Wednesday, January 29, 2014

सूरज भाई अन्दर मेज पर आकर चमकने लगे

अभी दरवाजा खोला तो सूरज भाई दिखे। गरम कर दिया मिनट भर में। बोले -जब ठिठुरते थे आगे-पीछे घूमते थे। अब जरा सर्दी कम हुई तो भाव बढ गयें हैं। दूर भागते हो। तोताचश्म कहीं के! हमने कहा -अरे सूरज भाई आपके बिना किसका गुजारा? आओ अन्दर चाय पीते हैं। सूरज भाई अन्दर मेज पर आकर चमकने लगे। फ़ोटो नईं और गरम हो जायेंगे।

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