Wednesday, October 22, 2014

पुलिया के क्या हाल हैं?

इतवार को प्लास्टर कटवा दिया। एक दिन गरम पट्टी(क्रैप बैंडेज) बांध के चले। फिर सीधे जूते में पाँव अन्दर करके खरामा-खरामा टहलते हुए फैक्ट्री जाने लगे। कल सुबह पुलिया के पास कुछ देर खड़े रहे। कोई बैठा नहीं दिखा। फिर कुछ देर बाद ये बहनजी सर पर टोकरी लिए आते दिखीं तो उनके साथ ही बिस्मिल्ला किया गया पुलिया कथा का। शायद ये कुछ सामान बेचने गयीं होंगी। रोज कुछ महिलाएं सर पर टोकरी धरे हाथ हिलाते इधर से गुजरती हैं। गजब का संतुलन है। अभ्यास से सधता होगा।

इस बीच एक दिन बहुत तेज तूफ़ान आया था। उसमें इस्टेट के तमाम पेड़ उखड़ गये थे। पुलिया के पीछे का पेड़ भी आधा हो गया। पुलिया पर सीधे धूप आने लगी। छांह कम हो गयी। शायद इसलिए भी लोगों ने बैठना कम कर दिया होगा यहाँ।

आज बहुत हल्का भूकम्प आया जबलपुर में। हमारी भतीजी स्वाति Swati Awasthi ने फौरन फोन करके पूछा-"पुलिया के क्या हाल हैं?" अंदाज हैं अपने-अपने हाल-चाल लेने के।  󾰀

आप सबको दीपावली की मंगलकामनाएं। नीरजजी की कविता के साथ:

जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

यह पोस्ट जबलपुर रेलवे स्टेशन से  कानपुर जाने के लिए चित्रकूट एक्सप्रेस का इन्तजार करते हुए। 󾌰इतवार को प्लास्टर कटवा दिया। एक दिन गरम पट्टी(क्रैप बैंडेज) बांध के चले। फिर सीधे जूते में पाँव अन्दर करके खरामा-खरामा टहलते हुए फैक्ट्री जाने लगे। कल सुबह पुलिया के पास कुछ देर खड़े रहे। कोई बैठा नहीं दिखा। फिर कुछ देर बाद ये बहनजी सर पर टोकरी लिए आते दिखीं तो उनके साथ ही बिस्मिल्ला किया गया पुलिया कथा का।

शायद ये कुछ सामान बेचने गयीं होंगी। रोज कुछ महिलाएं सर पर टोकरी धरे हाथ हिलाते इधर से गुजरती हैं। गजब का संतुलन है। अभ्यास से सधता होगा।

इस बीच एक दिन बहुत तेज तूफ़ान आया था। उसमें इस्टेट के तमाम पेड़ उखड़ गये थे। पुलिया के पीछे का पेड़ भी आधा हो गया। पुलिया पर सीधे धूप आने लगी। छांह कम हो गयी। शायद इसलिए भी लोगों ने बैठना कम कर दिया होगा यहाँ।

आज बहुत हल्का भूकम्प आया जबलपुर में। हमारी भतीजी स्वाति Swati Awasthi ने फौरन फोन करके पूछा-"पुलिया के क्या हाल हैं?" अंदाज हैं अपने-अपने हाल-चाल लेने के। 😀

आप सबको दीपावली की मंगलकामनाएं। नीरजजी की कविता के साथ:
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
यह पोस्ट जबलपुर रेलवे स्टेशन से कानपुर जाने के लिए चित्रकूट एक्सप्रेस का इन्तजार करते हुए।

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