Sunday, May 13, 2018

दुनिया एक हसीन झांसा

कबूतर आ आ आ, दाना-पानी पा

सुबह बिल्ली के बच्चे को खिला-पिलाकर, दवा-दारू करके निकले। ये बिल्ली का बच्चा भी अच्छा पल्ले पड़ा। सुबह-सुबह जितनी इसकी देखभाल करनी पड़ती उतनी दिन भर खुद की कर पाते तो हीरो कहलाते। रोज सेल्फी चिपकाते।
बच्चे की दो टांगे सलामत हैं। चौथी अभी खराब है। तीसरी टांग सलामत और खराब टांगो को एक जैसा समर्थन देते हुए निर्गुट सरीखी है। नतीजतन बच्चा ढाई टांग पर सरपट भागता है। टांग टूटी हुई है लेकिन मौका बाहर निकलते ही जमीन पर मस्त लेटकर ऐसे अंगड़ाई लेता है गोया यह भी 'दम बनी रहे, घर चूता है तो चूने दो' घराने का जीव है।
माल रोड चौराहे पर एक लड़का कार से उतरकर कबूतरों को दाना खिला रहा था। पास में कई मिट्टी के बर्तनों में उनके लिए पानी रखा था। दिन पर दिन होती पानी की कमी के चलते लगता नहीं कि वह दिन दूर है जब इंसान पानी पीने के लिए तरस जाएगा।
बिरहाना रोड पर एक तांगे वाला दिखा। जवान घोड़ा बूढ़े , थकेले तांगे वाले के साथ ऐसे लग रहा था मानो किसी युवा मैनेजर ने डूबती कंपनी ज्वाइन कर ली हो। आगे दो घोड़ों पर उनके सवार, स्कूटरों पर महिलाओं वाले आसन में, बैठे दुलकी चाल से चले जा रहे थे।
चटाई मोहाल में लोग सड़क पर चटाई बिन रहे थे। वहीं पास में एक आदमी आधे तख्त पर स्टोव धरे चाय की दुकान लगाए बैठा था। न जाने कितनी दुकान सड़क घेरकर चलती हैं। सड़क यातायात का साधन होने के साथ रोजगार का भी जरिया है। कल को अगर सड़क पर चलने के अलावा बाकी काम प्रतिबंधित कर दिए जाएं तो न जाने कितने लोग भूखे रह जाएंगे।
सड़क पर जगह-जगह बच्चे अपने-अपने हिसाब से स्टम्प लगाए क्रिकेट खेल रहे थे। एक जगह तो स्टम्प पिच के बराबर चौड़ा था।
चित्र में ये शामिल हो सकता है: एक या अधिक लोग, लोग खड़े हैं, बच्चा और बाहर
पंकज बाजपेयी तथाकथित डबल मर्डर करने वाले के साथ
तिवारी मिष्ठान भंडार से पंकज बाजपेयी के लिए जलेबी , दही समोसा ली। पंकज इन्तजार कर रहे थे। मिलते ही बोले -'लोग तुम्हारा मर्डर करना चाहते हैं। बहुत मर्डरर पीछे पड़े हैं। रजोल से बचकर रहना।'
हमने कहा -'तुम हो न हमारी रक्षा के लिए। बचाओगे। '
वो बोले -'हां, तुम चिंता न करना। हम सबको पकड़वा देंगे।'
फिर मिठाई वाले की शिकायत किये कि उसने बर्फी नहीं खिलाई। हमने कहा -'हम खिलाएंगे आज। '
हमने पूछा -'पिछले इतवार तुम्हारे घर गए थे। तुम तो कह रहे थे कि कमरे में रहते हो। लेकिन तुम्हारा सामान तो जीने में रखा था।'
बोले -' हम औरतों और बच्चों के साथ नहीं रहते। अलग रहते हैं। सफाई से रहते हैं इसलिए। '
हमने कहा -'लेकिन तुम तो बता रहे थे तुम्हारी 4 पत्नियां, बच्चे भी हैं। अब कह रहे औरतों , बच्चों के साथ नहीं रहते।'
बोले -'यहां भाभी रहती हैं। इसलिए अलग रहते हैं। '
चाय पीते हुए एक और आदमी दिखा। महीनों पुराने गंदे कपड़े पहने। चीकट बालों पर साधू विग टाइप रखे। कपड़े काले जैसे कोयला खदान से आया हो निकलकर। उससे बात करने की कोशिश की तो पङ्कज ने बताया -'इनके ऊपर डबल मर्डर का केस चल रहा है।'
उस आदमी ने सड़क पर जा रहे एक आदमी से माचिस मांगकर बीड़ी सुलगाई। जेब मे कई पेन और खाली माचिस की डिब्बी दिख रही थी। बतियाने के हिसाब से उसको भी चाय ले दी। वह चाय का कप लेकर पीते हुए आहिस्ते आहिस्ते चला गया।लोगों ने बताया -'किसी से कुछ मांगता नहीं, बोलता नहीं। कोई कुछ दे देता है तो खा लेता है।'
ऐसे लोग पता नहीं किसी आंकड़े में आते हैं समाज/सरकार के या ऐसे ही चुपचाप अनदेखे रह जाते हैं।
चलते हुए पंकज बोले -'बीच में भी आना। साढ़े नौ बजे तक रहते हैं।'

