघ्र बतायें! हमारे हलक सूख रहे हैं परन्तु हम मारे चिंता के सोमरस का पान नहीं कर पा रहे हैं!"

 जैसे एयरपोर्ट से उतरा नेता संवाददाताओं के माइक को परे हटाता हुआ तेजी से आगे बढ़ता जाता है और बयान के नाम पर ’नो कमेंट्स’कहता हुआ आगे बढ़ता जाता है उसी तरह नारद जी बिना कुछ कहे तेजी से देवसभा की तरफ़ फ़ुर्ती से चलते चले गये। देवगण भी लपकते हुये चल दिये।

देवसभा में नारद जी ने गला खंखारकर भारत में चल रहे स्वच्छता अभियान की जानकारी सबको दी।  सफ़ाई अभियान की वीडियो क्लिपिंग्स दिखाई। हर जगह झाडू ही झाडू दिख रही थी वीडियो/फ़ोटुओं में। देवगणों ने जब देखा कि फ़ोटुओं में कोई तपस्या करता हुआ नहीं दिख रहा है तो उन्होंने अपने अपने पीताम्बर से मुंह पोछते हुये चैन की सांसे लीं। आदिकाल से ही देवगण किसी को भी तपस्या करते हुये देखते हुये देखते हैं तो उनकी जान सूखने लगती है। उनको लगता है कि अब तो गया कब्जा देवलोक से। वे फ़ौरन मेनका, रम्भा आदि अप्सराओं को तपस्या भंग करने के लिये दौड़ा देते हैं।


देवसभा में इस बात पर विचार हुआ कि कहीं इस अभियान से देवस्थानों से आने वाले चढ़ावे  पर तो नहीं असर पड़ेगा? 

इस पर सभी देवगण एकमत थे भारत की जनता धर्मपरायण है। स्वच्छता अभियान के झांसे में आकर अपना स्वभाव नहीं बदलेगी।  देवस्थलों पर इस अभियान का कोई फ़रक नहीं पड़ेगा। भक्तगण पहले की ही तरह देवस्थलों को फ़ूल, पत्तियों, मालाओं और गन्दगी गांजते रहेंगे। प्रसाद और चढ़ावा आता रहेगा।

जब प्रसाद और चढ़ावे पर विपरीत असर नहीं पडेगा यह जानकर देवगण निश्चित हो गये और भारत देश से आये वीडियो क्लिप को आगे- पीछे करवाते हुये चुहल करने लगे। 

देवगणों ने देखा कि सारे सफ़ाई रत मानव लम्बी-लम्बी झाडुयें भालों की तरह हाथों में थामे दिख रहे थे। सब तरफ़  झाडुयें ही झाडुयें दिख रहीं थीं। कूड़ा कहीं दिख ही नहीं रहा था। शायद झाडू की आहट सुनते ही कूड़ा ’गली पार’ हो गया था। झाडुयें ही कूडे की तरह दिख रहीं थीं।

एक देवता ने पूछा कि ये बड़ी झाडुयें क्यों लिये हुये हैं सारे लोग? 

स्वच्छता अभियान को यादगार दिवस बनाने के लिये। जिस तरह लोग शादी, व्याह, सालगिरह आदि रोज-रोज नहीं होते वैसे ही ये सफ़ाई अभियान भी रोज-रोज तो होना नहीं है। इसलिये सहेजने के लिये बड़ी झाडुयें थामी गयीं। इसमें पूरा फ़ोटो अच्छे से आयेगा। छोटी झाडुओं में झुककर सफ़ाई करते हुये चेहरा छिप जाता फ़िर कैसे दिखाते कि देखो हमने भी की है सफ़ाई। बुढौती में कमर लचक जाने का भी खतरा था सो लम्बी झाडुओं का इस्तेमाल किया गया। इसके माध्यम से सरकार के सूत्रवाक्य -"न्यूनतम सरकारी, अधिकतम असरकारी" का भी मुजाहिरा हो गया। कूड़े के कम से कम संपर्क में आकर अधिक से अधिक से सफ़ाई का प्रचार हो गया। 

सफ़ाई अभियान की  फ़ोटुओं से प्रभावित एक युवा देवता ने स्वर्ग में भी स्वच्छता अभियान चलाने का प्रस्ताव किया। इस पर सभी देवता उस पर शर्म, शर्म करते हुये हावी हो गये। कहने लगे - "इस तरह के प्रस्ताव स्वर्ग की गरिमा के खिलाफ़ हैं। निठल्लेपन की स्वर्णिम परम्परा के खिलाफ़ हैं। हम यहां आमोद-प्रमोद, भोग विलास के लिये आये हैं। सफ़ाई करते हुये पसीना बहाने के लिये नहीं। हमारा काम गंदगी फ़ैलाना है, सफ़ाई करना नहीं।"

लेकिन चूंकि प्रश्न उठ चुका था इसलिये  दिखावे के लिये विमर्श होने लगा कि क्या स्वर्गलोक में भी स्वच्छता अभियान चलाया जाना चाहिये?

स्वर्ग में स्वच्छता अभियान चलाने की बात पर सभी ने एकमत से यह कहा- " स्वर्गलोक में कोई काम-धाम तो करना नहीं होता देवगणों को। खान-पान-रहन-सहन-आमोद-प्रमोद सब तो सहज मुफ़्त है। स्वचालित प्रक्रिया से सभी आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहती है। जैसे दुनिया के सारे विकसित देश अपना कचरा विकासशील देशों में धकेल देते हैं  वैसे ही यहां  जो भी गन्दगी उत्पन्न होती है  पान, ताम्बूल, सोमरस, पुष्प, उच्छिष्ट वह सब स्वचालित प्रक्रिया की तरह सीधे नरक लोक चला जाता है। यहां स्वच्छता अभियान की आवश्यकता तो प्रतीत नहीं होती।"

और यह भी कहा गया - "फ़िर मान लीजिये अगर प्रतीक रूप में चलाना भी चाहें स्वच्छता अभियान यहां तो अपने यहां टेलिविजन चैनल कहां, इतने संवाददाता कहां हैं जो इस घटना का जीवन्त प्रसारण कर सकें। बिना प्रचार के कोई  अभियान करने की बात समझ नहीं आती। किसी भी दृष्टि से समीचीन बोले तो उचित प्रतीत नहीं होता स्वर्ग लोक में स्वच्छता अभियान का आयोजन।"

इस तरह स्वर्ग लोग का  ’स्वच्छता अभियान’  टेलिविजन चैनलों के अभाव में बिना शुरु हुये ही खतम हो गया।

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3 comments:

  1. अभी अभी स्वर्ग के प्रवक्ता ने बताया कि देवताओं की कैबिनेट में टीवी चैनल लगाने को लेकर बैठक चल रही है। इस बात पर भी चर्चा संभव है कि स्वतंत्र पत्रकार अनूप शुक्ल को यहाँ की ख़बरें कैसे लीक हो रही हैं।

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  2. हूं.… टीवी कवरेज के बिना क्या फायदा ?

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  3. oh ! ab samjh mei ayaa ki adhiktar netaon ne lambi jhaadu kyon li hui thi.

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