Friday, April 19, 2013

मैं अपना बयान वापस लेता हूं

http://web.archive.org/web/20140420082721/http://hindini.com/fursatiya/archives/4190

मैं अपना बयान वापस लेता हूं

मीडिया ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।
रोज किसी न किसी का कोई न कोई ऊटपटांग बयान आता है। पीछे यह बयान भी कि उनका बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
गोया जैसे ही बयान मुंह से निकला। मीडिया ने लपक के उसे पकड़ा होगा। पहले उसे तोड़ा होगा फ़िर गीले कपड़े की तरह मरोड़ा होगा। इसके बाद दुनिया को दिखा दिया।
पार्टियां परेशान हैं। चिंतनरत हैं। कैसे बयानबाजी ठीक से हो।
हमें सोचसमझ कर बयान देने चाहिये- एक ने गंभीर सुझाव दिया।
सुझाव सुनते ही सब हंसने लगे। बयानबाजी राजनीति का प्राणतत्व है। लाइफ़लाइन है। सोचने लगे तब तो दे चुके बयान। सोचने-समझने और बयानबाजी को राजनीति और ईमानदारी की तरह अलग-अलग ही रखना होगा।
एक ने सुझाया कि इस समस्या कोई न कोई वैज्ञानिक हल सोचा जाना चाहिये। कोई किट बनवायी जाये जिससे बयान कैसे भी दिये जायें लेकिन निकलें साफ़-सुथरे। धुले-पुंछे।
बयान किट चिंतन शुरु हो गया। सुझाव आने शुरु हुये। बयान किट कैसी होगी, कैसे काम करेगी। देखिये कुछ सुझाव:
किट ऐसी होनी जिससे बयान का सारा कूड़ा फ़िल्टर होकर दिमाग में ही रह जाये। एक दम पानी छानने वाली मशीन की तरह होगी बयान किट।
आम नेताओं के पास स्टोरेज वाली बयान किट होगी। वह सुबह-सुबह अपने सारे बयान किट से पास करके साफ़ कर लेगा। फ़िर केवल साफ़ बयान ही जारी करेगा। अगर बयान खतम हो गये तो फ़िर किट से और बयान साफ़ करेगा। तब जारी करेगा।
जिन कार्यकर्ताओं और नेताओं को बयान किट जारी नहीं किये जा सकेंगे उनके लिये पास के शहर में बयान फ़िल्टर मशीन लगायी जायेगी। वे अपनी सुविधानुसार आयेंगे। अपने सारे बयान फ़िल्टर करके ले जायेंगे तब जारी करेंगे। अगर किसी के पास फ़िल्टर्ड बयान खतम हो गये हैं तो हेडआफ़िस से आनलाइन फ़िल्टर हासिल कर सकता है। इसके लिये उसको अपने दिमाग और मुंह का आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
प्रवक्ताओं और बड़े नेताओं के लिये स्टोरेज वाली किट से अलग बयान किट जारी की जायेगी। वे अपने मुंह में किट को ऐसे बांधे रहेंगे जैसे स्वाइन फ़्लू के डर से लोग मुंह में पट्टी बांधे रहते हैं। वे जो मन आये बयान देते जायेंगे। बयान किट से गुजरते हुये निकलेंगे। वे बयान कैसा भी दें, वे बाहर साफ़ होकर ही निकलेंगे।
कोई ऐसे भी बयान होंगे जिनको किट साफ़ नहीं कर पायेगी? उनका क्या होगा, वे बयान कैसे जारी होंगे?- एक ने जिज्ञासा जाहिर की?
