Tuesday, July 21, 2026

तैराकी का रोजनामचा


 आज मंगलवार है। हमारा पूल बंद रहता है। दूसरे पूल गए तैरने। पानी बरस रहा था। हल्का-हल्का। हौले-हौले। अपन साइकिल पर निकल लिए।  तैराकी वाला चश्मा, कैप एक और साइकिल की चाबी एक मोमिया में धर ली। स्वीमिंग के बाद बदलने के लिए कपड़े नहीं रखे। बेकार भीगते लौटते समय। बैग भी इसीलिए छोड़ दिया। सोचा बारिश में भीगते हुए लौटेंगे। पैडल पर पैर धरने के पहले घड़ी में साइकिल मोड ऑन कर लिया था। 

रास्ते में लोग रोज़ के अंदाज़ में आते -जाते दिखे। एक बालिका  सामने से मोपेड पर मुस्कराती चली आ रही थी। हमने सोचा पता नहीं क्या सोच कर मुस्करा रही होगी। बाद में देखा कि वह कान में स्पीकर लगाए मोबाइल पर किसी से बतिया रही थी। उसकी बातचीत उसकी मुस्कान की जननी थी। 

पूल पहुँचकर साइकिल में ताला में लगाया। घड़ी को साइकिलिंग मोड से हटकर स्वीमिंग मोड में किया। घड़ी में साइकिलिंग का हिसाब देखा। 2.09 किलोमीटर की दूरी 13.27 मिनट में तय की। 36 किलोकैलोरी ऊर्जा खर्च हुई। औसत हृदयगति 87 धड़कन प्रति मिनट। 

पूल किनारे पूल मैनेजर कुर्सी पर बैठा था।पूल की एक दिन की फीस दो सौ रुपए है। हमने पाँच सौ रुपए जमा किए। डिटेल बताया दो हफ्ते पहले वाला ही है। उसने दुबारा फ़ार्म नहीं भरवाया। हम आठ बजने में दस मिनट पहले पूल में उतर गए। कुछ लोग तैर रहे थे पूल में। हम भी शुरू हो गए। 

तैरते हुए हाथ और पैर के मूवमेंट देखें गए वीडियो के हिसाब से चलाने लगे। हाथ तो ठीक चले। आइसक्रीम निकालने की तरह हाथ घुमाने की कोशिश करते रहे। ध्यान हाथ में रखने में पैर आवारा हो गए। दूर-दूर। सर उठाकर साँस लेने की कोशिश की। कई बार सफल हुए। कभी असफल। देखें गए वीडियो से अपनी तैराकी की कॉपी भी जांचते रहे। हाथ घुमाकर नीचे करते हुए सर उठाना चाहिए। लेकिन अक्सर ऐसा होता रहा कि सर पहले उठ गया। जब तक हाथ पीछे होता, ऊपर की तरफ़ धक्का लगता तबतक सर पानी में डूब चुका होता। हर बार लगता  तैराकी समय का खेल है। इतने दिन कि सीख का हासिल यह हुआ जब भी कोई मूवमेंट ग़लत होता, पता चल जाता। उसको निरस्त करके फिर तैरने लगते। 

पूल में एक बालक था कोचिंग के लिए। शिवम नाम। उसने मेरे मूवमेंट देखकर कहा -'  ठीक कर रहे हैं। लेकिन सर थोड़ा और ऊपर उठाइये। साँस लीजिए।' हमने कहा -'वही कोशिश कर रहे हैं।'

तैरते हुए हाथ से पानी पीछे करने के बाद हाथ आगे ले जाने होते हैं। हाथ इस तरह आगे ले जाने होते हैं मानो हथेली में रखी हुई कोई किताब पढ़ रहे होंगे। हमने हाथ आगे करते हुए हथेली में रखी हुई कई किताबें पढ़ीं। अभी पढ़ी/देखी  जा रही तमाम किताबों के कवर पेज हथेली में रखे महसूस किए। मारखेज की लव एट द टाइम ऑफ़ कालरा, डायना नायड की Find a way, कृष्ण बलदेव वैद की बदचलन बीबियों का द्वीप, ब्रजेश क़ानूनगो की घर बैठे घुमक्कड़ी, जोसफ हेलर कि कैच 22, श्रीलाल शुक्ल की रागदरबारी, जेरी पिंटो की एम और हूम साहब,  प्रभात गोस्वामी की लिखने छपने के टोटके, अतुल चतुर्वेदी की व्यंग्य आलोचना के विविध आयाम  कविताओं का संग्रह घर लौटने का सपना। ये सब किताबें अभी बिस्तर के पास हैं। अक्सर उलटते-पलटते हैं। पढ़ते हैं। इसलिए इनके नाम लिख दिए। बाक़ी की ऊपर पढ़ने के कमरे हैं जहाँ जाना रोज़ स्थगित हो जाता है।

