Friday, May 10, 2013

आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है

http://web.archive.org/web/20140420081529/http://hindini.com/fursatiya/archives/4287

आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है

रोज की तरह आज फ़िर पांच बजे जाग गये। जाग गये लेकिन उठे नहीं।

जागने का तो ऐसा है कि अलार्म लगा है। रोज घनघनाता है। वो मोबाइल के हाथ में है। उसको क्या? जबका लगाओ, बज जायेगा। लेकिन अलार्म बजने और उठने में फ़र्क है। उठना मुश्किल काम है जी।

जागने के बाद सोचते रहे लेटे-लेटे कि अब उठ जायें। टहल के आयें। जल्दी उठने और टहलने का गाना गायें। लेकिन फ़िर आलस्य ने हाथ पकड़ लिया- रुको यार। उठ जाना। कहां भाग रहे हो बिस्तर का साथ छोड़कर। कौन चुनाव हो रहे हैं जो दलबदल करो। दो मिनट बाद उठना।
हम आलस्य के बहकावे में आकर दो मिनट लेटे रहे। ऐसे न कित्ते दो मिनट हो गये। फ़िर जब पानी सर के ऊपर होता दिखा और समय घड़ी के पार तो झटके से उठ गये। आलस्य ने लपक के पकड़ने की फ़िर कोशिश की लेकिन हम फ़िर फ़ूट लिये उसकी पकड़ से। झट से कमरे का ताला लगाकर नीचे आ गये। लगे टहलने धांय-धांय। जल्दी-जल्दी। जैसे कोटा पूरा करना हो।
आलस्य के चक्कर में हमारे तमाम काम स्थगित पड़े हैं। जरूरी और गैरजरूरी दोनों। जैसे सिस्टम की संगति में अच्छी योजनायें भी वाहियात अमल में बदल में जाती हैं वैसे ही आलस्य की संगति संगति में जरूरी काम भी गैरजरूरी लगने लगते हैं। अंतत: स्थगित हो जाते हैं। आलस्य जरूरी और फ़ालतू का भेद मिटाता है। सबको समान भाव से देखता है। सबको स्थगित करता है। उसके यहां घपला नहीं चलता कि ले-देकर किसी काम को करवा दे और किसी को स्थगित करवा दे।
आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है। ऐसे प्रेम से व्यवहार करता है कि उसकी संगति से अलग होने का मन नहीं होगा। लगता है कभी उससे जुदा न हों। लगता है वो हमेशा ये गुनगुनाता रहता है – यूं ही पहलू में बैठे रहो, आज जाने की जिद न करो।
आलस्य को लोग बुरा गुण मानते हैं। न जाने कितने उदाहरण बताकर इसको बदनाम करते हैं। आलस्य को मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बताते हैं। वे तस्वीर का एक पहलू बताते हैं। दूसरा पहलू नहीं दिखाते।
आलस्य का सौंदर्य अद्भुत होता है। इसकी संगति में व्यक्ति परम आशावादी होता है। अपनी क्षमताओं में असीम वृद्धि महसूस करता है। जो काम महीनों तक टालता रहता है उसके बारे में यही सोचता है अरे दो मिनट का काम- हो जायेगा।
आलस्य व्यक्ति को बुरे काम करने से भी रोकता है। आप किसी को सजा देने की सोचते हैं, नुकसान करने की सोचते हैं, सोचते हैं गड़बड़ करके ही रहेंगे लेकिन आलस्य मुस्कराते हुये आपको बरज देता है- अरे छोड़ो यार फ़िर करना। जान देव। मटियाओ।
सोचिये त जरा अगर हम आलसी न होते तो आज अमरीका और न जाने किसको पछाड़ के कित्ता आगे हो गये होते। लेकिन आगे हो जाने के बाद फ़िर करेंते क्या अकेले आगे खड़े-खड़े। अमेरिका की तरह ही कुछ ऊल-जलूल हरकतें न। इसीलिये आराम से खड़ें हैं। खरामा-खरामा प्रगति करते हुये। हड़बड़ाते हुये प्रगति करने से क्या फ़ायदा? उस प्रगति का क्या सुख जिसको फ़ील न किया जा सके। रास्ते में जो मजा है वो मंजिल में कहां?
देखिये इस बात को कवि किस तरह कहता है:
ये दुनिया बड़ी तेज चलती है ,
बस जीने के खातिर मरती है।
पता नहीं कहां पहुंचेगी ,
वहां पहुंचकर क्या कर लेगी ।
आलस्य की जब कोई बुराई करता है तो बड़ा गुस्सा आता है। मन करता है पकड़कर हिंसावाद कर दें। लेकिन आलस्य बरज देता है। छोड़ यार। हिंसा कमजोर का हथियार है। आलसी को हिंसा शोभा नहीं देती।
दुनिया में जित्ते भी सुविधाओं के आविष्कार हुये हैं वे सब आलस्य के चलते हुये हैं। सुविधा पाना मतलब आलसी हो जाना। अलग आलस्य की शरण में जाने की भावना न होती तो लिफ़्ट न होती, जहाज न होता, कम्प्यूटर न होता।
और तो और अगर आलस्य न होता तो न घपला होता, न घोटाला न करप्शन न स्विस बैंक ने। न मंदी न बंदी। सब आलस्य के उपजाये हैं ये प्रगति के उपमान। आदमी अरबों इकट्ठा करता है सिर्फ़ इसीलिये कि वो और उसकी औलादें आलस्य का संग सुख उठा सकें।
आलस्य की महिमा अनंत है। अविगत गत कछु न आवै की तरह इसके बारे में बहुत कुछ कहते हुये भी सब कुछ कहना संभव नहीं है। उसमें भी आलस्य आड़े आ जाता है। रोक देता है मुस्कराते हुये -बस,बस बहुत हुय़ी चापलूसी। अब बंद करो ये खटराग। आओ अलसिया जाये।
लेकिन आलस्य न होता तो क्या ये लेख हम पोस्ट कर पाते? बताइये।