अव्वल तो जितनी तरह की बेवकूफ़ियां हम लोग बयान देने में करते हैं उन सबको फ़िल्टर करने का उपाय है इसमें। लेकिन अगर ऐसी कोई बेवकूफ़ी मिलती है बयान में जिसको बयान किट साफ़ नहीं कर पायेगी तो इसमें आटोमैटिक व्यवस्था है कि बयान के साथ में ही खंडन वाला बयान भी निकलेगा। बेवकूफ़ी वाला बयान पहले और “मैं अपने इस बयान का खंडन करता हूं” साथ-साथ निकलेगा। इससे थोड़ी खिल्ली भले उड़ेगी लेकिन नुकसान कम होगा। थोड़ी खिल्ली उड़ना भी फ़ायदेमंद रहता है। राजनीतिक पार्टियों को खिल्ली फ़्रेंडली होना चाहिये
किट चिंतन अभी जारी है। मैं उस दिन की कल्पनाकर रहा हूं जब लोगों के बयान बयान किट से फ़िल्टर होकर आयेंगे। तब के सीन सोचिये:
  1. कोई नेता धड़ल्ले से बयान जारी कर रहा है। अचानक उसकी बयान किट खराब हो गयी। उसकी बयानबाजी रुक जायेगी। अखबार में छपेगा- घटिया बयान किट के चलते अधूरा बयान।
  2. किसी की बयान किट खराब हो गयी तो वह किसी दूसरे की किट लगाकर देने लगेगा। ऐसे बदल-बदलकर बयान देने से उसको बयान संक्रमण हो सकता है। क्या पता आगे चलकर यह बीमारी ’बयान एड्स’ के रूप में जानी जाये और बयान देने वाले के कैरियर की असमय मौत हो जाये।
  3. चुनाव के मौसम में जैसे आजकल नेताओं के दल परिवर्तन होते हैं वैसे ही बड़े नेता बयान किट बदलेंगे। समाचार आयेगा- हजार बयान किट के साथ फ़लाने का दल परिवर्तन। जिस दल के पास सबसे ज्यादा बयान किटें होंगे वह सरकार बनाने का दावा पेश करेगा।
  4. चुनाव के बाद विश्लेषण होगा- अमेरिकी किटों ने जिताया चुनाव। यूरोपियन बयान किट धड़ाम। अफ़्रीकी बयान किटों ने डुबोई लुटिया। चीनी बयान किटों ने राजनीति में कब्जा किया।
  5. किसी की बयान किट बयान देते-देते अचानक फ़ट जायेगी। उनके साफ़-सुथरे बयान के साथ कूड़ा बयान आने लगेंगे। अखबार में छपेगा- नेताजी की बयान किट फ़टी। बयानों की असलियत दिखी।
  6. किसी फ़ायरब्रांड नेता को काबू में करने के लिये उसके मुंह में अहिंसक बयान किट फ़िट कर दी जायेगी। शेर बयान की जगह मेमने बयान निकलने लगेंगे।
  7. चुनाव के समय जैसे आजकल पैसा चलता है वैसे ही आगे किटें भी चलेंगी। खबर आयेगी – उपचुनाव के लिये दिल्ली से हजार बयान किटें रवाना। किटें दिल्ली से चलीं, पटना में अटकीं।
  8. जैसे चुनाव में हथियार जमा कराये जातें हैं वैसे ही अदालतें चुनाव के समय भड़कीली बयान किटें पास के थाने में जमा करा लेंगी।
  9. बयान किटों का बीमा होगा, गारंटी होगी, वारंटी होगी। ठीक से काम न करने पर किट सप्लाई कंपनियां हर्जाना देंगी। बयान किटों के अलग से कन्ज्यूमर फ़ोरम होंगे।
  10. सारी पार्टियां अपना काम-धाम छोड़कर अपनी बयान किटों का रखरखाव करती रहेंगी। ये ठीक तो सब ठीक।
अब सोचते हैं इस बारे में कोई बयान फ़िल्टर किटों के चिंतन शिविर के बारे में औपचारिक बयान जारी कर दिया जाये। लेकिन साथ में खंडन भी जारी करना होगा।
-मैं अपना बयान वापस लेता हूं।

