यह फोटो हमारे मित्र Rajeev Sharma ने भेजते हुए अपन से मजे लिए -'अगर इस फोटो में (डॉ शुक्ला का) इश्तहार न होता तो यह इमारत लन्दन में किसी जगह की इमारत लगती।'
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10222516483874318
यह फोटो हमारे मित्र Rajeev Sharma ने भेजते हुए अपन से मजे लिए -'अगर इस फोटो में (डॉ शुक्ला का) इश्तहार न होता तो यह इमारत लन्दन में किसी जगह की इमारत लगती।'
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आज अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का जन्मदिन है। उनकी याद को नमन करते हुए उनके जीवन से जुड़े किस्से यहां पेश हैं। कैसी विषम परिस्थियों में जिये हमारे क्रांतिकारी।
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इस मां के संकट के उन दिनों को बिस्मिल की बहन श्रीमती शास्त्री देवी के शब्दों में देखिए-"पिताजी की हालत दुख से खराब हुई। तब विद्यार्थी जी पन्द्रह रुपये मासिक खर्च देने लगे। उससे कुछ गुजर चलती रही। फिर विद्यार्थी जी भी शहीद हो गए। मुझे भी बहन से ज्यादा समझते थे। समय-समय पर खर्चा भेजते थे। माता-पिता, दादा, भाई, दो गाय थीं। रहने के लिए हरगोविंद ने एक टूटा-फूटा मकान बता दिया था, उसमें गुजर करने लगे। वर्षा में बहुत मुसीबत उठानी पड़ी। फिर पांच सौ रुपये पंडित जवाहरलाल जी ने भेजे। तब माता जी ने कहा कि कुछ जगह ले लो। इस तरह के दुख से तो बचें।
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ज्ञान चतुर्वेदी जी का नया उपन्यास स्वांग पढ़ा। पिछले हफ्ते मंगाया। लगकर पढ़ गए तीन-चार दिन में। 384 पेज का उपन्यास 3-4 दिन में पढ़ लिया जाए यह अपने आप में उसके रोचक, मजेदार और पठनीय होने का प्रमाण है।
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इंसान के व्यक्तित्व का एक हिस्सा होता है जो हमेशा प्रेम को अस्वीकार करता है। यह वह हिस्सा होता है जो नष्ट होना चाहता है। ऐसे हिस्से को हमेशा अनदेखा/माफ किया जाना
आजकल खबरों में सच और झूठ , अफवाह और वास्तविकता इस कदर घुली मिली है कि असलियत पता नहीं चलती। लुटने वाला चोर साबित हो रहा है, जिसको जुतियाया जाना चाहिए उसकी जय बोली जा रही है। यह सब क्या है -'हमारे एक मित्र भन्नाते हुए बोले।'
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"जब एक आदमी पागल हो जाता है तो उसे पागलखाने में बंद कर देते हैं और जब पूरी कौम पागल हो जाती है तो ताकतवर कहलाने लगती है।"
बहुत दिन से लिखना स्थगित है। इस बीच कोरोना का हल्ला इतना रहा कि हर तरफ बस कोरोना ही कोरोना। कई मित्र, जान पहचान वाले और उनके परिवारी जन 'शांत' हो गए। कुछ इलाज शुरू होने में देरी से गये, कुछ गलत इलाज से, कुछ डर से। एक की पत्नी ने बताया कि ये तमाम तरह के वीडियो देखकर दहशत में आ गए। बीपी कम हो गया। नहीं रहे।
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मरने में मरने वाला ही नहीं मरता
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*किसी शहर से परिचित होने के लिए शायद सबसे आसान तरीका यह है कि यह जानने की कोशिश की जाए कि उसमें रहने वाले लोग किस तरह काम करते हैं, किस तरह प्यार और मुहब्बत करते हैं और किस तरह मरते हैं।
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*इंसान को मुसीबतजदा लोगों की तरफ से जरूर लड़ना चाहिए, लेकिन अगर वह लड़ाई के सिवा हर चीज में दिलचस्पी लेना बंद कर दे तो लड़ाई का क्या फायदा?
मेरी तमाम ऐसी 'रचनाएं' भी हैं, जो मैं अपने मानस पटल पर ही लिखकर खुश हो गया, कागज पर उतारी नहीं। एक जमाना था कि इस तरह सोची हुई रचनाएं भी बोलकर सुना डालता था। खैर, अब तो आलम यह है कि बात करते-करते यह भी भूल जाता हूँ कि बात किस प्रसंग से शुरू की थी और उसे किस ओर ले जाना चाहता था। जो रचनाएं मैंने शुरू भी कीं, उनमें से भी ढेरों ऐसी हैं , जिन्हें मेरी अन्य व्यस्तताओं ने या मेरे भीतर बैठे आलोचक ने पूरा होने ही नहीं दिया।
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