Monday, February 03, 2014

दिल्ली में प्रदूषण बहुत है

आपकी दिल्ली से क्या नाराजगी है ‪#‎सूरज‬ भाई! वहां क्यों नहीं जाते? लोग हकालान हैं तुम्हारे इंतजार में। --#सूरज भाई के कप में और चाय डालते हुये हमने पूछा।

अरे यार दिल्ली में प्रदूषण बहुत है। कोहरे और गंदगी के बिचौलियों को Z सिक्योरिटी की तरह फ़ैला रखा है दिल्ली वालों ने। जब कभी जाता भी हूं तो लोग इज्जत भी नहीं करते जैसे मैं कोई राजनीतिक मुद्दा हूं। ऐसी जगह जाने की जब भी सोचता हूं तो ’बलबीर सिंह रंग’ की ये लाइने याद आ जाती हैं:

"जिस तट पर प्यास बुझाने से अपमान प्यास का होता हो,
उस तट पर प्यार बुझाने से प्यासा रह जाना बेहतर है।"


हमें लगा कि वे शायद और कुछ सुनायें। लेकिन वे अपनी किरणों, रश्मियों, प्रकाश, उजाले को पेड़, पत्तों, सड़क, घास, छत, आंगन , मुढेर मतलब कि हर कोने अतरे में फ़ैल जाने की हिदायतें देने लगे। शायद वे हमको बताना चाह रहे थे कि उनके मन में किसी के प्रति भेदभाव नहीं है।

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