Sunday, June 07, 2026

तैराकी का आठवाँ दिन

 

डायना नायड 

कल रात तैरना सीखने के कई वीडियो देखे। ऐसे पानी में उतरें। ऐसे हाथ चलायें। ऐसे पांव चलायें।  ब्रेस्ट स्ट्रोक ऐसे करें। पानी में साँस ऐसे लें। बिस्तर में बैठे-बैठे कुछ देर हाथ भी चलाये। पाँव भी। लेकिन बिस्तर में पानी तो था नहीं। हवा थी। हवा में अभ्यास हवा-हवाई ही होता है।

सुबह कार स्टार्ट करके निकले। मोड़ पर एक कार तेज़ी से हमारी तरफ़ आई। हम आहिस्ते से चला रहा थे। ब्रेक मारकर रुक गए। सामने वाला भी किनारे आ गया। हम भी तेज होते तो मामला नजदीकी हो जाता। 

पूल में पहुँचकर शॉवर लिया। हम समझते थे कि शॉवर लेने का कारण गंदगी, पसीना अलग करना होता है। कल एक यू ट्यूबर ने बताया -'शॉवर लेने से शरीर पूल के तापमान के बराबर हो जाता है। न लेने पर तबीयत बिगड़ जाती है।'   

आज तैरते हुए साँस लेने का अभ्यास किया। हुआ नहीं ठीक से। जब पास की साँस ख़त्म करके मुँह ऊपर करते, लड़खड़ा जाते। हाथ अलग, पाँव अलग। हाथ और पैर में तालमेल खत्म हो जाता। गनीमत हर बार यह रही कि घबड़ाये नहीं। जहाँ साँस उखड़ती वहीं साँस छोड़कर खड़े हो जाते। पानी के अंदर सांस लेने की कोशिश नहीं की। करते तो पानी नाक और फेफड़े में घुस जाता। खांसते अलग। 

कोच को बताया तो उसने कहा -'आप अच्छा तैर रहे हैं। छोटी -छोटी साँस लीजिए। सर  ऊपर करने के लिए पानी को नीचे धकेलिये। सर ऊपर आयेगा तब मुँह से साँस ले लीजिए। तैरिए। 

हमने पूल किनारे की रेलिंग पकड़कर पाँव चलाए। सर अंदर करके पाँव चलाते हुए साँस छोड़ते हुए सर ऊपर किया। साँस ली। फिर सर अंदर किया। फिर साँस छोड़ी। फिर ली। कई बार अभ्यास किया। लेकिन जब तैरने लगे तो सर ऊपर करते समय फिर लड़खड़ा गए। 

 तैरते हुए साँस लेना सीखना सबसे जरूरी है तैराकी के लिए। लंबी दूरी के जहाज में हवा में ही ईंधन भरने की व्यवस्था होती है। उसी तरह पानी में  तैरते हुए साँस लेना सीखना है। कई बार कोशिश के बावजूद आज सीख नहीं पाये। कोच ने कहा -'सीख जायेंगे।' हमने कहा -'सीखना तो है ही। सीख तो जायेंगे ही। समय लगेगा बस।'

पूल में तैरते लोगों में बच्चे, बुजुर्ग, महिलायें, पुरुष सब शामिल थे। अधिकतर लोग कम गहराई वाले जोन में तैर रहे थे। एक-दूसरे से भिड़ते-टकराते, आगे-पीछे होते। पूल का माहौल किसी बाजार सरीखा था। कोई इधर से आ रहा है, कोई उधर से। कोई बगल से कूद रहा है कोई सामान से मिसाइल की तरह तैरता आ रहा है। उसी में सब सीख रहे हैं।

कोच ने कहा -'कल आपको डीप में ले चलेंगे।' हमने कहा -'हम जब तक सीख नहीं जाएँगे तब तक कहीं नहीं जाएँगे।' डीप में तब जाएँगे तब किनारे एकदम परफेक्ट हो जायेंगे। तुम्हारे साथ नहीं जाएँगे। अपने साथ तुमको ले जाएँगे।'

एक बच्चा सीखने आया था। माँ -बाप साथ में। घर जाते समय पिनपिना रहा था -'यहाँ न कोल्ड ड्रिंक है , न कोई पॉप कार्न।' शायद उसको इन चीजों की आदत हो गई है। 

तैरते हुए कब घंटा बीट गया पता ही नहीं चला। सीटी बज गई। बाहर निकाल दिए गए। हम पूल से निकलकर बाहर आए। शॉवर लिया। कपड़े पहने। अपना कार्ड समेटकर  बाहर आ गए। 

देखते हैं कल सीख पाते हैं तैरते हुए साँस लेना या एक दिन और लगेगा। 

फोटो प्रख्यात तैराक डायना नायड की। डायना नायड ने  क्यूबा से फ्लोरिडा  की  110 मील की दूरी (प्रख्यात इंग्लिश चैनल से पाँच गुनी दूरी)  को तैर कर पार करने के  अपने बचपन के सपने  पूरा करने के लिए साठ साल की उम्र में दुबारा तैराकी शुरू की। चार बार असफल रहीं । आख़िर में 64 साल की उम्र में डायना नायड ने यह दूरी तैरकर पार की। ऐसा करने वाली वे दुनिया की अकेली शख़्सियत हैं। पिछले साल 76  वर्ष की उम्र में वाशिंगटन पोस्ट अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में कहा -"मैं बस इतना जानती हूं कि हर मिनट, चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो, वह कीमती है। मैं बस इसके हर पल को थाम लेना चाहती हूँ।"






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