Friday, October 03, 2014

पुलिया और पेड़ बाकायदा आबाद हैं

कल शाम जबलपुर में हचककर पानी बरसा। जैसे 31 मार्च को फंड मिलता है तमाम सरकारी विभागों को इस हिदायत के साथ कि आज ही खर्च करना है।उसई तरह बादल पानी उड़ेल रहे थे गोया दस मिनट देर हुई तो पानी वापस लाद के ले जाना पड़ेगा।हवा इतनी तेज चल रही थी कि तमाम बड़े,बूढ़े, जूनियर,सीनियर, मार्गदर्शक पेड़ औंधे मुंह जमीन पर आ गिरे।

लगता है कि कल हमारे यहाँ हुए सफाई के नाटक से गांधी जी भन्ना गए। उन्होंने नाराजगी जाहिर की होगी। वहीं अनशन पर बैठ गये होंगे स्वर्ग़ में इस दिखावे के खिलाफ।उनको पटाने के लिए बादल और हवा का इंतजाम किया गया होगा।  शाम को शायद गांधी जी को वीडियो दिखाया गया हो तो गांधीजी कहीं इस 'औचक हिंसा' के विरोध में वहाँ धरने पर न बैठ गये हों।

पुलिया पर गये सुबह हाल देखने तो वहां पेड़ की एक डाल  पेड़ से अलग हो गयी थी। लगा पेड़ की एक बांह उखड़ गयी हो। या फिर यह जैसे महाराष्ट्र में सालों से एक साथ चुनाव लडती पार्टियां चुनाव की आंधी में अलग हो गयी हों।

सूरज भाई अपनी रोशनी पुलिया पर ऐसे फेंक रहे थे जैसे टार्च जलाकर पेड़ का घाव अच्छे से देख रहे हों। पेड़ की डाल टूटने से पुलिया पर छाया कम हो गयी है लेकिन यह बात एकदम साफ है कि पुलिया और पेड़ बाकायदा आबाद हैं।कल शाम जबलपुर में हचककर पानी बरसा। जैसे 31 मार्च को फंड मिलता है तमाम सरकारी विभागों को इस हिदायत के साथ कि आज ही खर्च करना है।उसई तरह बादल पानी उड़ेल रहे थे गोया दस मिनट देर हुई तो पानी वापस लाद के ले जाना पड़ेगा।हवा इतनी तेज चल रही थी कि तमाम बड़े,बूढ़े, जूनियर,सीनियर, मार्गदर्शक पेड़ औंधे मुंह जमीन पर आ गिरे।

लगता है कि कल हमारे यहाँ हुए सफाई के नाटक से गांधी जी भन्ना गए। उन्होंने नाराजगी जाहिर की होगी। वहीं अनशन पर बैठ गये होंगे स्वर्ग़ में इस दिखावे के खिलाफ।उनको पटाने के लिए बादल और हवा का इंतजाम किया गया होगा। शाम को शायद गांधी जी को वीडियो दिखाया गया हो तो गांधीजी कहीं इस 'औचक हिंसा' के विरोध में वहाँ धरने पर न बैठ गये हों।

पुलिया पर गये सुबह हाल देखने तो वहां पेड़ की एक डाल पेड़ से अलग हो गयी थी। लगा पेड़ की एक बांह उखड़ गयी हो। या फिर यह जैसे महाराष्ट्र में सालों से एक साथ चुनाव लडती पार्टियां चुनाव की आंधी में अलग हो गयी हों।

सूरज भाई अपनी रोशनी पुलिया पर ऐसे फेंक रहे थे जैसे टार्च जलाकर पेड़ का घाव अच्छे से देख रहे हों। पेड़ की डाल टूटने से पुलिया पर छाया कम हो गयी है लेकिन यह बात एकदम साफ है कि पुलिया और पेड़ बाकायदा आबाद हैं।

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