Sunday, March 26, 2017

आरिफ़ा एविस के व्यंग्य संग्रह ’शिकारी का अधिकार’ के कुछ पंच



आरिफ़ा एविस हिन्दी व्यंग्य के सबसे नयी लेखिकाओं में हैं। उनका पहला व्यंग्य संग्रह ’शिकारी का अधिकार’ पिछले साल प्रकाशित हुआ। आरिफ़ा के व्यंग्य संग्रह ’शिकारी का अधिकार’ के कुछ पंच यहां पेश हैं:
1. “वो बच्चे जिन्होंने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी और वो बच्चे जो स्कूल सिर्फ एक वक्त के खाने के लिए भिखमंगे बना दिए गये है अगर वे भारतमाता कि जय नहीं बोलेंगे तो कौन बोलेगा।“
2. “ अगर किसी को ज्यादा प्यास सता रही है तो कोका कोला पी लो। देश की प्यास बुझाने के लिए सभी नदियों को एक-एक कर बेचा जा रहा है जब पानी ही देश का नहीं होगा तो पानी की लड़ाई भी अपने आप खत्म हो जाएगी। “.
3. देशभक्ति को समय-समय पर परखते रहना चाहिये क्योंकि लोग बहुत चालाक हो गये हैं।
4. राष्ट्रवाद तो हर व्यक्ति के डीएनए में होना चाहिये।
5. भारत माता की जय बोलो नौकरी की समस्या अपने आप दूर हो जायेगी।
6. वो बच्चे जिन्होंने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी और वो बच्चे जो स्कूल सिर्फ़ एक वक्त खाने के लिये भिखमंगे बना दिये गये हैं, अगर वे भारतमाता की जय नहीं बोलेंगे तो कौन बोलेगा?
7. भारत माता की जय बोलकर देशी-विदेशी कम्पनियों को उनकी हर मांग को पूरा करते हुये किसानों की जमीन लेकर देनी चाहिये।
8. सामाजिक विकास बोले तो भीड़ का उन्माद, सांस्कृतिक विकास बोले तो प्राचीन सामन्ती विचारों को थोपना। आधुनिकता का विकास बोले तो मुनाफ़े में सब कुछ तब्दील कर देना।
9. पुल बनाया ही इसलिये जाता है ताकि पुल बार-बार बन सके।
10. आज पुल गिरा, कल किसी ने आत्महत्या कर ली, परसों खदान गिरी। यहां इमारत गिरी, वहां छत धंसी, यह सब तो होता रहता है। ये तो प्रकृति का नियम है, एक न एक दिन तो सबको जाना ही है।
11. नागनाथ और सांपनाथ में एकता हो चुकी है। दोनों मिलकर जंगलकानून को पूरी ईमानदारी , मेहनत और लगन से लागू करेंगे, चाहे इसके लिये कितना भी खून बहाना पड़े।
12. सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही सुन्दर है, सत्य ही शिव है। सच बोलो, सच के साथ खड़े हो जाओ। न्याय की बात करना जंगलराज में कानूनी अपराध है।
13. “जंगलीकानून को जन्मजात माना जाये .....शेर बकरी को खाता है, बकरी घास को खाती है.....यही सच है.... यह सदियों से चला आ रहा है। अतः इसको कोई भी राजा के रहते छीन नहीं सकता। सियार और भेड़ियों को अपने इलाके में शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार है।“
14. समस्या को सहन करो पर चूं न करो। गर चूं करी तो बिना कुछ लिये दिये आपको दूसरे घर की नागरिकता मिल जायेगी।
15. पड़ोसियों से घर तब तक नहीं बच सकता जब तक कि एक-दूसरे के प्रति गुस्सा बरकरार न हो।
16. जब आप एक गुलाम घर में रहते हो तो गुलामों की तरह रहो, घर के मुखिया की तारीफ़ करके अपने कर्तव्यों का पालन करो और खुश रहो।
17. देश के लिये बिकना हर किसी के बस की बात नहीं। जिसकी कीमत होती है वही तो बिक सकता है। बिके हुये देशभक्त ही सरकार की तमाम समस्याओं का एकमात्र समाधान हैं।
18. क्रिकेट देशभक्ति का उच्चतम प्रतीक है।
19. अगर कोई किसान पानी के नाम पर देशभक्ति में बाधा डालने की कोशिश करेगा तो देशभक्ति को बनाये रखने में धारा 144 पूरी मदद करेगी।
20. देश की प्यास बुझाने के लिये सभी नदियों को एक-एक करके बेचा जा रहा है। जब पानी ही देश का नहीं बचेगा तो पानी की लड़ाई भी अपने आप खत्म हो जायेगी।
21. इश्क करने वाले प्रेमी जोड़ों को भाई-बहन बनाकर भी प्यार को जिन्दा रखा जाये। ससुर को पति और पति को बेटा बनाने का गुण तो कोई इश्क के ठेकेदारों से सीखे।
22. इश्क ही करना है तो अपने वतन से करो, अपनी जाति, अपने धर्म से करो। इंसानों से क्या इश्क फ़रमाना।
23. दूसरे वतन से नफ़रत करे बिना देशप्रेम भी कोई प्रेम है। देशप्रेम को बरकरार रखने के लिये खून की होली भी खेलनी पड़े , तो भी कम है।
24. अब सब इंसानों से इश्क करने लगेंगे तो ये ऊंच, नीच, अमीर-गरीब, संस्कृति कौन बरकरार रखेगा?
25. लड़कियां घरवालों पर बोझ नहीं होतीं तभी तो 16 पार होते ही शादी करा देते हैं।
26. काम करना तो जन्मसिद्ध अधिकार है उनका। घर हो या बाहर सारे काम महिलायें ही करेंगी।
27. जितना धुंआ इनके (गरीबों के) चूल्हों से निकलता है उससे कई गुणा फ़ैक्ट्री या कम्पनी से निकलता है पर एक सर्टिफ़िकेट सब ठीक कर देता है। नदियां तो नहाने-धोने या जानवरों के नहलाने से प्रदूषित होता है, फ़ैक्ट्रियों के गन्दा पानी डालने से नहीं।
28. जिस फ़िल्म पर प्रतिबंध लगा हो वह हिट न हो , ऐसा कैसे सम्भव हो सकता है।
इस व्यंग्य संग्रह में 17 लेख संग्रहीत हैं। इसकी भूमिका आप यहां पढ सकते हैं।
पुस्तक: शिकारी का अधिकार
लेखिका-आरिफ़ा एविस
पृष्ठ -64
कीमत -30 रुपये
प्रकाशक: लोकमित्र प्रकाशन, दिल्ली


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