तैरते हुए कभी-कभी मूवमेंट एकदम वीडियो के हिसाब से हो जाता।  सर पानी में अच्छे से ऊपर उठता।पानी शरीर को झुला सा झुलाते हुए ऊपर उठाता। पाँव के मूवमेंट भी मेढक की तरफ़ हो जाते। हाथ पूरे आगे फैलते। ग्लाइड अच्छा होता। शरीर का संतुलन बढ़िया हो जाता। लगता बस अब सीख गए। पानी के ऊपर सीधे लेटे हुए वे क्षण अनिर्वचनीय लगते। एहसास हुआ कि तमाम लोग क्यों घंटों पानी में तैरते रहते हैं। 

कभी पानी में सांस छोड़ने पर नीचे से आने वाली बूँदें चेहरे से टकराती तो लगता पानी ने हमको हमारी साँस का रिटर्न गिफ्ट दिया है। बूँदे पानी के फूल हैं। हमको तैरते देखकर पानी हमारे ऊपर अपने फूलों की वर्षा कर रहा है। पानी की बूँदें ही उसके फूल हैं। जिसके पास जो होगा वही तो देगा। वही उसका उपहार होगा। अमेरिका के बारे में लिखते परसाई जी  ने लिखा है -' अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं।बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते है,सभ्यता बरस रही है।'

इसी तर्ज पर अब देश में कहीं बुलडोजर चलता है तो भक्त लोग कहते हैं -'कानून का शासन स्थापित हो रहा है।' बुलडोजर का काम सड़क बनाना माना जाता था। निर्माण में सहयोग का था। अब इसका मुख्य काम अब निर्माण नहीं विध्वंस हो गया है। पार्टी बदल ली है उसने भी। उसका हृदयपरिवर्तन हो गया। क्या पता इसके लिए उसे भी किसी पद का लालच दिया गया होगा। कहीं प्रदर्शन करने वालों पर आँसू गैस और लाठी चार्ज लोकतंत्र की स्थापना बताई जाती है। कहीं हुआ बड़ा भ्रष्टाचार विकास का बढ़ता कदम हो गया। बहुत तेज गति है विकास की आजकल। झूठ बोलना कभी पाप माना जाता था। अब हर झूठ मास्टरस्ट्रोक की संज्ञा पा चुका है। इसे कोई अंध भक्तअमृतकाल बतायेगा। कोई भगवान भक्त माला फेरता हुआ कहता होगा -' हे प्रभो, कब लोगो अवतार।'

घंटे भर से ऊपर तैरने के बाद पूल से बाहर आए। घड़ी का तैराकी मोड बदलकर फिर साइकिलिंग वाला किया। इसे बीच पूल रिपोर्ट बता रही थी कि अपन सवा घंटा पानी में रहे। इस बीच 358 किलोकैलोरी ऊर्जा फूँक दी। 420 मीटर तैरे। दिल एक मिनट में 84 धड़कन के हिसाब धड़का। कोच ने कहा -' प्रैक्टिस करते रहे। जल्दी ही सीख जायेंगे।'

पाँच सौ रुपए के छुट्टे नहीं थे पूल वाले के पास। उसने मुझसे नम्बर पूछकर मेरे मोबाइल में भेज दिए। हम पैडलियाते हुए घर वापस आ गए। लौटते में दूरी वही रही लेकिन दिल की धड़कन 90 रही। ऊर्जा की खपत हुई 35 किलो कैलोरी।

स्वीमिंग पूल में तैरते हुए किताब पढ़ने के अभ्यास के बाद अब वास्तव में किताब पढ़ने जा रहे। शुरुआत 'लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा' से करेंगे। दोपहर बाद फ़िल्म देखेंगे- "आइस वाइड ओपन"। आधी देख चुके हैं कल। आप कौन सी किताब पढ़ रहे हैं? कौन सी फ़िल्म देख रहे हैं?







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