Monday, March 06, 2017

पंचबैंक-3

आज कुछ पंच Suresh Kant जी के उपन्यास ’ब से बैंक’ से। उपन्यास के बारे में इस कड़ी पहुंचकर बांच सकते हैं https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10208422208886252
1. इन कुत्तों को देखकर यह निष्कर्ष बडी आसानी से निकाला जा सकता था कि अपने देश में मनुष्यों का जीवन स्तर निम्न और कुत्तों का उच्च है।
2. यों तो गैर-कानूनी काम अपने देश में बुरा नहीं समझा जाता, और फ़लस्वरूप अनेकानेक गैर कानूनी काम यहां बाइज्जत संपन्न किये जाते हैं।
3. दफ़्तर में यूनियन इसलिये होती है कि ज कोई कर्मचारी मैनेजमेंट को गालियां सुना आये तो उसे मैनेजमेंट के षड़यंत्रों से बचाया जा सके।
4. सभ्य आदमियों को घृणा करने का शौक होता है। नित्य प्रति उन्हें कोई न कोई सामग्री ऐसी मिलती रहनी चाहिये, जिससे कि वे घृणा कर सकें, अन्यथा उनका स्वास्थ्य खराब होने का अंदेशा रहता है।
5. और यह सब मैनेजर की नाक के नीचे होता था, जिससे कि अनुमान लगाया जा सकता है कि मैनेजर की नाक कितनी लंबी थी।
6. मैनेजमेंट का जो आदमी फ़ालतू हो जाता है, उसे मैनेजर बना दिया जाता है।
7. मैनेजमेंट की नजरों में वही कर्मचारी ज्यादा काम करता है जो दफ़्तर में देर तक बैठा रहे, फ़िर चाहे वह सारा समय हाथ पर हाथ धरे ही क्यों न बैठा रहे।
8. इतना सब होने के बावजूद वहां कोई फ़्राड नहीं होता था, तो यह ब्रांच के दुर्भाग्य के अलावा अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता था।
9. ईमानदार वे इतने अधिक थे कि अध्यापिकाओं को जितना वेतन देते थे, ठीक उससे दुगुने पर ही हस्ताक्षर करवाते थे।
10. प्रेम खेत में नहीं पैदा होता और न ही ब्लैक में मिलता है। इसे पाने के लिये तो सिर तक देना पड़ता है और यही कारण है कि सच्चे प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्राप्त करने के लिये अपनी पत्नी का सिर तक दे डालते हैं।

https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10210737344203188

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