21 responses to “मैं अपना बयान वापस लेता हूं”

  1. प्रवीण पाण्डेय
    पर यह किट फिट कहाँ की जायेगी?
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..एक दुपहरी
  2. काजल कुमार
    ‘नेता’ की जगह कुछ और पढ़ा जाए तो वो भी फिट बैठेगा.
    काजल कुमार की हालिया प्रविष्टी..कार्टून:-छोटे ब्लाॅगर इस रेस से दूर रहें
    1. रवि
      नेता की जगह – ब्लॉगर और साहित्यकार पढ़ा जाए तो ज्यादा फिट बैठेगा!
      रवि की हालिया प्रविष्टी..प्रकृति, तेरे रंग, रूप हजार…
  3. Archana
    हा हा हा बहुत खूब! बयानबाजी …
  4. सलिल वर्मा
    बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा करने वाले नेता के विरुद्ध बयान देने के लिए विरोधी खेमे में हंगामा चल रहा था. अंत में निर्णय हुआ कि अभी देखो नेता जी जाते कैसे हैं. अगर वो हवाई जहाज से गए तो हमारा बयान होगा –
    “बाढ़ ज़मीन पर और नेता आसमान से निरीक्षण करने गए. लानत है!!”
    और अगर वो ट्रेन से जाएँ तो हमारा बयान होगा..
    “बाढ़ की विभीषिका के आगे नेता जी कोई जल्दी नहीं, हवाई जहाज से न जाकर ट्रेन से गए हैं! लानत है!!”
    /
    सुकुल जी, जिनके दिमाग में कचरा ही रहा तो तो वो चिल्लाते रहेंगे और सब फ़िल्टर हो जाएगा.. इनको तो एक ऐसी मशीन की आवश्यकता है जो दोगले बयान जारी कर सके.. और बजाये बयान वापस लेने के उसी को दूसरी तरह इंटरप्रेट कर सके..
    /
    आपके इंजीनियरी दिमाग की वैज्ञानिक सोच के लिए जय हो!!!
    सलिल वर्मा की हालिया प्रविष्टी..Diamonds are forever!!
  5. Anonymous
    फ्लाप बयान किट, फ्लॉप आईडिया …
    मज़ा नहीं आया महाराज ??
    दुबारा सोंचो …
  6. satish saxena
    फ्लाप बयान किट, फ्लॉप आईडिया …
    मज़ा नहीं आया महाराज ??
    दुबारा सोंचो …
  7. सतीश सक्सेना
    पोस्ट बापस नहीं ली जा सकती क्या ??
  8. गौरव शर्मा
    सतीश जी ठीक ही ताड़े हैं. ये अब तक की सबसे बुझी हुई पोस्ट लगी मुझे.
  9. arvind mishra
    फ्रनचायिजी कौन देगा ?
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..हंगामा है क्यूं बरपा? डोयिचे वेले पुरस्कारों पर दो टूक!
  10. देवेन्द्र बेचैन आत्मा
    चिंता मत कीजिए सर जी..नये आइडिये के साथ ऐसा ही होता है। पुराने रूआबदार लोग आलोचना करते हैं। आप बस इसका प्रचार प्रसार कीजिए। वर्मा जी जैसी जुबान वाले नेता की नजर पड़ गई तो समझिये आपके वारे-न्यारे हो जायेंगे। फिर वही लोग दाँतो तले उँगलियाँ दबायेंगे जो आज आपके आइडिया की आलोचना कर रहे हैं।
    तुलसी बाबा के साथ क्या हुआ था! :)
  11. soniya srivastava
    yantrik aur sahitiyik vicharon ka khoobsurat mishran hai. aap kahan se ye idea laaye hai pata nahi isko patent kara lijiye varna kai raajnitik dal ispe kaam bhi chupke se kara lenge aur aap royalty se bhi jaayenge. bekar mei bina kuch liye aapne idea de diya aur naa paise hi mile aur naa hi vahvahi. yahi india hai guruji. agar kahi videsh mei hote to ab tak aapka apharan ho gaya hota. chaliye agar aisi machine ban gai to kam se kam manmohan ji ko ye poochna nahi padega ki “”SAB THIK HAI”".
  12. Dr. Monica Sharrma
    ना जाने कब चल रहा है ये सब ..आगे भी चल निकलेगा :)
  13. समीर लाल "टिप्पणीकार"
    चिंतन … चिंतन …. चिंतन ….बस यही चलता रहेगा लगता है!!
    समीर लाल “टिप्पणीकार” की हालिया प्रविष्टी..चचा का यूँ गुजर जाना….हाय!!
  14. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    वाह, क्या बयान है…!
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की हालिया प्रविष्टी..पाँच के दाम में नौ का मजा…
  15. Rashmi Swaroop
    “बयान एड्स”… :प
    Rashmi Swaroop की हालिया प्रविष्टी..अपना गाँव… पार्ट 3
  16. Rashmi Swaroop
    “बयान एड्स”… :P
    Rashmi Swaroop की हालिया प्रविष्टी..अपना गाँव… पार्ट 3
  17. girishbillore
    Jeebh our taloo ke beech sencer fit karawana hoga
  18. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] मैं अपना बयान वापस लेता हूं [...]

Wednesday, April 17, 2013

हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?

http://web.archive.org/web/20140403093603/http://hindini.com/fursatiya/archives/4181

हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?

