Thursday, May 10, 2018

विकास से मुलाकात

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, खा रहे हैं, बैठे हैं और भोजन
विकास -आंखों में रंगीन नजारे, सपने बड़े -बड़े
दो हफ्ते पहले मुलाकात हुई विकास से। एक मांगलिक कार्यक्रम में। चिल्ला गरम करके खिला रहे थे। देर से पहुंचे थे अपन तो भीड़ छंट गयी थी। हर 'स्टॉल' पर ट्रैफिक क्लियर था। अपन पाव भाजी वाली खाते हुए 'चिल्ला स्टॉल' वाले विकास से बतियाने लगे।
इंटर में पढ़ने वाले वाले विकास छुट्टियों में काम पर लग गए। 300/- रुपये मिलेंगे तंबू उखड़ने के बाद। शायद मध्यम वर्गीय परिवारों के विदेश जाने वाले बच्चे भी ऐसे ही 'पार्ट टाइम जॉब' करते हों।
घर में भाईओं में बड़े विकास के पापा भी ऐसे ही ' चुटुर-पुटूर ' काम करते हैं। अम्बेडकर नगर में रहते हैं। खाली थे तो चाचा ने कानपुर बुला लिया। सहालग में कुछ कमाई हो जाये।
आर्ट साइड के विकास को स्केचिंग ड्राइंग में रुचि है। हमेशा बनाने का मन करता है। बढिया स्केच बनाते हैं। गुरुजी तारीफ करते हैं लेकिन बरजते भी रहते हैं -'दिन भर ड्राइंग न बनाया करो। पढ़ना-पास होना भी जरूरी है।'
हर जगह पास होने के चक्कर में कित्ती जगह फेल होते रहते हैं हमको अंदाज ही नहीं लगता। सच का पता लगते बहुत देर हो जाती है। कन्हैयालाल बाजपेई गीतकार जी का गीत है :
"आधा जीवन जब बीत गया,
वनवासी सा रोते गाते
तब पता चला इस दुनिया में
सोने के हिरन नहीं होते।"
गुरुजी की समझाइस के हिसाब पढ़ते हुए और पार्ट टाइम जॉब करते हुए विकास आगे क्या करेंगे यह बहुत साफ नहीं है। आईटीआई करने की भी बात है। देखिये क्या करते हैं।
हमने स्केच देखने की इच्छा जाहिर की तो बताया कि अपने फेसबुक खाते में पोस्ट किए हैं उन्होंने। खाते का पता बताया लेकिन हम खोज नहीं पाये। फोन पर पूछा तो फिर बताया कि दो खाते हैं एक 'विकास' नाम से दूसरा 'विकास शर्मा' के नाम से।पहले वाले का पासवर्ड खो गया था तो दूसरा बनाये थे। फिर खोजे फिर भी नहीं मिला। लगता है नाम का लफड़ा है। जिस विकास को खोजते हैं ,मिलता नहीं।
अगले दिन कलेट्टरगंज के एक मांगलिक कार्यक्रम में 'चिल्ला स्टॉल' पर थे। हमने पूछा -'आएंगे तो खिलाओगे चिल्ला?'
बोले -'अरे सर, यह भी कोई पूछने की बात है। आइये खिलाएंगे।'
अभी तक विकास के स्केच नहीं मिल पाए। मिलेंगें तो दिखाएंगे। आज पता नहीं किधर हो बालक। अभी उसकी फोटो देखी तो उसकी बातें याद आईं। मासूमियत से भरी आत्मीय मुस्कान।
इस बीच देश में विकास की खोज का हल्ला मचे तो आप कह सकते हैं वो वाले विकास का तो पता नहीं लेकिन एक विकास मांगलिक कार्यक्रमों में 'चिल्ला स्टॉल' पर खड़ा चिल्ला गरम कर रहा है।
अपडेट : अभी बात हुई विकास से। स्कूल जा रहे थे। स्केच के लिए बोले -'स्कूल से घर वापस होकर भेजेंगे। '
कोई विकास का पता पूछे तो आप निशाखातिर होकर कह सकते हैं -'अभी विकास स्कूल गया है।' 

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