Wednesday, November 20, 2024

फेसबुक के पाठक

 फ़ेसबुक पर कुल क़रीब 3 अरब मतलब 300 करोड़ लोगों के खाते हैं। इनमें क़रीब 38 करोड़ भारत के लोग हैं।

इनमें कितने लोग रोज़ फ़ेसबुक देखते , पढ़ते और लिखते होंगे उनका ठीक हिसाब पता नहीं। दस प्रतिशत भी मान लें तो रोज़ क़रीब 30 करोड़ लोग फ़ेसबुक पर रोज़ अपडेट करते होंगे दुनिया भर में । भारत के लिए यह आँकड़ा चार करोड़ का मान लीजिए।
एक दिन में एक पाठक अमूमन चालीस-पचास-सौ पोस्ट देख सकता होगा। पच्चीस-तीस पढ़ लेता होगा।
किसी लोकप्रिय लेखक की कोई पोस्ट हज़ार-दो हज़ार लोग देख लेते होंगे। किसी पोस्ट का आँकड़ा और आगे बढ़ जाता होगा।
फ़ेसबुक आजकल पैसे , विज्ञापन वाली पोस्ट्स की वरीयता देता है।
लोगों को शिकायत है कि उनकी पोस्ट्स की रीच कम कर दी है फ़ेसबुक ने।
फ़ेसबुक हरेक की पोस्ट पढ़ता नहीं होगा। कोई चेक लगाए होंगे उसके हिसाब से पोस्ट्स नियंत्रित करता होगा।
कहने का मतलब है कि इस फ़िक्र न पड़ें कि कम पढ़ी जा रही है पोस्ट्स। लिखते रहें। आपका लिखा कभी न कभी पढ़ा जाएगा।
कभी न कभी पढ़ा जाने वाली बात इस तरह समझें कि मारख़ेज़ का उपन्यास ‘ एकांत के सौ वर्ष’ हमने पिछले साल पढ़ा। लिखे जाने के क़रीब पचास-साठ साल बाद। कई किताबें तो सदियों पहले लिखी गयीं , अभी उनको पढ़ा जाना बाक़ी है।
यह पोस्ट भी कुछ लोग अभी पढ़ लेंगे, कुछ आज , कुछ कई दिनों बाद। कुछ कभी नहीं पढ़ेंगे।
लेकिन हमारा मन था लिखने का तो लिख दिया। पोस्ट भी कर दिया।
ठीक किया न ?

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