Monday, November 21, 2016

एटीएम मल्लब एक ट्राई और मारो




आजकल एटीएम के चर्चे जोरों पर हैं। लाइनें लगी हुईं हैं। देखकर लगता है कि देश वाकई अपने पैरों पर खड़ा हुआ है। लिखते-लिखते लव हो जाने की तर्ज पर ’लगते-लगते लव हो जाने’ की खबरे भी आ रही हैं। अकेले गये थे लाइन में लगने लेकिन लौटते हुये लक्ष्मी लेकर लौट रहे हैं। यह चलन बढा तो आगे ऐसी शादियां ’एटीएम शादी’ के नाम से जानी जायेंगी।

एटीएम पैसा निकालने की मशीन है। पहले पैसा बैंक से निकलता था। लोग बैंक जाते थे। टोकन लेते थे। लोगों से बतियाते थे। गपियाते थे। देखने, घूरने, आंखे लड़ाने के सिलसिले भी इसी बहाने हो लेते थे। दावत के ’पंगत सिस्टम’ सरीखा था बैंक से पैसा निकालने का काम । एटीएम आने के बाद पंगत सिस्टम ’बुफ़े सिस्टम’ में बदल गया। एटीएम खाने की मेज की तरह पैसे की खड़ी ठेलिया में बदल गये हैं। आओ , पिन दबाओ, जित्ता मन चाहे पैसा ले जाओ।

एटीएम का मतलब तो आटोमेटेड टेलर मशीन होता है। लेकिन हम इसे ’आल टाइम मनी’ मशीन समझते हैं। इधर पैसे के लिये लोग एटीएम दर एटीएम भटक रहे हैं। उनके लिये एटीएम का मतलब हौसला बढाने की मंशा से ’एक ट्राई और मारो’ हो गया है। किसी और एटीएम पर लाइन लगाओ। क्या पता पैसा निकल ही आये।

एटीएम एक तरह से पैसे के छोटे-छोटे बांध हैं। चंचला लक्ष्मी के की सरपट गति को रोकने के लिये जगह-जगह बने स्पीड ब्रेकर हैं। यहां पैसा निकलने के पहले जरा तसल्ली से बैठकर सुस्ता लेता है।

एटीएम पर कुछ और बात करने के पहले हम यह बता दें कि दुनिया में भले एटीएम आज शुरु हुये हों लेकिन अपने भारत दैट इज इंडिया में दुनिया का हरकाम सबसे पहले हो चुके होने की तर्ज एटीएम का चलन बहुत पहले से था। हमारे मंदिर, मठ धन संपदा के एटीएम ही तो थे। खूब पैसा जमा होता था। जिसको भी पैसा चाहिये होता था वो मंदिर पहुंचकर पैसा निकाल लेता था। महमूद गजनवी ने सोमनाथ वाले एटीएम से कई बार पैसा निकालने की कोशिश की थी। जब कई तरह के पिन फ़ेल हो गये पैसा नहीं निकला तो बेचारे ने शाश्वत एटीएम -लूटपाट का प्रयोग किया और पैसा लेकर चला गया। आजकल जो लोग एटीएम लूटकर ले जाते हैं वे महमूद गजनवी की परम्परा के सच्चे वाहक हैं। मशालची हैं लूटपाट की मशाल मशाल को सुलगाते हुये आगे बढ़ाने का काम के।

आज एटीएम के सामने लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हुई हैं। लोग पैसा निकालने के लिये लगे हुये हैं। पैसा आ नहीं रहा है। लोग इंतजार में लगे हुये देश दुनिया के दीगर मसायल सुलटा ले रहे हैं। देवी-देवताओं की भी चांदी है। लोग तरह-तरह की मनौती मान रहे हैं आज पैसा निकल आया तो प्रसाद पक्का, सौ के नोट निकल आये तो लड्डू भोग। यमराज की दुकान भी खूब गुलजार हो रखी है।

कामगारों को नये तरह का काम मिला है। लाइन में लगने के पैेसे मिल रहे हैं। मनरेगा की तर्ज पर धनरेगा चल रहा है। बड़े-बुजुर्गों की पुराने बर्तनों को धोने-पोंछकर प्रयोग करने की तर्ज पर लाइनों में लगाया जा रहा हैं।

लोग एटीएम को सिर्फ़ पैसा निकालने की मशीन के रूप में जानते हैं। लेकिन इसके कई दीगर व्यवहारिक उपयोग किये जा सकते हैं। कुछ इस तरह के हो सकते हैं:

१. एटीएम स्थल प्रेम, मोहब्बत के नये ठीहे की तरह प्रयोग किये जा सकते हैं। एटीएम पर हुआ प्रेम ’एटीएम प्रेम’ और उससे हुई शादी एटीएम शादी के नाम से जानी जायेगी। ’एक्सिस शादी’ , ’ एसबीआई प्रेम’ जैसे फ़ैशन सुनने में आयेंगे।

२. एटीएम पर हुई भीड़ का उपयोग सभाओं के रूप में करने का चलन शुरु हो सकता है। आसपास माइक लगाकर जब मन चाहा भाइयों, बहनों शुरु हो सकता है। एक ही एटीएम पर विरोधी दलों की सभाओं में भाइयों-बहनों से हुई शुरुआत मां-बहन की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

३. लोग अपनी किताबों का विमोचन किसी लम्बी लाइन एटीएम के सामने करके कहकर कह सकते हैं -खचाखच भीड़ में विमोचन के बाद किताब खरीदने के लिये लाइन में लगे लोग।

