Friday, April 06, 2018

भलमनसाहत प्रचार की मोहताज नहीं होती



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विराट कोहली

सबेरे घर के बाहर बैठे चाय पी रहे हैं। धूप निकल आई है। बढिया वाली हवा बह रही है। आसपास के कुत्ते लगातार भौंक रहे हैं। शायद कुछ संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं। हम समझ नहीं रहे। कौन उठकर जाए बाहर देखने।
अखबार में पहले पेज पर विराट कोहली की फोटो है। सलमान खान अंदर हैं। आधा पेज पर सलमान से सम्बंधित खबरें हैं। किस्से-कहानियां, झलकियां भी। सोशल मीडिया गंजा पड़ा है सलमान खान की खबरों से। अपनी अक्ल और तरफदारी के हिसाब से लोग बयान जारी कर कर रहे हैं। मीडिया को भी एकाध दिन की तसल्ली हुई कि नया मसाला खोजना नहीं पड़ेगा।
कुछ दिन पहले सलमान खान 'हिट एंड रन' मामले में छूट भी गए थे। तब भी खूब स्टेटस बाजी हुई थी। कोई 'फुरसतिया' दोनों समय के स्टेटस का तुलनात्मक अध्ययन कर सकता है।
पास के स्कूल से प्रार्थना और उसके बाद राष्ट्रगान की आवाज रोज सुनाई देती है। 200 मीटर की दूरी से लाऊडस्पीकर से आती 'जन गण मन' की आवाज रोज सावधान कर देती है। यह भी लगता है कि स्कूल की असेम्बली में जब सब प्रार्थनारत हैं, सब राष्ट्रगान गा रहे हैं तो फिर ध्वनिविस्तारक की आवाश्यकता क्या है? शायद देशप्रेम के भाव से ज्यादा उसका हल्ला ज्यादा जरूरी है।
स्कूल से आवाज आ रही है:
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुले हैं इसकी , ये गुलसितां हमारा।
कुत्ते अब शांत हो गए हैं। चिड़ियां बोलने लगी हैं। बोल शायद पहले भी रहीं हों लेकिन कुत्तों की आवाज के शोर में शायद उनकी आवाज दब गई थी। दुनिया में भी ऐसा ही होता है कि जब किसी हिस्से में सबसे क्रूर घटनाएं हो रही होती हैं उसी समय उसके तमाम हिस्सों में उससे कई गुना प्रीतिकर किस्से दर्ज हो रहे होते हैं। क्रूरता के हल्ले में कोमलता के आत्मीय किस्से चर्चित हो नहीं पाते । लेकिन वे घटित हो रहे होते हैं। भलमनसाहत प्रचार की मोहताज नहीं होती।
मीडिया जब हाल में दंगों के क्रूरता के किस्से बयान कर रहा था उसी समय दंगों में अपना जवान बेटा खो चुका एक बाप अपनी कौम के लोगों को यह कहते हुए हिंसा से रोकने की कोशिश कर रहा था कि अगर किसी ने इसके बदले में कोई हिंसा की तो मैं शहर छोड़कर चला जाऊंगा। दंगो के शोर में मीडिया ने इस घटना को दिखाया नहीं । लेकिन ऐसा हुआ। हो रहा है। होता रहेगा।
पास की पटरी से रेल हवा को चीरती हुई आगे जा रही है। हवा ऐसे आवाज कर रही है जैसे उसके पर्दे हिल रहे हों।
सबेरे की चाय अब खत्म हुई। अब जवान अपने काम को निकलेगा। आप भी अपने काम से लगिये। लेकिन पहले मुस्कराइए । यह सोचते हुए कि आप इस खूबसूरत दुनिया के वासिंदे हैं। देखिये की पूरी कायनात आपके साथ मुस्करा रही है और उसकी और आपकी खूबसूरती में आठ चांद लग गए हैं।

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