पी.एम.ऐसा चाहिये, जिससे सब कुछ सध जाये,
काम बने सब देश के, औ विदेश भी निभि जाये। होय कड़क डायमंड सा, जिससे सब कुछ कटि जाये,
अस झुके कभी मौका पड़े, मक्खन भी लजि जाये।
बुद्धिमान हो बहुत वो, जिससे सब दु्निया थर्राय,
कबहूं जब मौका पड़े, फ़ुल बौढ़मचंद बनि जाये।
होय गरीबों का रहनुमा, उनकी गरीबी देय भगाय,
सब अमीर उसकी सुने,उनकी सब बिगड़ी देय बनाय।
-कट्टा कानपुरी
मीडिया की माने तो आज देश की सबसे बड़ी समस्या अगले प्रधानमंत्री का चुनाव है। जैसे अगला प्रधानमंत्री तय होते ही सब बवाल कट जायेंगे। मीडिया रोज माइक लिये अगला प्रधानमंत्री खोजता रहता है।
जैसे लोग कपड़े की दुकान में जाते हैं। कोई कपड़ा देखते हैं। सीने से लगाकर साथ वाले से पूछते हैं- ये कैसा लगा रहा है। साथ वाला सर हिलाता है-ऊंहुन! जा नहीं रहा है। जा नही रहा मतलब जम नहीं रहा। उसको धर के अगला देखते हैं। वो और नहीं जाता। किसी का रंग पसंद आता है तो फ़िटिंग गड़बड़। फ़िटिंग ठीक तो रंग चुभता है आंखों। दुकान-दुकान घूमता है आदमी लेकिन एक जोड़ी कपड़ा नहीं पसन्द आता। वैसे ही मीडिया रोज एक नया प्रधानमंत्री ट्राई करता है, उतार के धर देता है। कोई पसंद नहीं आता।
मीडिया प्रधानमंत्री की खोज में उसी तरह हलकान है जैसे जवान लड़की का बाप उसके लिये वर की चिंता में घुला जाता है। जहां कहीं कोई जवान लड़का दिखता है, उसकी कुंडली मांग लेता है। मीडिया को भी किसी के साथ पचीस-पचास सांसद दिख जाते हैं वह उसको प्रधानमंत्री टेस्टिंग मशीन में चढा देता है- ये वाला प्रधानमंत्री कैसा रहेगा।
मीडिया लोगों से राय भी लेता रहता है। आपको कैसा पीएम चाहिये। ईमानदार पार्टी वाले कहते हैं उनका प्रधानमंत्री सब बेईमानों को जेल भेज देगा। शायद वो बेईमानी का कोई डोप टेस्ट कराये। जिससे उसके प्रधानमंत्री बनते ही ईमानदारी का टेस्ट पाजिटिव/निगेटिव आ जाये। फ़िर तो उसको प्रधानमंत्री बनते ही जेले बड़ी करवाने का काम करना होगा।
भ्रष्टाचार जड़ से उखाड़ फ़ेंकने वाला प्रधानमंत्री किसान टाइप का होगा। दिन भर लिये खुरपी भ्रष्टाचार की गाजर घास उखाड़ता रहेगा।
देश के स्वाभिमान की रक्षा करने वाला प्रधानमंत्री वीर रस का कवि टाइप होगा। ऐसी कड़क आवाज में धमकी देगा पाकिस्तान/बांग्लादेश को कि वे दहल जायेंगे। लेकिन चूंकि अमेरिका और चीन के लोग भारतीय भाषायें जानते नहीं सो उनको जब उसके भाषण का अनुवाद बताया जायेगा तो लगेगा कि देश का प्रधानमंत्री कित्ता विनम्र, मुलायम, समझदार और सहिष्णु है।
गरीबों का रहनुमा हो वह। उसकी आवाज में गरीबों के लिये खूब सारा दर्द होना चाहिये। उसको देखते ही गरीबों को लगे कि अब हमारी गरीबी के दिन गये।
अमीरों के हित की रक्षा वो ऐसे करे जैसे अमेरिका इजरायल की चिन्ता करता है।
जातिवाद विरोधी इत्ता विरोधी हो कि पूछने पर अपनी ही जाति भूल जाये। देशसेवा का व्रत लेते ही मैं अपनी जाति भूल गया। लेकिन मौका पढ़ने पर दुनिया भर के लोगों के कुल/गोत्र/बिस्वा की कुंडली गिना दे।
इतना काबिल हो प्रधानमंत्री कि मंहगाई को माउस से नियंत्रित कर सके। जहां मंहगाई उचके उसको माउस से घसीटकर एक जगह फ़्रीज कर दे डांटते हुये -चुपचाप यहीं बैठी रहो। खबरदार जो जरा सा भी हिली। हिली तो पिट्टी कर देंगे।
रोजगार तो ऐसे पैदा करे जैसे स्टेज पर जादूगर जब मन आता है घड़े से पानी निकालकर धर देता है। जहां लोग रोजगार मांगे वह उछाल के थमा दे जैसे बाबा लोग अपने भक्तों के बीच माला से फ़ूल/प्रसाद उछालते हैं, मुस्कराते हैं। लोग एक रोजगार मांगे वो दस थमा दे। लेव कित्ते चाहिये रोजगार।
देश में ऐसी अमन फ़ैला दे कि एकदम सन्नाटा सा पसर जाये हर तरफ़। अपराधियों को सजा देने का ऐसा जुगाड़ करे कि लगे सजा का एटीएम लगा दिया है। इधर अपराध हुआ उधर सजा निकल के आ गयी। तेज/त्वरित, सस्ता टिकाऊ न्याय।
मीडिया की प्रधानमंत्री की चिता और बेकली देखकर लगता है देश का अगला प्रधानमंत्री तय होते ही सब समस्यायें दुम दबाकर भाग लेंगी।
मीडिया की सरगर्मी देखकर देश की समस्याओं की जान सूख रही है। उनको डर है कि जहां अगला प्रधानमंत्री तय हुआ उनके दिन पूरे हुये।
देश के लोग भी सोच रहे हैं बस कुछ दिन और कामधाम कर लें। जहां अगला प्रधानमंत्री चुना गया बस फ़िर तो आराम-ही-आराम होगा। जो करना होगा अगला प्रधानमंत्री करेगा।
इसके पहले कि मीडिया अगले प्रधानमंत्री का स्पेशीफ़िकेशन फ़ाइनल करे। आप भी अपनी पसंद बता दीजिये कि आपको अगला प्रधानमंत्री कैसा चाहिये?
जरा गंभीरता से बताइयेगा। ये न कहने लगियेगा-
हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो,
रामभरोसे जैसा हो।
वर्मा मीडिया शाम तक पचीस ठो रामभरोसे पकड़ लायेगा और प्राइमटाइम बहस में उनसे पूछने लगेगा- प्रधानमंत्री बनने के बाद आप देश कैसे चलायेंगे? किस दिशा में ले जायेंगे?

