Saturday, March 04, 2017

पंचबैंक-2


ईमानदार आदमी
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1. ईमानदार आदमी जिस दल में होता है, उसी दल की आलोचना करता है और तब तक करता रहता है जब तक उसे धक्का मारकर पार्टी से निकाल नहीं दिया जाता है।
2. ईमानदार आदमी का स्वागत अगर अफ़सर करता है तो दफ़्तर के प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती हैं।
3. दफ़्तर हमेशा अफ़सर से बड़ा होता है, जैसे पार्टी हमेशा मुख्यमंत्री से बड़ी होती है।
4. अफ़सर को हमेशा बाबू की टिप्पणियों से संतुष्ट होना पड़ता है। जब कभी कोई अफ़सर बाबू की टिप्पणियों से संतुष्ट नहीं होता तो वह किसी फ़ाइल में फ़ंस जाता है या फ़िर उसका तबादला हो जाता है।
5. मंत्री बेईमान आदमियों को संरक्षण देता है , क्योंकि वे उसे चुनावी चंदा देते हैं। उसके लिये दलाली करते हैं।
6. इस देश में कोई मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में फ़ंसे , तो समझ लो उसके स्टॉफ़ में कोई ईमानदार आदमी है।
7. ईमानदार आदमी दूर से पहचाना जा सकता है। जल्दी पहचान होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि ईमानदार आदमी देश में गिने-चुने हैं।
Arvind Tiwari जी के व्यंग्य संग्रह ’मंत्री की बिन्दी’ से|

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