जन्मदिन मुबारक

आज निशांत बाबू का जन्मदिन है। उनको फोनियाये हैप्पी बर्थडे कहने को तो उन्होंने पूछा -आज का स्टेटस अपडेट कर दिया? हम बोले -अभी कहां अब जाकर करेंगे। वैसे उन्होंने पूछा तो यह भी -काठमांडू नहीं जा रहे?
निशांत को ज्ञानजी जेन पण्डित कहते हैं। जेन कथाओं से हमको परिचित कराने वाले निशांत ही हैं। दो दिन पहले ही उनके सुपुत्र आयाम ने अपने जीवन के सात साल पूरे किये। आज निशांत ने अड़तीस। दोनों को एक बार फ़िर से जन्मदिन की बधाई।

मेरी पसंद

नेताजी की छिन जायेगी रेल,
कोई और खेलेगा आगे खेल।
देश में होंगे फ़िर से नये चुनाव,
खेलेंगे लोग बड़े-बड़े से दांव।
आयेगी फ़िर नयी सी सरकार,
देश का करेगी बढिया सा उद्धार ।
बनेंगे फ़िर से नये-नये कार्टून,
करेंगे एक-दूजे को टेलीफ़ून।
हमारे साथ आओ अब भाई,
चलो मिलकर सरकार बनाई।
शपथ लेंगे संविधान के नाम,
करेंगे बहुतों के काम तमाम ।
प्रधानमंत्री के लिये होगी जंग,
कोई खिलेगा ,होगा कोई बदरंग।
अभी तो चलते हैं जी अपने दफ़्तर ,
देश की फ़िर सोचेंगे शाम को आकर ।
-कट्टा कानपुरी

24 responses to “आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है”