18 responses to “हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो?”

  1. Neeraj Diwan
    कहीं ऐसा ना हो कि सारी समस्याएँ हड़ताल ही कर दें.. चैनलवाले भूखे ही मर जाएंगे.. वही क्यूं.. फिर तो कइयों के लाले पड़ जाएंगे। वैसे फुरसतिया के अनुसार मिस समस्या मारे चिंता के जीरो साइज़ हो रही है। मिस समस्या का मुंह फुला देखकर मेरे चेहरे पर लालिमा छा गई है। सोचता हूं इसका दिल जीत लूं तो पत्रकारिता के धर्म का निर्वहन कर ही लूं।
    पीएम कैसा हो.. अपन दो लाइनें ठेल रहे हैं.. जोड़ लें..
    दिल खुलै पहीने टोपियन सबकी..टैम पड़े सभैय टोपा पहिनाय ।
    खुद पीएम भूखा ना रहैय.. पार्टीजन भी मौज उड़ाय ।।
    Neeraj Diwan की हालिया प्रविष्टी..गड्डी जांदी ए छलांगा मार दी
  2. प्रवीण पाण्डेय
    किसी संत को एक पुस्तक लिखनी पड़ेगी, पीएम संदर्भ। उसमें सारी योग्यतायें और अयोग्यताओं का क्रमवार लेखाजोखा होगा। बचपन से पढ़नी पड़ेगी ताकि बड़े होने के पहले कोई टोपी-टीका जैसी गलती न हो जाये।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..एक दुपहरी
  3. Yashwant Mathur
    हमारा प्रधान मंत्री कट्टा कानपुरी जैसा होना चाहिए।
    सादर
    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..न यह गजल है न कविता है
  4. Yashwant Mathur
    आपने लिखा….हमने पढ़ा
    और भी पढ़ें
    इसलिए कल 18/04/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ….
    धन्यवाद!
    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..न यह गजल है न कविता है
  5. arvind mishra
    इन दिनों चिंतन उचाई के स्तर पर है :-)
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..नवरात्र की शुभ बेला और शक्ति पीठों का सांस्कृतिक पर्यटन (सोनभद्र एक पुनरान्वेषण-६)
  6. shikha varshney
    एक लिस्ट ब्लॉग जगत से भी जानी चाहिए :):).
  7. Anonymous
    सन्ता : क्या अब लगता है कि इस देश के दिन बहुरने वाले हैं?
    बन्ता : और नहीं तो क्या? इतना राप्चिक पी.एम. मिलेगा तो दिन बहुरेंगे ही। फुरसत में स्पेसिफ़िकेशन फाइनल किया गया है।
  8. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    सन्ता : क्या अब लगता है कि इस देश के दिन बहुरने वाले हैं?
    बन्ता : और नहीं तो क्या? इतना राप्चिक पी.एम. मिलेगा तो दिन बहुरेंगे ही। फुरसत में स्पेसिफ़िकेशन फाइनल किया गया है।
  9. PN Subramanian
    बस लल्लू ना हो.
    PN Subramanian की हालिया प्रविष्टी..गढ़ कुंडार
  10. Yashoda agrawal
    सब हैं लायक
    किसी को भी
    दो बना पी.एम
    पर…
    सच तो ये है
    पद पाते ही
    बन जाते हैं
    नालायक…..
    सादर
  11. Yashoda agrawal
    सब हैं लायक
    किसी को भी
    दो बना पी.एम
    पर…
    सच तो ये है
    पद पाते ही
    बन जाते हैं
    नालायक…..
    सादर
    Yashoda agrawal की हालिया प्रविष्टी..इंसानियत चाहे हर इंसान………………………….मंजूषा हांडा
  12. Anonymous
    जो भी पत्ता फेंको वही बादशाह वाला निकल जाता है ……
  13. shefali
    जो भी पत्ता फेंको वही बादशाह वाला निकल जाता है ……
  14. Rekha Srivastava
    प्रधान मंत्री का चुनाव हम ब्लॉग पर ही क्यों न कर लें? अपने को गुण बखान किये हैं न खोजने पर सब मिल जायेंगे. राजनीती में तो बड़ी राजनीती है – यहाँ पर सब साफ सुथरा है और देश के हित में भी रहेगा.
    Rekha Srivastava की हालिया प्रविष्टी..हौसले को सलाम ! (12)
  15. समीर लाल
    मैं खुद से तो कैसे खुद को प्रपोज करुँ…
  16. soniya srivastava
    aisa PM to computer engineer ko design karna padega. Saare specifications daal k Robot bana de. Aapke guidance mei jyada achha banega. Kyu na IIT Kanpur se design karaya jaaye? Sasta aur tikau padega aur sarkari alag?
  17. Rashmi Swaroop
    एक में तो ये सबकुछ होने से रहा… इत्ते सारे पी. एम…. एक कुर्सी पर कैसे बैठेंगे एक साथ? :P
    जब सब समस्याएं दूर हो जाएँगी तो फिर इन प्रधानमन्त्री’ज़ को कुर्सी से रिमूव करना ही कहीं एक समस्या ना बन जाए…!
    Rashmi Swaroop की हालिया प्रविष्टी..अपना गाँव… पार्ट 2
  18. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] हमारा प्रधानमंत्री कैसा हो? [...]