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, घोड़ा
चारा खिलाकर गाय दुहते हुए
लौटते हुए एक जगह फुटपाथ पर एक आदमी गाय दूध रहा था। चारा खाते हुए गाय अपना दूध निकलते देख रही थी। लोग डब्बे लिए ताजा दूध लेने के लिए इन्तजार कर रहे थे।
बगल से एक आदमी तसले में कीचड़ लिए जा रहा था। कोहनी तक हाथ कीचड़ से सना था। पता नहीं वह सफाई कर्मचारी था या सुनारों की दुकान में काम करने वाला कोई कामगार। उसे रोककर पूछने की हिम्मत नहीं हुई।
वहीं फुटपाथ पर तमाम लोग मोबाइल स्क्रीन में मुंडी घुसाए बैठे थे। पता चला कि काम -काज के लिए काम करने वाले मजदूर हैं वे लोग। जिनको खाना का ठेका मिलता है वे लोग अपनी जरूरत के हिसाब यहां से कामगार ले जाते हैं।
एक बुजुर्ग कामगार वहीं चबूतरे पर लेटे थे। उनके पास खड़े हुए तो वे उठ गए। उठ गए तो हम बतियाने लगे। पता चला कि पीछे चालीस साल से यही काम कर रहे हैं। दो बेटे हैं वो अपनी दुकानें चलाते हैं। दो बेटियों की शादी कर दी। ये अपना काम करते हैं। आज तबियत कुछ खराब लगी तो लेट गए।
श्रीराम नाम बताया। हमने कहा -'जय श्रीराम।' वो खुश हो गए। बोले -'यहां सब लोग जानते हैं। दादा कहते हैं।'जिस तरह बुजुर्ग कामगार अपने बारे में बता रहे थे उससे लगा कि कमजोर से कमजोर आदमी का अपना गढ़ा हुआ आभामंडल होता है जिसकी खुमारी में वह जीता है।
चित्र में ये शामिल हो सकता है: बाहर
विज्ञापन एक हसीन झांसा - दस रुपये में जिद्दी दाग निकालिए
माल रोड पर एक हॉर्डिंग में किसी वासिंग पाउडर का विज्ञापन था -'दस रुपये में निकाले जिददी दाग।' 10 का अंक ट्रक के टायरों के फोटो से बनाया गया था। ट्रक टायर हजारों रुपये में आता है। यहां दो टायर मिलकर 10 रुपये का निशान बना रहे। विज्ञापन की दुनिया कितनी झांसे वाली होती है।
वैसे देखा जाए तो झांसा दुनिया में कहां नहीं है। ये दुनिया भी तो अपने आप में एक हसीन झांसा है। आप इत्ती लम्बी पोस्ट झांसे में ही आकर तो पढ़ गए। नहीं क्या ?

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