  1. विवेक रस्तोगी
    आलस्य की महिमा अनंत है.. हम भी पिछले दो दिन से आलस करे पड़े हैं.. केवल लिख ही नहीं पा रहे हैं.. आप ऐसे ही आलसी और फ़ुरसतिया रहें तो हमें बांचने को मिल जायेगा.. अद्भुत रस है आलस में..
    विवेक रस्तोगी की हालिया प्रविष्टी..चाँद पूर्ण रूप में
  2. PN Subramanian
    नव रसों में एक और जोड दिया जाना चहिये.
    PN Subramanian की हालिया प्रविष्टी..अर्जुन के पताका में हनुमान क्यों
  3. archanachaoji
    आलस्य जिन्दाबाद …..उसके खाते में एक पॉडकास्ट आ गिरा है … :-)
  4. shikha varshney
    हाँ जी आराम बड़ी चीज है ….
    यह आलस्य का प्यार ही है जो हमें भी रोज हाथ पकड़ कर बैठा लेता है हम जब थोड़ा योग शोग करने की सोचते हैं.
  5. दिनेशराय द्विवेदी फ़ेसबुक पर
    आलस के कई लाभ भी होते हैं, कभी गिना देंगे।
  6. Shiv Bali Rai फ़ेसबुक पर
    गुणी लोग कहते है -वात्सल्य ,सौन्दर्य रस का अंग है इसीलिए सुबह की आलस्य वाली नींद में सौन्दर्य रस के सपने बहुत आते है वसे कट्टा नाम का धारावाहिक का इंतजार रहने लगा है |
    1. अनूप शुक्ल
      ॒॒@ Shiv Bali Rai यही भ्रम तो जानलेवा है। सोचते हैं नहीं लिखेंगे तो उदास हो जायेंगे। :)
  7. Sudhir Tewari फ़ेसबुक पर
    आलस्य के चलते मृत्युदंड पा चुके व्यक्ति जीवन दान के लाभार्थी में परिणीत हो जाते हैं! न्यूटन का जड़त्व का सिद्धांत भी मूलतः आलस्य पर ही आधारित हैI
  8. amit
    आलस्य की ही महिमा है, जो करा दे वही बहुत ज्यादा है! वर्ना और गुणों/अवगुणों को तो कहते हैं कि जो करा दे वही कम है! :D
    amit की हालिया प्रविष्टी..मकई पालक सैण्डविच…..
  9. काजल कुमार
    मैं तो किसी किसी दिन काहिली की इंतेहा करते हुए 2 अलार्म आैर लगाता हूं 15-15 मिनट या आधे-अाधे घंटे के फ़र्क़ से (मोबाइल में 3 से ज़्यादा की सुविधा नहीं है). तब कहीं जाकर उठने का उपक्रम करता हूं :)
    काजल कुमार की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- गुप्तदान को कमाई जताने वाली जमात
  10. Anonymous
    क्या रखा मांस घटाने में मनहूस अकल से काम करो !
    संक्रांति काल की बेला है ,आराम करो !आराम करो !!!!
  11. suresh sahani
    क्या रखा मांस घटाने में मनहूस अकल से काम करो !
    संक्रांति काल की बेला है ,आराम करो !आराम करो !!!!
  12. arvind mishra
    निशान्त जी का अंतिम पुरुषार्थ क्या काठमांडू तो नहीं है ? आपका तो खैर नहीं ही है!
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..घर में घुस आया वह अनचाहा संगीतज्ञ!
  13. Dr. Monica Sharrma
    सबके मन की सी कही…… :)
    Dr. Monica Sharrma की हालिया प्रविष्टी..विस्मृति का सुख
  14. shefali
    सही कहा ….मेरी नज़र में जो आलसी हैं, वही असली हैं |
    shefali की हालिया प्रविष्टी..मामा – मामा भूख लगी……….
  15. Rekha Srivastava
    हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और आपने दूसरा पहलू दिखा दिया . वैसे आलस्य है बड़े काम की चीज – शरीर को पूरा आराम , नहीं तो जुटे रहो कोल्हू के बैल की तरह और पड़े पड़े कुछ न कुछ सोचते ही तो रहते हैं और लिखने वाले तभी आलस्य छोड़ कर तुरत ब्लॉग पर या फेसबुक पर अपडेट कर देते हैं. वैसे एक बात तो है की जबलपुर प्रवास में लेखनी खूब चलती है.
    Rekha Srivastava की हालिया प्रविष्टी..मुलाकात – सुधा भार्गव जी से!
  16. रवि
    स च मु च अ द् भु त हो ता है (उबासी) ,,,
    रवि की हालिया प्रविष्टी..प्रकृति की इस गुत्थी को कौन सुलझाएगा?
  17. saagar
    का कमेन्ट करें ?
    “अरे छोड़ो यार फ़िर करना। जान देव। मटियाओ।”
  18. प्रवीण पाण्डेय
    आलस्य बहुत ढंग से थपकाता है और बाद में उलाहना भी देता है।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..ब्लॉग व्यवस्था, तृप्त अवस्था
  19. ramakant singh
    आज करे सो काल कर, काल करे सो परसों
    इतनी जल्दी क्या है बेटा जीना है कई बरसों
  20. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है [...]
  21. दुनिया कित्ती खूबसूरत है
    […] कित्ता ’सुकून’ महसूस हो रहा है । यह आलस्य का सौन्दर्य है। अब जो भी कर डालेंगे नये साल में वह […]

