Tuesday, May 08, 2018

देश सेवा थोड़ी बदतमीजी के बिना शोभा नहीं देती- परसाई



1. कोई-कोई आदमी कुत्ते से बदतर होता है। मार्के ट्वेन ने लिखा है- ’यदि आप भूखे कुत्ते को रोटी खिला दें, तो वह आपको काटेगा नहीं। कुत्ते और आदमी में यही मूल अन्तर है।’
2. मध्यवर्गीय कुत्ता उच्चवर्गीय होने का ढोंग भी करता है और सर्वहारा के साथ मिलकर भौंकता भी है।
3. एक ऐसा आदमी था, जिसके पास जलती मशाल ले जाओ तो वह बुझ जाये।
4. गरीब आदमी न तो एलोपैथी से ठीक होता है, न होम्योपैथी से; उसे तो सिम्पैथी (सहानुभूति) चाहिये।
5. प्यार करने वाली स्त्री बड़ी खतरनाक होती है। न जाने कब किससे प्यार करने लगे और तुम्हे पिटवा दे।
6. जोगिया से सिद्ध तक का जो रास्ता है, वह छल, कपट, प्रपंच और पाखंड के बीहड़ बन से गुजरता है।
7. कुछ होते हैं जो दुख भी सुविधा से मनाते हैं, जिनका विछोह भी अजब रंगीनियों से भरा होता है। जिनका दुख भी एक त्योहार हो जाता है।
8. दुनिया को इतनी फ़ुरसत नहीं होती है कि वह कोने में बैठे उस आदमी को मान्यता देती जाये जो सिर्फ़ अपने को हमेशा सही मानता है। उसकी अवहेलना होती है। अब सही आदमी क्या करे। वह सबसे नफ़रत करता है। खीझा रहता है। दु:ख भरे तनाव में दिन गुजारता है।
9. उनकी मूछों की सिफ़त यह थी कि आदमी और मौका देखकर बर्ताव करती थीं। वे किसी के सामने ’आई डोण्ट केयर’ के ठाठ की हो जातीं। फ़िर किसी और के सामने वे मूंछों पर इस तरह हाथ फ़ेरते कि वे ’आई एम सॉरी सर’ हो जातीं। मूंछों के इस दुहरे स्वभाव के कारण वे सफ़ल और सुखी आदमी रहे।
10. आदमी को समझने के लिये सामने से नहीं, कोण से देखना चाहिये। आदमी कोण से ही समझ में आता है।
11. साहित्य में बन्धुत्व से अच्छा धंधा हो जाता है।
12. जवान आदमी को दुखी देखने से पाप लगता है। मगर मजबूरी में पाप भी हो जाता है। बेकारी से दुखी जवानों को सारा देश देख रहा है और सबको पाप लग रहा है। सबसे ज्यादा पाप उन भाग्य विधाताओं को लग रहा है, जिनके कर्म, अकर्म और कुकर्म के कारण वह बेकार हैं। इतना पाप और फ़िर भी ये ऐसे भले चंगे! क्या पाप की क्वालिटी गिर गयी है?उसमें भी मिलावट होने लगी?
13. घूस से पारिवारिक जीवन सुखी होता है।
14. जिस दिन घूसखोरों की आस्था भगवान से उठ जायेगी, उस दिन भगवान को पूछने वाला कोई नहीं रहेगा।
15. यह जमाना ही किसी समर्थ के घर बैठ जाने का है। वह तो औरत है। तू राजनीति के मर्दों को देख। वे उसी के घर बैठ जाते हैं , जो मन्त्रिमण्डल बनाने में समर्थ हो। शादी इस पार्टी से हुई थी मगर मंत्रिमण्डल दूसरी पार्टी वाला बनाने लगा तो उसी की बहू बन गये। राजनीति के मर्दों ने वेश्याओं को मात कर दिया। किसी किसी ने तो घण्टे भर में तीन-तीन खसम बदल डाले। आदमी ही क्यों, समूचे राष्ट्र किसी समर्थ के घर में बैठ जाते हैं।
16. पैसे में बड़ी मर्दानगी होती है। आदमी मर्द नहीं होता, पैसा मर्द होता है।
17. सदियों से यह समाज लिखी पर चल रहा है। लिखा कर लाये हैं तो पीढियां मैला ढो रही हैं और लिखा कर लाये हैं तो पीढियां ऐशो आराम भोग रही हैं। लिखी को मिटाने की कभी कोशिश ही नहीं हुई। दुनिया के कई समाजों ने लिखी को मिटा दिया। लिखी मिटती है। आसानी से नहीं मिटती तो लात मारकर मिटा दी जाती है।
18. गंवार हंसता है, बुद्धिवादी सिर्फ़ रंजित होता है।
19. हम पूरे मुंह से बोलते हैं, मगर बुद्धिवादी मुंह के बायें कोने से जरा-सा खोलकर गिनकर शब्द बाहर निकालता है।
20. अगर कोई आदमी डूब रहा हो, तो वे उसे बचायेंगे नहीं, बल्कि सापेक्षिक घनत्व के बारे में सोचेंगे।
21. कोई भूखा मर रहा हो तो बुद्धिवादी उसे रोटी नहीं देगा। वह विभिन्न देशों के अन्न उत्पादन के आंकड़े बताने लगेगा। बीमार आदमी को देखकर वह दवा का इंतजाम नहीं करेगा। वह विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट उसे पढकर सुनायेगा।
22. सिर्फ़ मैं समझता हूं, यह एहसास आदमी को नासमझ बना देता है।
23. देश सेवा थोड़ी बदतमीजी के बिना शोभा नहीं देती। थोड़ी बेवकूफ़ी भी मिली हो, तो और चमक जाती है।
24. इस मुल्क को भगवान ने खासतौर से बनाया है। भगवान की बनाई चीज में इंसान सुधार क्यों करे? मुल्क सुधरेगा तो भगवान के ही हाथ सुधरेगा।
25. चक्कर लगाता प्रेमी बैठे प्रेमी से सवाया पड़ता है , क्योंकि वह मेहनत करता है।

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