Monday, November 25, 2024

यहाँ सुकून से हैं

 


सुबह चाय की तलाश में निकले। सड़क पर आवाजाही शुरू नहीं हुई थी। लोग घरों और घर के बाहर की दुकानों के बाहर झाड़ू लगाते और कनखियों से सड़क की तरफ़ देखते मिले।
एक चाय की दुकान वाला अभी दुकान सजा रहा था। बोला -‘आधे घंटे बाद मिलेगी चाय।’ हम आगे बढ़ गये।
आगे पुलिस हद्दफ़ पुलिस चौकी दिखी। चौकी के मुख्यद्वार पर सड़क पर ‘यह आम रास्ता नहीं है’ टाइप का बैरियर लगा था। सही बात है। पुलिस चौकी का रास्ता आम लोगों के लिए कहाँ होता है।
आगे एक पुलिया पर उद्घाटन पत्थर लगा था। माननीय मंत्री महोदय द्वारा पुलिया का उद्घाटन निवर्तमान सभासद की उपस्थिति में किये जाने की सूचना लगी थी। 2018 में।
शहर में हर सौ कदम पर किसी न किसी तरह के उद्घाटन की सूचना देते हुए बोर्ड लगे हुए हैं। उद्घाटन का हाल यह है कि जहां चार ईंट लगी वहाँ पत्थर लगा।
आगे एक सड़क किनारे चाय की दुकान दिखी। रहमत अली टी स्टाल । चाय वाले से पूछा -‘चाय ताजी है?’
‘चाय कोई चार-पाँच दिन पहले की थोड़ी होती है।ताजी ही मिलेगी। अभी बनायेंगे।’ कहते हुए चाय वाले ने चाय चढ़ा दी। हमको सड़क किनारे बेंच पर बैठने के लिए कहा। हम बैठ गये।
दीवार से लगी बेंच पर बैठे एक बुज़ुर्गवार चुनही तंबाकू रगड़ रहे थे। एक-एक रेशा बीनते-रगड़ते तंबाकू और चूने को मिला रहे थे। उनके चेहरे पर सफ़ेद दाढी उनके अनुभव के झंडे की तरह फहरा रही थी।
बुज़ुर्गवार ने अपनी उम्र बताई 85 नाम नबी। रहमत अली उनके भतीजे हैं।
नबी जी ने बताया कि बटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान चला गया था। वहाँ रहने के लिए उन पंजाबी लोगों के मकान मिले थे जो पाकिस्तान से हिंदुस्तान आ गये थे। बढ़िया नये मकान। लेकिन वहाँ मन नहीं लगा। सबकी ज़मीन -जायदाद यहीं थीं। लिखा-पढ़ी करके वापस आ गये। बहन वहीं रह गयीं। कुछ दिन पहले बहनोई का इंतक़ाल हुआ है। खबर आयी थी। वीसा बना है लेकिन जा नहीं पाए।
बचपन में पाकिस्तान में कुछ ही दिन रहे। लेकिन कराची के मीठे अंगूरों की याद ताज़ा है ज़ेहन में।
पाकिस्तान की बात चली तो बोले-‘ वहाँ सब आपस में लड़ते रहते हैं। हम यहाँ सुकून से हैं। ख़ासकर शाहजहांपुर की बात और अलग। यहाँ ग़लत बात पर लड़ने पर साथ के लोग टोंक देते हैं। अच्छा किया जो हम वापस लौट आये।’
घर परिवार की बात भी की। बताया -‘पाँच बच्चे हैं।लेकिन उन बच्चों के दो-दो बच्चे ही हैं। सब अपना-अपना काम करते हैं।’
देश की बात चली तो देश-प्रदेश की बागडोर थामे लोगों के बारे में बोले -‘दोनों के आगे पीछे कोई है नहीं। परिवार का उनको अंदाज़ा ही नहीं। उसी हिसाब से बात करते हैं।’ आगे वे बोले -‘ गंजा अपने बाप के मरने पर काम-काज में भी नहीं गया।’ हमको लगा देश का आम आदमी अपने नेताओं के बारे में किस तरह सोचता है यह उससे बात करके ही पता चलता है।
चाय पीकर चलने के पहले दुकान का फ़ोटो लिया। फ़ोटो जूमकर दिखाई। देखकर नबी जी बोले -‘ शुभानल्लाह। ‘

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