Wednesday, May 08, 2013

धरे गये घूस के नाते में

http://web.archive.org/web/20140420082505/http://hindini.com/fursatiya/archives/4266

धरे गये घूस के नाते में

धरे गये घूस के नाते में,
पैंट उतर गयी घाते में। हाल-बड़ा बेहाल हुआ जी,
नंगा शरम से लाल हुआ जी।

कल अखबार में एक खबर पढ़ी। एक पटवारी टाइप कोई पदाधिकारी एक हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया। पैसे लेकर उसने पैंट की जेब में रख लिये। सोचा आराम से खर्चा करेंगे। लेकिन पुलिस को छापा मारना पड़ा। पकड़े गये लेते हुये। पैसे के साथ पैंट भी जब्त हो गयी। इज्जत के साथ पैंट भी उतर गयी।
घूस के पैसे जब्त करने के लिये पैंट उतरवाना खराब बात है। यह पुलिस वालों के खराब सौंन्दर्य बोध का परिचायक है। कल्पना करिये कैसा वह क्षण रहा होगा जब उसकी पटवारी की पैंट उसके पटरा वाले जांघिये से विदा हो रही होगी। जांघिया अपना नाड़ा समेटते हुये बिलख रहा होगा और पैंट से कह रहा होगा- न जाओ भैया छुड़ा के संगत ,कसम तुम्हारा मैं रो पडूंगा।
पुलिस ने पक्का इस मामले में जानबूझकर देरी की होती। चाहती तो लेते समय ही पकड़ लेती। लेकिन पुलिस वाला मुंह ऊपर उठाकर पान मसाला मुंह में डालने में व्यस्त हो गया होगा। यह सोचकर कि जब पैसा ले ही लिया तो जायेगा कहां? जेब में ही तो धरेगा। उतरवा लेंगे पैंट के साथ।
यह भारतीय पुलिस के भदेश सौंन्दर्यबोध की मिशाल है। जिनसे उनका भाईचारा रहता है उनके प्रति भी संवेदनशील नहीं है। घूस लेते आदमी की पैंट उतरवा देती है।
क्या पता वह अपने शायद उसके नाप की पैंट ले गयी हो। वो उतारो ये वाली पहनो। लेकिन वह फ़िट न आयी हो। अटक गयी हो या लटक गयी हो। फ़िर दूसरी मंगाई हो। लेकिन तब तक तो पकड़ा जाने वाला आदमी पैंट विहीन ही रहा होगा। कितना खराब फ़ील हुआ होगा पकड़े जाने वाले को।
क्या पता पटवारी पटरे वाला जांघिया न पहनता हो। वो वाला पहनता हो जिसके पहनने मात्र से एक आदमी पांच लोगों को ढिढुम-ढिढुंम करके उड़ा देता हो। उसने सोचा होगा कि ये वाला पहनेंगे तो जब कोई हथकड़ी लगाने आये तो मार के भगा देंगे। भाग लेंगे। कोई पकड़ न पायेगा। बाद में बैकडेट में छुट्टी भेज देंगे कि तबियत नासाज थी। कोई और होगा जो ले रहा था। हम तो उस दिन छुट्टी पर थे। डाक्टर के पास गये थे।
पकड़े जाने पर वह छूटने के लिये कसमसाया होगा। मार के भगाने की बात तो छोड़िये खुद भाग नहीं पाया होगा तो उसने अंडरवीयर वाली कंपनी को बहुत कोसा होगा। ससुरों ने झूठ बोला। शायद उसने कहा भी हो कि भैया कचहरी के पहले कन्ज्यूमर फ़ोरम ले चलो। पहले वहां मुकदमा कर लें फ़िर जहां मन आये ले चलो।
शायद उसका जांघिया पैंट उतरने से खुश हो गया हो। हमें आजादी मिली। हमारे ऊपर लदा रहता था हमेशा। शायद जाघिया का जेब के पास वाला हिस्सा थोड़ा दुखी हो कि गर्मी कम हो गयी। क्या पता क्या हुआ होगा लेकिन ये अच्छा नहीं हुआ कि हजार रुपये पकड़ने के लिये किसी की पैंट उतरवा दी जाये।
