Tuesday, February 11, 2014

सूर्यनारायण सब से बड़े भंगी हैं

अच्छा ‪#‎सूरज‬ भाई आप अपना काम कैसे करते हो? कैसे तय करते हो कहां जाना है कहां नहीं जाना है? हमने आज सूरज भाई से पूछा!
इस पर सूरज भाई ने Aflatoon Afloo की पोस्ट का लिंक थमा दिया जिसमें उनके काम करने का तरीका बताया हुआ था। आप भी बांचिये:
"सूर्य से हम कितना कुछ सीख सकते हैं ! सूर्य हमारा गुरु है । गौर कीजिए ,सूरज कैसे काम करता है । सूर्य उगता है तब उसका प्रकाश सबसे पहले उस झोंपड़ी में जाता है जिसमें दरवाजे नहीं होते । इसके बाद दरवाजे वाले झोंपड़ों में , तब शहरों में तथा महलों में । सूरज जितना नग्न व्यक्ति की सेवा करता है उतनी कपड़े – लत्ते वाले की नहीं । परन्तु आज स्वराज में इससे उलटा हो रहा है । सब-कुछ पहले साधन सम्पन्नों के पास पहुँचता है , फिर धीरे – धीरे नीचे के स्तर तक पहुंचता है । जैसे बिजली आती है तो पहले बड़े-बड़े शहरों में जाती है ,तब देहात में जाती है । गांव में भी पहले उसे मिलती है जिसके पास पैसा होता है और जो उसे खरीद सकता है । इसके फलस्वरूप यह कुछ लोगों का धन्धा बन जाता है । जो दूर – दराज के गांव हैं , वहां तो बिजली पहुंचती ही नहीं । गरीबों के पास पहुंचती भी है तो प्रकाश के रूप में , काम – धन्धे और उत्पादन के लिए नहीं । सूर्यनारायण इससे ठीक उलटा करते हैं और स्वराज में वैसा ही होना चाहिए ।"
वाह भाई आप तो सही में जनता के भले के लिये काम करते हैं। अगर चुनाव में खड़े हो जायें तो सौ-पचास सीटें तो पक्की। क्या पता पी.एम. भी बन जायें। इत्ती रोशनी का हिसाब है आपके पास।
सूरज भाई मुस्कराते हुये बोले- अरे हम रोशनी ही नहीं सफ़ाई का भी काम करते हैं। सबसे बड़े मेहतर हैं हम। ये देखिये, बांचिये:
सूर्यनारायण सब से बड़े भंगी हैं , भंगियों के राजा हैं । वे अनथक अविरत रूप से दुनिया की सफाई करते रहते हैं । इसमें एक दिन की छुट्टी नहीं लेते । सूर्यनारायण की ऐसी कृपा जो हिंदुस्तान पर न होती , तो हिंदुस्तान के देहात नरक बन जाते और यहां जीना मुश्किल हो जाता । हिंदुस्तान में हम इतनी गन्दगी करते हैं , खुले में मल – विसर्जन करते हैं । यदि सूर्य न होता तो लोग रोग से बरबाद हो जाते । सूर्य एक दिन भी गैर हाजिर नहीं रहता यह उसकी बड़ी कृपा है ।

इसलिए मैंने उसे भंगियों का राजा कहा है । वह सभी मेहतरों से ‘महत्तर’ है । महान से महान भंगी है , महत्तर मेहतर है । मेहतर शब्द संस्कृत के महत्तर शब्द से बना है। उसका अर्थ है जो महान से महान होता है अर्थात जो महान से महान काम करता हो । कितने दुख की बात है यह जो सब से बड़ा काम है , उसे आज नीचे से नीचा काम माना जाता है । ऐसा समाज कभी सच्ची प्रगति नहीं कर सकता ।"
http://kashivishvavidyalay.wordpress.com/2008/07/10/
1 post published by अफ़लातून अफलू on July 10, 2008
kashivishvavidyalay.wordpress.com

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