Tuesday, April 09, 2013

देवलोक में चीनी चर्चा

http://web.archive.org/web/20140420081759/http://hindini.com/fursatiya/archives/4157

देवलोक में चीनी चर्चा

पिछ्ले दिनों खबर आयी कि सरकार ने चीनी भी अपने नियंत्रण से बाहर कर दी। अब चीनी के दाम बाजार तय करेगा। यह खबर जैसे ही देवलोक में पहुंची वहां हाहाकार मच गया। सारे देवता परेशान हो गये कि इससे उनके प्रसाद पर सीधी चोट पहुंचेगी। तमाम युवा देवता अपनी-अपनी आरती पुस्तिका, जिनमें उन पर लड्डू चढ़ने का जिक्र है, लहराते हुये देवचौपाल पर जमा हो गये। कुछ देवताओं ने साधु-साधु कहकर इसकी भर्त्सना की (देवता लोग गुस्से में भी साधु-साधु ही कहते हैं)। वे गुस्साये हुये थे। बौखलाये हुये थे। कुछ देवता तो बमक भी रहे थे। देवता लोग इतने आवेश में थे कि उनकी बातें साफ़ सुनाई नहीं दे रहीं थी। किसी लोकतांत्रिक देश के सदन सरीखा हो गया मामला। कुछ देवताओं के बयान आप भी सुन लीजिये:
  1. -यह घोर पातक है देव। जो देश हमारे भरोसे(भगवान भरोसे) चल रहा है वहीं पर हमारे प्रसाद पर कटौती की साजिश। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
  2. - हम देवता हैं, देवता। कोई आम जनता नहीं। इस पाप का दंड देंगे-भरपूर देंगे।
  3. -खोये की जगह आलू, शकरकंद हम बर्दास्त करते रहे लेकिन अब चीनी के भी लाले पड़ जायेंगे ऐसा कभी स्वप्न में भी नहीं सोच सकते हम तो। घोर कलयुग। अनर्थ।
  4. -देव अब आप फ़ौरन नया अवतार लेकर जायें पृथ्वी लोक पर और फ़ौरन उन पातकियों का संहार करें जिन्होंने यह पाप किया है। अब और विलम्ब सहन नहीं होता।
  5. -हमको वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति वाले कानून का सहारा लेकर उन लोगों की गन्ने से पिटाई करनी चाहिये जिनके उकसावे पर सरकार ने चीनी को अपने नियंत्रण से बाहर करने का निर्णय लिया। कुछ क्षण के लिये हमें अहिंसा की बात विस्मृत कर देनी चाहिये।।
पापियों की निन्दा करके जब देवगण थक गये तो वे सोचने लगे कि अब क्या किया जाये? अब चूंकि देवताओं को सोचने की आदत तो होती नहीं तो उनको समझ में ही नहीं आया कि किया क्या जाये? वे परेशान हो गये। फ़िर भी कुछ सोच नहीं पाये। उनकी स्थिति और सोचनीय हो गयी। डबल समस्या कि उनके ऊपर आफ़त आयी है और वे कुछ नहीं सोच पा रहे।
इस पर एक बुजुर्ग देवता ने समझाया कि वत्स देवगण अव्वल तो कुछ करते नहीं। करते भी हैं तो कभी कोई काम सोच-विचार कर नहीं करते। अगर कुछ करना ही होता, वह भी सोच-विचार कर ही, तो जुगाड़ लगाकर देवलोक क्यों आते? देवलोक में सोच-विचार का रिवाज नहीं रहा कभी। हर काम बिना सोचे-विचारे करते हैं देवगण। बिना विचारे वरदान देना, बिना बिचार दंड देना। बिना बिचारे कुछ भी करते रहने का यह विशेषाधिकार ही तो देवगणों को देवता बनाता है। देवलोक में प्रवेश करते ही देवगणों को वे सब सुविधायें प्राप्त हो जाती हैं जो मृत्युलोक में मात्र वी.वी.आई.पी.ओं, मवालियों, माफ़ियाओं को हासिल होती हैं।
इसके बाद देवगणों ने बिना सोचे कुछ उपायों पर चर्चा और उनको खारिज भी करते गये। देखिये आप भी नमूना उपायों पर चर्चा करने का:

