Sunday, December 07, 2014

ओ सनम तेरे हो गए हम

"ओ सनम तेरे हो गए हम
प्यार में तेरे खो गए हम।
जिंदगी को मेरे हमदम
आ गया मुस्कराना।"

चाय की दूकान पर इस गाने को सुनकर सूरज भाई की तरफ देखा तो उनका चेहरा बसन्तकुमार की तरह खिलखिल हो रहा था। उन्होंने लजाने की भी कोशिश की लेकिन किरणों ने टोंक दिया -'क्या दादा आप भी न! अरे गाना है। कोई आपकी लव स्टोरी थोड़ी है। इंज्वॉय इट। डोंट ब्लश।'

सूरज भाई कुछ कहते तब तक गाना बजने लगा:

"माना जनाब ने पुकारा नहीं
क्या मेरा साथ भी गवारा नहीँ।"

सब लोग गाना सुनते हुए गपियाने लगे।

सुबह निकले आज तो देखा रौशनी की चद्दरें फैली हुई थीं।लगता है आज सूरज ने अपने घर के सब कपडे धोकर सुखाने के लिए टांग दिए हैं।आसमान में।बीच बीच में धूल के कण इधर-उधर टहल रहे थे आवारगी करते हुए। सूरज भाई उनको उजाले का डंडा फटकारते हुए दौड़ा रहे थे। वे दिखाने के लिए इधर-उधर होते। लेकिन फिर थोड़ी देर में वापस आ जाते आर टी ओ दफ्तर और कचहरी में दलालों की तरह।

सड़क पर भीड़ कम थी।एक महिला एक कुत्ते को जंजीर में बांधे और दूसरे को खुल्ला टहला रही थी। जंजीर हाथ में थामे वह खुल्ले कुत्ते को कह रही थी- 'जॉनी इधर आओ।कम हियर। डॉन्ट गो अवे।'

लेकिन जॉनी किसी मुक्त अर्थव्यवस्था वाले विकासशील देश में महंगाई, क़ानून व्यवस्था सरीखा इधर-उधर अपनी मनमर्जी से टहल रहा थी। जंजीर में थमा कुत्ता भी जॉनी की तरह मुक्त होने के लिये कसमसा रहा था।

"चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए
सावन जब अगन लगाये उसे कौन बुझाए।"

जाड़ा में सावन का यह गाना बजते हुए बता रहा था कि अपने यहाँ देर है लेकिन अंधेर नहीं।सावन को आग लगाने का मौका मिलेगा लेकिन आराम से। अकबर इलाहाबादी के हिसाब से:

"रंज लीडर को बहुत है
मगर आराम के साथ।"

चाय की दूकान के बगल में समोसे बन रहे हैं।समोसे के अंदर मसाला भरते हुए दूकान वाला पानी लगाते हुए प्यार से उसकी परत को बंद कर रहा था।मानों समोसे को फुसलाते हुए कह रहा हो- "खौलती कड़ाही में कूदने के लोगों के पेट में हलचल मचा देना पुण्य का काम है। इस नेक काम को करने से जन्नत नसीब होगी तुमको और अगले जन्म में पूड़ी पराठा पैदा होंगे।"

समोसे का दिमाग पहले से ही निकाला जा चुका है सो वह अपने पेट में मसाले को विस्फोटक की तरह बांधे आत्महंता आतंकवादी की तरह खौलती कड़ाही में कूदने को तैयार है।

"चोरी चोरी कोई आये
चुपके सबसे हां दिल दे जाए।"

यह गाना बता रहा है ' वन्स अपान ए टाइम ' लोग दिल के लेन देन का काम कितना लजाते हुए करते थे। आज की तरह थोड़ी जब दिल का आदान-प्रदान मेल मुलाक़ात में विजिटिंग कार्ड की अदला-बदली की तरह होता हो।

सूरज भाई बड़े प्यार से रिक्शे वाले को भुजिया खाते हुए देख रहे थे। उनके बिना कहे तमाम किरणें उसके चेहरे को चमकाने लगीं। कुछ देर में रिक्शेवाला का चेहरे पर तृप्ति ने अपना तम्बू तान लिया। भुजिया और रोशनी आपस में लड़ने लगे कि तृप्त का भाव उनके कारण आया है।

मैंने सूरज भाई से पुछा-इनके अच्छे दिन कब आएंगे। सूरज भाई कुछ कहते तब तक गाना बजने लगा:

"फ़साना जिसे अंजाम तक पहुंचाना न हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा।"

सूरज भाई बिना कुछ बोले चाय का गिलास जमीन पर धरकर आसमान में जा विराजे। किरणों, उजाले, रौशनी ने उनके सम्मान में और चमककर उनका स्वागत किया।

सुबह हो गयी।

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