Monday, October 21, 2024

रहबरी के सवाल

 1. भाजपा तथा संघ परिवार का लक्ष्य देश के वातावरण को साम्प्रदायिक रंग देना और धर्मनिरपेक्ष समाज के ताने-बाने को, जिसकी व्यवस्था संविधान में की गयी है, तोड़ना है। इस तरह के गर्हित उद्धेश्यों के विरुद्ध जवाहरलाल नेहरू ने 1953 में ही देश को आगाह कर दिया था। उन्होंने तात्कालीन गृहमंत्री कैलाशनाथ काटजू को लिखा था, भारत का भविष्य बहुत हैड तक हिंदुओं के रुख़ पर निर्भर करता है। अगर हिंदुओं के आज के रुख में परिवर्तन नहीं आया तो भारत का भविष्य अंधकारमय ही रहेगा। मुसलमानों का रुख़, हो सकता है, और बुरा हो जाए किंतु इससे भारत के भविष्य पर अधिक असर नहीं पड़ता।

2. आज स्थिति यह है कि हम लोगों को ज़रा भी लज्जा नहीं कि व्यवहार में एक बात करते हैं किंतु संसद में दूसरी बात करते हैं। देश में चाहे कम्युनिस्ट हो, सोशलिस्ट हो या राष्ट्रवादी हो, किसने गांधी को याद रखा, किसने लोहिया को याद रखा, किसने जयप्रकाश को याद रखा? सब लोगों ने यह याद रखा कि सत्ता के गलियारे में कैसे पहुँचा जा सकता है।
कांग्रेस विरोध के नाम पर कई बार राजनेता इकट्ठे हुए। लोहिया ने कांग्रेस का विरोध किया, जयप्रकाश नारायण ने विरोध किया, मैं भी विरोधी रहा हूँ, लेकिन मुझे इस बात का फक्र है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई समझौता नहीं हुआ जिसका देश को मलाल हो। तब दुनिया हमारी अंतरर्राष्ट्रीय नीति से प्रभावित थी, अब समझौतों के चलते हमारा आत्मविश्वास इतना गिर गया है कि डिप्टी सेक्रेटरी स्तर का विदेशी अधिकारी हमारे देश में आकर हमें यह पाठ पढ़ाता है कि हमें देश-हित में क्या निर्णय लेना चाहिए।
-भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से बातचीत के पर आधारित किताब
'रहबरी के सवाल' से।

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