कुल मिलाकर अपने देश में घूस लेते हुये पकड़े जाने वालों की बड़ी मरन है। चाहे जितना मेहनत से काम करता हो बंदा लेकिन घूस लेते हुये पकड़े जाने पर बड़ी बेइज्जती करते हैं। पैंट तक उतरवा लेते हैं। इसीलिये समझदार लोग सीधे घूस का लेन-देन नहीं करते। सेकेट्ररी, आधिकारिक दलाल और अन्य सुरक्षित तरीके अपनाते हैं। अपनी पैंट बचाते हैं।
घूस के पैसे जब्त करने के लिये मानवीय और वैज्ञानिक तरीके अपनाये जाने चाहिये। उनमें से कुछ यह हो सकते हैं:
  1. घूस लेते हुये फ़ुर्तीले पुलिस वाले लगाये जायें। वे जेब में जाने से पहले ही रुपये बरामद कर लें।
  2. पकड़े जाने अगर पैंट उतरवाना अनिवार्य हो तो उसी कम्पनी की उसी साइज की पैंट फ़ौरन दी जाये। ताकि पकड़े जाने पर अधोवस्त्रों में जाना पड़े पकड़े जाने वाले को।
  3. पुलिस दल के साथ एक दर्जी भी जाना चाहिये जो कि नयी पैंट को उसके साइज के हिसाब से फ़िट कर दे।
  4. संवेदनशील महकमों के सभी कर्मचारियों को अपने साथ दूसरी पैंट लाना अनिवार्य कर दिया। पता नहीं कब छापा में सहयोग करना पड़े।
  5. क्या पता कोई कंपनी घूस-फ़्रेंडली पैंट बनाने लगे। एक उतर भले जाये लेकिन दूसरी बनी रहे जांघिये के ऊपर।
छोड़िये कहां सुबह-सुबह हम भी अल्लम-गल्लम सुनाने लगे। आदमी जो पैदाइशी नंगा है, दिन भर नंगा रहता है उसकी पैंट उतरने की चिंता करने लगे।
चलिये टी.वी. देखते हैं। कर्नाटक में नई सरकार बनने वाली है। जिसकी भी बनेगी उसके मुखिया का स्वच्छ प्रशासन देने का वायदा सुनते हैं।

6 responses to “धरे गये घूस के नाते में”

  1. प्रवीण पाण्डेय
    बताइये, यह भी कोई बात हुयी…पैंट उतरवाने के लिये इतना उपक्रम..
  2. arvind mishra
    बेलो बेल्ट वाली बातें
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..घर में घुस आया वह अनचाहा संगीतज्ञ!
  3. काजल कुमार
    सही बात है, पुलिसियों को पैंट नहीं तो लुंगी तो साथ लेकर चलना ही चाहिए वर्ना क्या ये अच्छा लगेगा कि पुलिसिए नंगे के साथ यूं छापा मारने के बाद यहां वहां आैर न जाने कहां कहां घूमते पाए जाएं
    काजल कुमार की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- धृतराष्ट्र राजा, आ माल खाजा…
  4. देवांशु निगम
    पहले तो फोटो बहुत जानदार लगाये हैं , एक दम लवली टैप :) :)
    बाकी तो काका ने कहा ही है :
    “रिश्वत पकड़ी जाए, छूट जा रिश्वत देकर” |
    बाकी पैंट उतरने के इलाज आपने बता दिए , अब रिश्वत लेना एक दम आराम की बात हो गयी | :) :) :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..नंदी हिल्स पर फ़तेह !!!
  5. भारतीय नागरिक
    इत्ती छोटी रकम लिए तो यह होना ही था। करोड़ों की बात होती तो मामला उल्टा होता।
  6. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] धरे गये घूस के नाते में [...]