  1. उपाय:फ़ौरन किसी देवता को धरती पर भेजा जाना चाहिये जो वहां जाकर दुष्टों का संहार करे।
    खारिज तर्क: किस देवता की जान जोखिम में डाल दें? जब वहां आला पुलिस अधिकारी तक की जान की गारंटी नहीं तो भला एक देवता की कौन सुनेगा वहां। जिसको भेजेंगे उसको कोई महंत पकड़ के किसी मंदिर में कैद कर लेगा और छुड़वाने के लिये फ़िरौती अलग से मांगेगा।
  2. उपाय: वोट क्लब पर धरना दिया जाये! आमरण अनशन किया जाये!
    खारिज तर्क:धरनें में हमारे पीताम्बर और धवल वस्त्र सारे भीग जायेंगे। लाठीचार्च हो गया तो घुटने अलग फ़ूटेंगे। रोज-रोज प्रसाद खाते रहने के चलते अब भूखे रहने का आदत रही नहीं। अनशन हमसे न सपरेगा। अनशन ही करना होता तो देवता ही काहे बनते!
  3. उपाय: जिस सरकार ने यह चीनी सरकारी नियंत्रण से बाहर की है उसको गिरा दिया जाये।
    खारिज तर्क:उससे क्या होगा? कोई फ़ायदा नहीं। अगली सरकार की क्या गारंटी कि वह चीनी वापस ले आयेगी नियंत्रण। जब वे लोग तक सरकार पर भरोसा नहीं करते जिनके वोट से सरकार बनती है तो हमारा किसी सरकार पर भरोसा करना देवतापना ही होगा।
  4. उपाय: मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाया जाये।
    खारिज तर्क:उससे क्या होगा। उससे मुद्दा कश्मीर समस्या सा उलझ जायेगा
  5. उपाय: चीनी की खुद खेती जाये। भक्तगण अगर चीनी कम डालेंगे प्रसाद में तो बाकी की भरपाई खुद की चीनी से की जाये।
    खारिज तर्क:फ़िर तो हम देवता नहीं किसान बनकर रह जायेंगे। देवगणों के लियेकाम हराम है
इसी तरह देवचौपाल पर चीनी के नियंत्रण मुक्ति की समस्या से निपटने के उपाय उछलते रहे और उनको तर्कों से खारिज किया जाता रहा। जब कभी खारिज तर्क के प्रकट होने में देरी होती, देवगणों के हलक सूखने लगते।
इस बीच किसी ने सुझाया कि सरकार ने देवगणों की भलाई के लिये ही यह कदम उठाया है। देवगण बैठे-बैठ प्रसाद खाते रहते हैं, कुछ करते नहीं तो उनके डायबिटीज होने का खतरा रहता है। प्रसाद में चीनी कम होने से यह खतरा कम होगा।
किसी ने यह भी बताया कि भूलोक की परिस्थितियां दिन पर दिन जटिल होती जा रही हैं। देवताओं के बिना वहां के लोगों का कोई सहारा नहीं। इसलिये चीनी भले ही सरकारी नियंत्रण से निकलकर सोने के भाव बिकने लगे लेकिन देवताओं के प्रसाद में कोई कमी न आयेगी।
फ़िल्मी जानकारी रखने वाले एक देवता ने अमिताभ बच्चन जी की एक फ़िल्म ( चीनी कम जिसमें नायक उम्रदराज था और नायिका युवा ) का हवाला देते हुये राय जाहिर की- हो सकता है सरकार हमारी चीनी का कोटा कम करके हमारे लिये नयी अप्सराओं की व्यवस्था पर कुछ विचार कर रही हो।
अप्सराओं का जिक्र आते ही देवगणों के, चीनी के सरकारी नियंत्रण में से बाहर जाने की खबर से मुरझाये, तमतमाये, बौखलाये चेहरे खिल उठे। वे अप्सरा दर्शन के लिये व्याकुल हो उठे। देवदरबार जम गया। देवगण सुरापान करते अप्सराओं के नृत्य का आनंद उठाने लगे। सब कुछ फ़िर देवलोक सरीखा हो गया।
कुछ युवा देवता अप्सराओं के नृत्य से विरत और बोर होकर अपने आई पैड पर आई.पी.एल. क्रिकेट मैच का सीधा प्रसारण देखने के बहाने चौकों-छक्कों पर ठुमके लगाती चीयरबालाओं को निहारने में तल्लीन हो गये।
चीनी चर्चा देवलोक से उसी तरह गायब हो गयी जिस तरह कभी टीवी मीडिया पर भयंकर तरीके से छाया भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन तिरोहित हो चुका है।

