Monday, August 25, 2014

पुलिया पर कुरियर बंटवार

आज दोपहर ये भाई लोधी जी सर्वहारा पुलिया पर आरामफ़र्मा थे। कुरियर बांटने का काम करते हैं। मारुति कुरियर सर्विस के कुरियर बंटवार। अमूमन तीस-चालीस जगह रोज बांटते हैं डाक। 30-40 किमी रोज का साइकिल चलाना हो जाता है। पांच हजार रुपया महीना पाते हैं। महीने में सौ-दो सौ साइकिल रिपेयरिंग के मिल जाते हैं। भाईजी हाईस्कूल तक पढे हैं। घमापुर में रहते हैं। आज सब डाक-डूक बांटकर पुलिया पर आराम कर रहे थे। मुंह में पान मसाला इधर-उधर घुमाते हुये।

हमसे हमारे बारे में पूछने लगे भाईजी कि आप क्या करते हैं? हमने बताया तो पूछने लगे कि फ़ैक्ट्री में लेबर की भर्ती होने की कोई आशा है क्या? हमने बताया -हमें तो नहीं लगता। लेबर आजकल सब ठेके पर लिये जाते हैं।

भाईसाहब आराम करने के मूड में थे सो हम उनका फ़ोटू खैंचकर फ़ैक्ट्री आ गये!

फ़ोटो: आज दोपहर ये भाई लोधी जी सर्वहारा पुलिया पर आरामफ़र्मा थे। कुरियर बांटने का काम करते हैं। मारुति कुरियर सर्विस के कुरियर बंटवार। अमूमन तीस-चालीस जगह रोज बांटते हैं डाक। 30-40 किमी रोज का साइकिल चलाना हो जाता है। पांच हजार रुपया महीना पाते हैं। महीने में सौ-दो सौ साइकिल रिपेयरिंग के मिल जाते हैं। भाईजी हाईस्कूल तक पढे हैं। घमापुर में रहते हैं। आज सब डाक-डूक बांटकर पुलिया पर आराम कर रहे थे। मुंह में पान मसाला इधर-उधर घुमाते हुये।

हमसे हमारे बारे में पूछने लगे भाईजी कि आप क्या करते हैं? हमने बताया तो पूछने लगे कि फ़ैक्ट्री में लेबर की भर्ती होने  की कोई आशा है क्या? हमने बताया -हमें तो नहीं लगता। लेबर आजकल सब ठेके पर लिये जाते हैं। 

भाईसाहब आराम करने के मूड में थे सो हम उनका फ़ोटू खैंचकर फ़ैक्ट्री आ गये! 


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