Wednesday, June 03, 2026

तैराकी का चौथा दिन


कल मंगलवार को  स्वीमिंग पूल बंद था। तीन दिन की स्विमिंग करते हो गए। लेकिन  रजिस्ट्रेशन फ़ार्म नहीं जमा किया था। स्विमिंग पूल स्टॉफ ने आज जमा करने को कहा था। साथ में आधार कार्ड की फोटोकॉपी, तीन फोटो और मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना था। मेडिकल के लिए हमको डॉक्टर खोजना था जो हमको मेडिकल सर्टिफ़िकेट दे सके। 

शाम को फ़ोटो बनवाने के लिए पास के फोटोकॉपी सेंटर गए। फोटो  बनवाने के लिए  फेसबुक से अपनी सात साल पुरानी पोस्ट में लगी फोटो निकालकर दे दी। उसने फ़ोटो बनाकर दे दी। तीस रुपये की छह फ़ोटो। तीन रुपये आधार कार्ड की फोटोकॉपी करवाने के । कुल 33 रुपए लगे।

फोटोकॉपी सेंटर के बगल में एक डॉक्टर की दुकान देखी। जनरल फिजीशियन लिखा था दुकान के बाहर। हम अंदर घुस गए। डॉक्टर अकेले बैठे। हमने पूछा -'हमारा मेडिकल सर्टिफिकेट बना देंगे स्वीमिंग के लिए?' डॉक्टर ने कहा -'हाँ, बना देंगे?' फीस पूछी तो बताया -'दो सौ रुपये।' हमने कहा बना दें। नाम और विवरण के लिए  हमने अपना आधार कार्ड उनको थमा दिया। 

डॉक्टर ने मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए अपना पैड पलटना शुरू किया। जितने पैड थे उन सबके पन्ने भरे थे। कोई पन्ना ख़ाली नहीं था। उसने इधर-उधर टटोलकर सारे पैड देख डाले। किसी में कोई पन्ना ख़ाली नहीं दिखा। एक पैड में ऊपर दो शब्द लिखे थे। उसने उसको काटकर हमारा नाम लिखकर हमारा मेडिकल घसीट दिया। लिखते हुए पूछा -'बीपी, सुगर की कोई तकलीफ़ तो नहीं?' हमने बताया -'नहीं।'

डॉक्टर ने मेडिकल सर्टिफिकेट बनाकर हमारा बीपी लिया, नब्ज देखी। इसके बाद मोहर लगाकर A8 साइज का मेडिकल सर्टिफिकेट पकड़ा दिया।डॉक्टर  ने  बताया कि जौनपुर के रहने वाले हैं। जौनपुर में गोमती नदी शहर के बीच से बहती है। गोमती के दोनों तरफ़ शहर है। शहर के लिए लोग कहते हैं -' (गोमती के) एपार जौनपुर, ओपार जौनपुर ।'

सर्टिफिकेट में फिट फॉर स्वीमिंग लिखा था। एकतरह से फिटनेस सर्टिफिकेट था यह। मतलब कभी अनफिट भी रहे होंगे। प्रमाणपत्र में राइटिंग  बिगाड़कर लिखी थी। शायद मेडिकल की पढ़ाई में हस्तलेख बिगाड़ना भी सिखाया जाता होगा। मरीज न पढ़ सके कि डॉक्टर ने लिखा क्या है। कुछ डाक्टर्स की राइटिंग बहुत  अच्छी होती है।  देखकर लगता है कि उन्होंने राइटिंग बिगाड़ने वाली क्लास बंक की है। 

सुबह स्विमिंग पूल पहुंचकर देखा स्टॉफ़ किसी और का फार्म जमा कर रही थी। हम सीधे शॉवर लेकर पूल में उतर गए। कोच से पूछा बताओ क्या करें आज? कोच ने हाथ चलाने को कहा। हमने हाथ चलाते हुए पूल के आर-पार टहलाई की। बीच-बीच में मुँह नीचे करके टहलते, पानी काटते हुए आगे बढ़ते हुए अपने-आप पानी की सतह से ऊपर उठ जाते। अंदर हवा भरी होने के कारण ऐसा होता है। इंसान के अंदर हवा भरी होने पर वह अपने-आप ऊपर उठने लगता है। हर क्षेत्र में ऐसा होता है। किसी-किसी को इससे अपने बारे में भ्रम हो जाता है। उसको लगता है कि वह ऊपर ही उठता रहेगा। लेकिन हवा निकलने पर पर वह फिर नीचे आता। कुछ तो मुँह के बल गिरते हैं। पानी में हवा निकलने पर मुँह में पानी भर जाता है। हालत ख़राब हो जाती है। 

