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Tuesday, October 29, 2019
व्यंग्य यात्रा के बहाने
Monday, October 28, 2019
ठेलिया पर दिए, हाथ में अधखाई मिठाई
Sunday, October 20, 2019
हिजली बंदी ग्रह एक बेहतरीन राष्ट्रीय स्मारक
खड़गपुर आईआईटी में सुबह डॉ. राजीव रावत के साथ टहलने निकले। उनके झोले में चाय का थरमस और कप थे। संगत के लिये बिस्कुट भी। खड़गपुर का विशाल परिसर कार में टहलते हुये देखा। फ़िर एक जगह उतर कर फ़ुटपाथ पर चाय की अड्डेबाजी हुई। सामने सूरज भाई चहकते हुये दिखे। उनको भी चाय आफ़र की गयी। वे खुश होकर और चमकने लगे।
Friday, October 18, 2019
खड़गपुर आईआईटी में 36 साल बाद
कल आईआईटी खड़गपुर पहुंचे। राजभाषा विभाग में एक कार्यक्रम के सिलसिले में। आना तो आलोक पुराणिक जी को भी था लेकिन पता नहीं कैसे उनके दिमाग से इस आयोजन की तारीख फिसल गई। उन्होंने अपने विद्यालय में एक कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई। उसका जिम्मा भी उनके ही सर माथे आया। लिहाजा उनकी टिकट कैंसिल करवानी पड़ी।
खड़गपुर आई आई टी में राजभाषा कार्यक्रम
खड़गपुर आई आई टी के मुख्य द्वार पर कार्यक्रम के बैनर। बैनर बता रहा है कि आलोक पुराणिक जी Alok Puranik को भी यहां आना था। ख्यातिलब्ध साहित्यकार के दिमाग से यह सूचना फिसल गई। उन्होंने अपनी झकास ऊर्जा के चलते कोई दूसरा कार्यक्रम 'सकर' लिया जिसके पीर, बाबरची, भिस्ती, ख़र सब वही हैं। लिहाजा उनका यहां आना रह गया। बच्चों का नुकसान हुआ।
सूरज की मिस्ड कॉल पर ब्लॉगर साथी राजीव तनेजा के विचार।
Saturday, October 12, 2019
कमलेश पांडेय को ज्ञान चतुर्वेदी सम्मान की बधाई
आज कमलेश पांडेय को वलेस घराने का तीसरा ज्ञान चतुर्वेदी मिलना है। महाकाल की नगरी उज्जैन में। इसके साथ ही कमलेश जी वरिष्ठ व्यंग्यकार भी हो गए। इस सम्मान के लिए कमलेश जी को बधाई।
Tuesday, October 08, 2019
मस्जिद की दीवार पर संस्कृत
Saturday, October 05, 2019
बर्फ़ सड़क खा जाती है
भारत के आखिरी गांव थांग से लौटते हुये शाम हो गयी थी। तसल्ली से आराम किये। गेस्ट हाउस में खान-पान का चौकस इंतजामा। मौसम खुशनुमा।
सुबह पैंगोंग लेक जाना तय था। ड्राइवर ने जल्दी निकल लेने की बात कही। देर होने पर सूरज की रोशनी में बर्फ़ पिघलकर सड़क खा जाती है। रास्ता रुक सकता है। पानी के बहाव से सडक कट जाने की बात तो सुनी थी। लेकिन पिघली हुई बर्फ़ द्वारा सड़क खा जाने की बात पहली बार सुनी। रास्ते में कई जगह देखा भी। पिघली हुई बर्फ़ सड़क खा गई थी। बगल के रास्ते से पत्थरों के बीच से आगे निकले।
मुरमुथ दर्शन के बाद हम लोग पैंगोंग झील की तरफ़ बढे। कुछ देर में पहुंच भी गये वहां। भारत, तिब्बत और चीन के बीच पसरी हुई लेक झील लगभग 134 किमी लम्बी है। जाड़े में झील जम जाती है। झील का पानी एकदम साफ़ । सर्फ़ एक्सेल से धुला हुआ सा। अपनी खूबसूरती का एहसास था शायद पानी को। इसीलिये वह इठलाते हुये झील में लहरा रहा था।
Saturday, September 21, 2019
'घुमक्कड़ी की दिहाड़ी' को वर्ष 2018 का गुलाब राय सर्जना पुरस्कार
मेरी किताब 'घुमक्कड़ी की दिहाड़ी' को उप्र हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2018 के गुलाब राय सर्जना पुरस्कार के लिए चयनित होने की सूचना मिली। इस पर 40000/- का इनाम मिलेगा। यह पुरस्कार निबन्ध विधा में है।
Saturday, September 14, 2019
हिन्दी दिवस के कुछ अनुभवों से
Thursday, September 12, 2019
बस निकल लो गुरु आगे जो होगा देखा जाएगा
लेह से भारत के आखिरी गांव थांग तक के रास्ते में कई बाइकर्स मिले। मोटरसाइकिल पर धड़धड़ाते जाते। खरदुंगला पास पर भी कई टोलियां मिलीं। उनमें कुछ लड़कियां भी थीं। इन बाइकर्स को देखकर लगा कि यही असल जिंदगी यही है, घूमना। यायावरी, घुमक्कड़ी। बाकी तो सब ऐं-वैं ही है।










