Tuesday, August 19, 2014

पुलिया पर प्लास्टिक की ठेलिया

आज दोपहर को भाईजी अपनी ठेलिया में तमाम प्लास्टिक का सामान लिये पुलिया पर मिले। बताने लगे कि पहले यहां बहुत लोग रहते थे। अब कम हो गये तो सामान बिकता नहीं। प्लास्टिक के ग्लास, छन्नी, थाली और न जाने कितना सामान था ठेलिया में। यह भी बताया भाई जी ने-" इस बार सहालग के चलते नाते-रिश्तेदारी में बहुत जाना पड़ा तो दुकानदारी का बहुत नुकसान हो गया। लेकिन क्या करें ? दुनियादारी तो निबाहनी ही पड़ती है। "

हमने पूछा कि कुल सामान कितना होगा तो बताया तीन-चार हजार का होगा। अब जमाना है और।

आज ही हमने एक खबर देखी कि देहरादून के पेट्रोलियम संस्थान ने प्लास्टिक से ईंधन बनाने की तकनीक खोज ली है। अब पता कि इत्ते प्लास्टिक से कित्ता पेट्रोल बनेगा। पता होता तो शायद कहते कि प्लास्टिक का पेट्रोल बनवा लो भाई! मजे से रहो।


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