कुछ देर बाद पानी में हाथ मारने के बाद हमने फिर पूछा -'बताओ अब क्या करें?' कोच ने पांव चलाना बताया। हमको समझ में नहीं आया ठीक से। उसने बाहर निकाला हमको पानी से। फर्श पर बैठकर पाँव चलाना सीखा हमने। फिर पानी में आए। 

पानी में पाँव चलाने के बाद हमने कोच से पूछा -'ठीक चला रहे हैं पैर?' कोच ने दूसरी तरफ़ देखते हुए चाय का शिप लेते हुए कहा -'पैर को और पास लाते हुए घुटने को मोड़ते हुए चलाइये।' हमने फिर कोशिश की। फिर दिखाया । अबकी बार कोच में हमको पास कर दिया।' हमने कई बार अभ्यास किया इसका। पाँव चलाते हुए लगा कि अपन पानी को पीछे धकेल रहे हैं। पानी को पीछे धकेलते हुए हम आगे बढ़ते, ऊपर उठते लगे। हमको पानी में पांव चलाते हुए लगा -'आगे बढ़ने, ऊपर उठने के लिए किसी को पीछे धकेलना प्राकृतिक गुण है।' 

कई बार पानी में सर नीचे करते हुए साँस रोकने का भी अभ्यास किया। देर तक साँस रोकने के बाद ऊपर आने पर पानी मुँह से बाहर करते हुए एकाध बार  ऊपर वाला डेंचर मुँह से निकलकर बाहर आने को हुआ। हमने फौरन उसको पकड़कर अंदर कर लिया। आज एकबार तो डेंचर मुँह से निकलकर पानी में तैरने लगा। पहले नीचे गया। हमने पकड़ने की कोशिश की तो ऊपर आ गया। पानी में तैरने लगा। हमने पकड़कर उसको मुँह के अंदर किया। हड़काया भी -' हमारे (मुँह के) साथ टहलो बच्चा। मुँह से बाहर निकलकर अलग टहलोगे तो तुम्हारी भी फ़ीस जमा करवा लेंगे स्विमिंग पूल वाले। फीस तो खैर कोई बात नहीं लेंकिंग डेंचर का मडिकल कैसे करवायेंगे?'

पानी में पांव चलाते हुए एहसास हुआ कि तैरने के इंसान को मेढक की तरह पाँव चलना सीखना होता है। तैरना मतलब इंसान का पानी में मेढक में बदलना है। 

देखते-देखते घंटा पूरा हो गया। सीटी बज गई। हम बाहर निकल आए। कोच ने कहा -'आगे कल सिखायेंगे।'

बाहर आकर फ़ार्म जमा किया।  स्टॉफ़ बालिका ने फ़ार्म लेकर पास में धर लिया। कहा कल या परसों आपको कार्ड मिल जाएगा। कुछ देर उससे बतियाने पर उसने  बताया -'ग्रेजुएशन के बाद ब्रेक के लिए यहाँ ज्वाइन किया है। इसके बाद बीएड करने का विचार है। अभी समय नहीं मिलता तैयारी के लिए। तैरना भी सीखना है। मैडम कहती हैं सीख लो लेकिन जब पूल टाइम खत्म होता है तब तक कोच चले जाते हैं। सीखेंगे। पिता की फलों की आढ़त है। डीसीएम भी हैं घर में। ट्रांसपोर्ट का भी काम है घर वालों का। '

पूल के बारे में बताया जिन मैडम ने लीज पर लिया है पूल वो घर में सीसीटीवी पर कैमरे में देखती रहती हैं। कोई गड़बड़ होती है तो फौरन फ़ोन करती हैं। हमने तय किया पूल में सीखते हुए कोई गड़बड़ नहीं करनी है। मैडम देख लेंगी तो लफड़ा होगा। यह सोचते हुए अपन घर लौट आए। 

यह तैराकी सीखने का हमारा चौथा दिन था। 

1 comment:

  1. अनूप शुक्ला1:44 PM

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