Thursday, March 20, 2014

पतंग उडाते बच्चे




घर के बाहर पतंग उड़ाते बच्चों को देखकर केदारनाथ सिंह जी की यह कविता याद आई.

हिमालय किधर है?
मैंने उस बच्चे से पूछा जो स्कूल के बाहर
पतंग उड़ा रहा था

उधर-उधर – उसने कहा
जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी

मैं स्वीकार करूँ
मैंने पहली बार जाना
हिमालय किधर है!

-केदारनाथ सिंह


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