Friday, August 22, 2014

मेरा साजन रंग रंगीला



फ़ोटो: आज दोपहर को पुलिया पर भाई लोग इस मुद्रा में मिले। दायीं तरफ़ वाले भाई बकरी चरा रहे थे। बकरियां   कहीं दिख नहीं रहीं थीं लेकिन थीं क्योंकि ऐसा बकरी चराने वाला कह रहा था। कुछ-कुछ कानून व्यवस्था की तरह जो कि दिखती नहीं लेकिन होती है क्योंकि कानून को चराने वाला (मतलब रखवाला) ऐसा कहता है। भाईजी आज खाना वाना बना के आये थे। रोटी सब्जी। सब्जी कुछ बताई थी लेकिन बिसरा गये अपन। 

साथ वाले भाई एक ठेकेदार के यहां इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। सामने एम.ई.एस. का दफ़्तर दिखाते हुये बोले- उस कमरे में एजीई  बैठते हैं। उसके बगल में बड़े बाबू फ़िर छोटे बाबू फ़िर .....। ठेकेदार का नाम अशोक भईया बताते हुये बिजली मिस्त्री मोबाइल पर  गाना सुन रहे थे। गाना बज रहा था- "मेरा साजन रंग रंगीला ....।" 

लौटते समय बकरी भाई पुलिया पर लम्बलेट हुये आरामफ़र्मा थीं। बकरियां कहीं चर रहीं होंगी। जैसे कानून के रखवाले थक जाने पर जब आराम फ़र्माते हैं तो कानून व्यवस्था को लोग चर जाते हैं।


आज दोपहर को पुलिया पर भाई लोग इस मुद्रा में मिले। दायीं तरफ़ वाले भाई बकरी चरा रहे थे। बकरियां कहीं दिख नहीं रहीं थीं लेकिन थीं क्योंकि ऐसा बकरी चराने वाला कह रहा था। कुछ-कुछ कानून व्यवस्था की तरह जो कि दिखती नहीं लेकिन होती है क्योंकि कानून को चराने वाला (मतलब रखवाला) ऐसा कहता है। भाईजी आज खाना वाना बना के आये थे। रोटी सब्जी। सब्जी कुछ बताई थी लेकिन बिसरा गये अपन।

साथ वाले भाई एक ठेकेदार के यहां इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं। सामने एम.ई.एस. का दफ़्तर दिखाते हुये बोले- उस कमरे में एजीई बैठते हैं। उसके बगल में बड़े बाबू फ़िर छोटे बाबू फ़िर .....। ठेकेदार का नाम अशोक भईया बताते हुये बिजली मिस्त्री मोबाइल पर गाना सुन रहे थे। गाना बज रहा था- "मेरा साजन रंग रंगीला ....।"

लौटते समय बकरी वाले भाई पुलिया पर लम्बलेट हुये आरामफ़र्मा थ्थीं। बकरियां कहीं चर रहीं होंगी। जैसे कानून के रखवाले थक जाने पर जब आराम फ़र्माते हैं तो कानून व्यवस्था को लोग चर जाते हैं।







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