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Tuesday, May 07, 2013

बस मुस्कराते रहें ….

http://web.archive.org/web/20140420082535/http://hindini.com/fursatiya/archives/4250

बस मुस्कराते रहें ….

अक्सर इधर-उधर पढ़ने को मिल जाता है- मुस्कराते रहें।
मुस्कराते रहें मतलब कीप स्माइलिंग।
वैसे भी मुस्कराते हुये लोग कित्ते खूबसूरत लगते हैं। मिलकर मुस्कराते हुये तो और अच्छे। और खूबसूरत।
आपके हाथ में, हाथ में क्या चेहरे पर भी, बस यही बचा है जो आप धारण कर सकते हैं। मुस्कराते रहें। इसमें न कोई खर्चा है, न कोई टैक्स। बस चेहरे पर धारण करें और धरे रहें।
मुस्कराने से न जाने कित्ते काम अपने आप हो जाते हैं। चेहरा खिला रहता है। तनाव नहीं होता। तनाव नहीं होगा तो और बवाल भी नहीं होंगे। खूबसूरत दिखेंगे। देखा-देखी और लोग भी मुस्कराने लगेंगे। वे भी खूबसूरत दिखेंगे। बाजार में चीनी माल की तरह सब तरफ़ खूबसूरती ही खूबसूरती पसरी मिलेगी।
अब कोई मुस्कान विरोधी कह सकता है कि चीनी माल की तरह बिखरी मुस्कान तो घटिया क्वालिटी की होगी। जल्दी चटक जायेगी। न जाने कब अपना तम्बू उठाकर चल दे चेहरे से। क्या फ़ायदा ऐसी मुस्कान धारण करने से जो अस्थाई हो।
लेकिन कहने वाला ये थोड़ी कहिस है कि आप अच्छे से मुस्कराओ। वह तो सिर्फ़ यह कहता है मुस्कराते रहो। आपको ज्यादा कुछ सोचना ही नहीं है। बस बिना सोचे-विचारे मुस्कराते रहिये। जैसे उड़नबालायें मुस्कराती हैं। जैसे नायिकायें मुस्कराती हैं। जैसे परेशानियां मुस्कराती हैं। जैसे मंहगाई मुस्कराती है। जैसे नेता मुस्कराते हैं। जैसे ये मुस्कराते हैं। जैसे वो मुस्कराते हैं।
वैसे भी मुस्कराने में कोई खर्चा तो लगता नहीं। खर्चा नहीं लगता तो सरकार इसमें सब्सिडी भी नहीं दे सकती। सब कुछ आपको खुद ही करना होगा। जरा सा मेहनत करना होगा। चेहरे की कुछ मांसपेशियां हिलाना होगा। हल्का सा होंठ इधर-उधर करना होगा बस हो गया काम। एक मुस्कान, बनाये बिगड़े काम।
वैसे सरकारों की तरफ़ से मुस्कराने की व्यवस्थायें भी करने के प्रयास हो रहे हैं। जिन लोगों को न मुस्कराने की आदत है उनको बता-बताकर मुस्कराने के लिये टोका जाता है। जैसे क्लास/ मीटिंग में सोते हुये बगल वाला कोहनिया के जगाता -अबे जाग तुझसे सवाल पूछा जा रहा है वैसे ही आजकल हर शहर वाला आपको शहर में घुसते ही मुस्कराने के लिये मजबूर करेगा। बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगी हैं। घुसते ही आपको दिखेगा। मुस्कराइये कि आप लखनऊ में हैं, मुस्कराइये कि आप जयपुर में हैं, मुस्कराइये कि आप यहां हैं, मुस्कराइये कि आप वहां हैं।
अरे भाई कोई जबरदस्ती है। हम आपके कहने से मुस्करायेंगे? हम अपने आप मुस्करायेंगे- कीप स्माइलिंग का डोज लिये हैं।
वैसे सरकार चाहे तो सबके मुस्कराने का इंतजाम कर सकती है। एक ठो सर्कुलर कर दे कि सरकार से कोई भी सुविधा पाने के लिये मुस्कराना अनिवार्य होगा। जो भी मुस्कराये, सुविधा पायेगा। ये नहीं कि हल्ला मचा रहा है, चिल्ला रहा है और कह रहा है -हमारी मांगे पूरी करो। मांगे पूरी करने के लिये मांगकर्ता को मुस्कराना होगा। बात करते समये मुस्कराते रहना होगा। काम होते ही खिलखिलाना होगा।
सरकार के हर कदम का आपको मुस्कराकर स्वागत करना होगा। तेल के दाम बढ़ते हैं, मुस्कराना होगा। घटते हैं, डबल मुस्कराना होगा। चीन वालों ने तम्बू तान दिये मुस्कराये, चले गये डबल मुस्कराइये। कोई घपला सामने आ गया, मुस्कराइये। जांच बैठ गई डबल मुस्कराइये। जांच चलने के दौरान मुस्कराते रहिये। बीच-बीच में मन करे तो हंस-हंसा लीजिये।अपराध हुआ, मुस्कराइये। अपराधी पकड़ गये, और मुस्कराइये। उनको संदेह का लाभ मिला फ़िर से मुस्कराइये।
मतलब अब आप समझ रहे होंगे एक मुस्कराते रहने के सर्कुलर मात्र से देश के हाल एकदम प्रफ़ुल्लित टाइप हो सकते हैं। हैप्पीनेस इंडेक्स अंतरिक्ष तक पहुंच सकता है जिसका आप सर उठाकर दीदार करते रह सकते हैं ताजिंदगी।
अब आप मेरी बात से सहमत हो रहे होंगे कुछ-कुछ और मुस्करा रहे होंगे। हैं कि नहीं।
ठीक है- मुस्कराते रहिये, बोले तो कीप स्माइलिंग।