४. एटीएम टूरिज्म की नई संभावनायें तलाशी जा सकती हैं। विदेश से आये लोगों को शहर में लगी एटीएम लाइने दिखाने के लिये बसें चलवाई जा सकती हैं। उनको बताया जा सकता है -यही असली भारत है।

५. एटीएम ट्यूशन का चलन शुरु हो सकता है। बच्चे स्कूल से लौटते ही अपना कार्ड लेकर एटीएम की लाइन में लग जायेंगे। टीचर बाहर कुर्सी पर बैठा-बैठा उनको सबक सिखाता रहेगा। जब नम्बर आ गया तो बच्चे अपना पिन दबाकर एटीएम बैलेन्स चेककर वापस लौट जायेंगे। जिनका पाठ पूरा नहीं हुआ होगा वे फ़िर से लाइन में लग जायेंगे।

६. लाइन में लगे-लगे अंग्रेजी सिखाने वाले एटीएम अंग्रेजी लर्निंग सेंटर चलन में आ सकते हैं। लाइन में लगते की सूचना मोबाइल से भेजते ही पिज्जा की तर्ज पर लोग अंग्रेजी ’डिलिवरी बालक’ निकल पड़ेंगे। उधर आदमी लाइन में लगा इधर अंग्रेजी की ड्रिप लगी। लाइन से बाहर आने तक दो-चार अंग्रेजी के शब्द तो सीख ही जायेगा।

७. एटीएम कवि भी चलन में आयेंगे। जिस भी कवि की कविता मुकम्मल हुई वह मुकर्रर, इरशाद की आश में किसी एटीएम की तरफ़ चल देगा। जहां पैसा जल्दी निकलता है वहां ’एटीएम आशु कवि’ और देरी वाले एटीएम पर ’एटीएम प्रबन्ध कवि’ पहुंचेंगे। मोबाइल एटीएम पर ’वनलाइनर’ लिखने वालों की लाइन मिलेगी।

८. आगे चलकर नायक-नायिका ए.टी.एम. के दरवाजे पर भिड़ जायेंगे और अन्धे हो दिखता नहीं, गुस्से में बड़ी हसीन लग रही हो से शुरू करके एक-दूजे के लिये होने का सफ़र तय किया जायेगा। इसे ए.टी.एम. प्यार के नाम से जाना जायेगा और साहित्य में इस तरह की कहानियों, कविताओं,लेखों को ए.टी.एम. युग का साहित्य माना जायेगा।

९. एटीएम पर खड़े लोगों को इनाम भी शुरु हो सकते हैं। एटीएम रत्न, एटीएम भूषण, एटीएम श्री की शुरुआत हो सकती है। एटीएम पर लगे-लगे दुनिया से निकल लेने वालों को ’एटीएम शहीद’ की उपाधि से विभूषित किया जा सकता है। क्या पता कोई शायरान अंदाज में जाते हुये कहकर जाये:

कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले ये एटीएम साथियों।

१०. एटीएम पर रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे। चाय, पान, खोमचे वाले लाइन के बाहर और जेबकतरे लाइन में लगे हुये अपनी दिहाड़ी कमायेंगे। शहरों में जाम के लिये ’जेबकतरे- उस्तादों’ का स्टेशन , बस अड्डे जाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में वे घर के पास के ही एटीएम पर जेब काटना सिखा सकते हैं।

११. ए.टी.एम. के उपयोग से आप एक नयी शब्दावली का चलन होगा। नये मुहावरे गढ़ सकते हैं। कोई अपने बास को कोसते हुये कह सकता है- हमारा बास हमको ए.टी.एम. समझता है, जब मन आता है ए.टी.एम. कार्ड की तरह हुकुम ठूंस कर काम निकाल लेता है।
१२. भविष्यफ़ल बांचने वाले लोगों की भाषा में एटीएम शब्दावली घुसपैठ करेगी। वे कहेंगे- ’आज सौ के नोट निकलने का संयोग है। आपके एटीएम पिन चोरी का खतरा है संभलकर रहें। परिश्रम करेंगे लेकिन नंबर आते-आते पैसा खत्म हो जायेगा। भाग्य तगड़ा है आपकी लाइन में आगे लगे आदमी का कार्ड खराब होने के चलते पैसा नहीं निकल पायेगा और आखिरी दो हजार का नोट आपको ही मिलेगा। कोई महिला ’प्लीज, हमको पहले निकाल लेने दीजिये कहकर, एटीएम का आखिरी नोट निकाल ले जायेगी और आप भले आदमी का तमगा और महिला का ’थैंक्यू भाई साहब’ लेकर एटीएम दर एटीएम भटकते फ़िरेंगे।

१३. समय के साथ कागजी मुद्रा चलन से बाहर से होती जायेगी। ऐसे में ए.टी.एम. युग का अवसान होगा। तब ए.टी.एम. कम्पनियां अपनी ए.टी.एम. खोखों को दूसरे काम के लिये इस्तेमाल करने लगेगीं। सुलभ शौचालय की तर्ज पर सम्भव है सुलभ शीतालय चालू हो जायें जहां लोग घंटे-आधे घंटे के लिये अपनी शरीर और जेब की गर्मी निकाल सकें।

इतने व्यवहारिक उपयोग हमने अपने अनुभव से बताये। अब आप भी कुछ अपने अनुभव साझा करिये। तब तक हम जरा पास के एटीएम तक होकर आते हैं। क्या पता पैसा आया हो वहां। उसके आगे भी क्या पता उसमें से पैसे भी निकल आयें। लेकिन सबसे बड़ा क्या पता तो ये होगा कि ’क्या पता निकलें पैसों में कुछ नोट सौ के भी हों।’

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