Monday, February 17, 2014

धरती पर कालीन की तरह पसरी ओस की बूंदे




#सूरज भाई मीलों रेल की खिड़की से चिपके मेरे साथ चलते रहे. आँख मिली तो चमकने लगे.गेट पर गए तो गले लगा लिया.दूर-दूर उनका जलवा पसरा है. ओस की बूंदे धरती पर कालीन की तरह पसरी है.तालाब के पा स कुछ सुअर शिशु टहल रहे है. लग रहा है अनमने से बच्चे स्कूल जा रहे है. सुबह सुहानी है. जबलपुर आ गया

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