16 responses to “बस मुस्कराते रहें ….”

  1. shefali
    हाँ जी ….हम तो यूँ कहते हैं ” मुस्कुराइये कि आप फुरसतिया ब्लॉग पर हैं ”
    shefali की हालिया प्रविष्टी..दिल चाहिए बस मेड इन चाइना ….
  2. प्रवीण पाण्डेय
    बिना क्रीम पाउडर सुन्दर बने रहने का रहस्य बता दिया।
  3. mukesh sinha
    कीप स्माइलिंग :))
  4. shikha varshney
    मैकडोनल्स के मेन्यु में भी होता है ..एक स्माइल फ्री :)
  5. mahendra mishra
    मुस्कुराने के लिए अधिसूचना प्रकाशित की जाना चाहिए जिसमें साफ साफ लिखा होना चाहिए की रोते समय भी लोगों को मुस्कुराने की अनिवार्य मुद्रा में रहना होगा … …
  6. arvind mishra
    अभी तक तो मैंने कल वाली ही नहीं पढी तब तक यह ठोक दी आपने :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..भरत, भौंरा और चम्पे का फूल
  7. देवांशु निगम
    मतलब … भैय्या जी इस्माइल :) :) :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..नंदी हिल्स पर फ़तेह !!!
  8. Dr. Monica Sharrma
  9. indian citizen
    और बाद में इस पर सेवाकर लगा दिया जायेगा. :)
    indian citizen की हालिया प्रविष्टी..पुलिस का रवैया
  10. sanjay jha
    मुस्कुराने के लिए तो आपके इसी तरह की ‘पोस्ट-सब्सिडी’ मिलता रहे…………बालक का ‘कीप-एस्मैलिङ्ग’ बना रहेगा…………..
    प्रणाम.
  11. Yashwant Mathur
    आपने लिखा….हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 09/05/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    धन्यवाद!
    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..क्या ‘ऐसा’ शिक्षक हो सकता है ?
  12. Mantu kumar
    :)
  13. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] बस मुस्कराते रहें …. [...]
  14. reference
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    what are some ideal and well known websites for web logs? ?? .
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