13 responses to “देवलोक में चीनी चर्चा”

  1. देवांशु निगम
    हम को लगा देवता लोग कुछ चीन के बारे में बतिआ रहे है , यहाँ तो चीनी के बारे में बात हो गयी :) :)
    घर पर गन्ने की खेती होती है | सरकार समर्थन मूल्य में हर बार लफड़ा लोचा करती है | किसानों को काफी नुक्सान होता है | अभी अगर मार्किट तय करेगा मूल्य तब तो फिर मिल मालिकों और बिचौलियों की चांदी है !!!
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..बाइक की सवारी, गाँव घुम्मकड़ी और बाबा गुप्तिनाथ के दर्शन !!!
  2. दीपक बाबा
    एक अलग से ‘केंद्रीय चीनी मंत्रालय’ का गठन किया जाए… और फुर्सत के नामी फुरसतिये ही उसके आजीवन मंत्री बने रहेंगे..:)
    जो ब्लोग्गरजन मिठास भरी पोस्टें लिखते हैं, उन्हें इसी मंत्रालय से मानदेय के रूप में साल भर की चीनी का कोटा तय रहेगा.
  3. भारतीय नागरिक
    देवताओं को भी गद्दी चाहिये और नव-देवों को भी.
    भारतीय नागरिक की हालिया प्रविष्टी..दोष किसका.
  4. shikha varshney
    चीनी कम ..वाला ऑप्शन अच्छा है …बोले तो दिल के खुश रखने को देवो ये ख़याल अच्छा है :).
    1. sanjay jha
      (:(:(:
      प्रणाम.
  5. ajit gupta
    चीनी का अकाल भी पड़ जाए तो भी प्रसाद बनना बन्‍द नहीं हो सकता। बच्‍चे भूखे रहें लेकिन पण्डितजी तो अपने ठाकुर के लिए कोई न कोई जुगाड़ भिड़ा ही लेंगे।
    ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..अब तो भईया बूढ़े हो गए, रंग नहीं बस गुलाल ही मल दो
  6. गौरव शर्मा
    ढेर दिन से एगो बात कहे के रहलीं, बाकि सोचत रहलीं के टटका पोस्ट पर कहीं. तोहार पोस्ट आये में थोड़ा टाइम लेला मगर भाई का ज़बरदस्त होला. हम त ई कहतनी के तोहार ब्लॉग इन्टरनेट पर बेस्ट हिंदी ब्लॉग ह!
    एही तरह लिखले रह!
  7. गौरव शर्मा
    औउर तोहार लेखनी में कबो-कबो श्रीलाल के छाया भी दिखाई पड़ जाला उनकर मौज लेवे के ढंग के नियर.
  8. प्रवीण पाण्डेय
    यह हमारी अब तक संयत मिठाई प्रेम पर सीधा प्रहार हो गया।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..गोवा, दक्षिण से
  9. arvind mishra
  10. Yashwant Mathur

    कल दिनांक 14/04/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    Yashwant Mathur की हालिया प्रविष्टी..बेटों की चाह में कहीं खो रही हैं बेटियाँ………
  11. Swapna Manjusha
    हमरा बड़का विरोध दर्ज किया जावे :)
    काहे से कि आप बहुते भारी बेइंसाफी कर रहे हैं ! आप बात-बात में देव लोक को काहे घसीट लाते हैं ? जब देखो देवलोक, देवलोक, आप तो सबसे पाहिले ई बताईये की ‘देविलोक’ भी कोई होता है की नहीं ?? सब देवी लोग कहाँ विराजती थीं? देवलोक संसद में भी एको गो देवी का सीट नहीं दिखा हमको, कम से कम 33% तो होना ही चाहिए, महिलाओं का प्रतिनिधित्व के साथ ऐसा बेइंसाफी, बाप रे ! हम तो सोचिये के दुबरा गए हैं । देवियों को अपना समस्या कहने का कोई अवसर नहीं मिला। आप ही बताईये मर्त्यलोक से चीनी का गायब होना , देवियों का भी पिरोब्लेन होगा न , उसका आप कौनो जीकर नहीं किये ?? देवियों को भी लड्डू, कलाकंद, पेंडा चढ़ता है की नहीं ? और फिर बाद में देव लोग तो मदिरा-उदीरा पी लिए अफसरा लोग का डांस देख लिए। और देवी लोगन का मनोरंजन का कोई उपाय है की नहीं, की ऊ लोग बस झाडू-बुहारू, बासन-बर्तन में ही जीवन बिता रही है सब ? ई इग्नोर्ड डिपार्टमेंट का भी कुछ खुलासा कीजिये, नहीं तो सब चीनी कम देवी बन के रह जायेंगी। बहुते चिंता में हैं हम :)
    Swapna Manjusha की हालिया प्रविष्टी..नारीवाद एक आन्दोलन …!
  12. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] देवलोक में चीनी चर्चा [...]