Thursday, January 30, 2014

धूप और रोशनी की राजनीति

सूरज भाई के साथ सुबह की चाय पीते हुये हमने उनसे पूछा- क्यों भाई दिल्ली से क्या कुछ नाराजगी है क्या? आजकल उधर कम जाते हो!
अरे यार, वहां राजनीति बहुत है। जाने का मन नहीं होता। तुम्हारे पास अच्छा लगता है इसलिये आ जाता हूं रोज। -चाय की चुस्की लेते हुये सूरज भाई बोले।

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